Dhanteras 2023 Mantra: सुंदर काया के साथ चाहिए बहुत सारा पैसा तो आज कीजिए इन मंत्रों का जाप
Dhanteras 2023 Mantra: पांच दिनों के दिवाली के पर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है। इसके बाद नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज का पर्व आता है। आज के दिन हर किसी को कुबेर बाबा, मां लक्ष्मी, गणेश भगवान और भगवान धनवंतरि की पूजा एक साथ करनी चाहिए। ऐसा करने से इंसान के घर सुख, शांति और समृद्धि का वास तो होता ही है साथ ही इंसान निरोगी भी बनता है।

क्योंकि आज के बदलते लाइफ स्टाइल में इंसान अपना खुद का ख्याल तो रख नहीं पाता है इसलिए आज के वक्त में निरोगी काया अनमोल रत्न है। आज के दिन लोग भगवान धनवंतरि की विशेष पूजा करते हैं। इसके लिए आपको निम्नलिखित मंत्रों का प्रयोग अपनी पूजा में करना बेहद जरूरी है। इन मंत्रों की वजह से इंसान सुंदर काया के साथ धन की भी प्राप्ति भी प्रचुर मात्रा में होती है।
लक्ष्मी मंत्र
आज शुक्रवार का दिन है, जो कि मां लक्ष्मी का ही दिन होता है और संयोग से आज धनतेरस है इसलिए आज के दिन इन मंत्रों से मां लक्ष्मी को प्रसन्न करें,ये आपको हर तरह का सुख देगा।
- ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ऊँ महालक्ष्मी नमः:।।
- ऊँ श्रीं क्लीं महालक्ष्मी महालक्ष्मी एह्येहि सर्व सौभाग्यं देहि मे स्वाहा।।
- श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं कमलवासिन्यै स्वाहा।
- ॐ ह्रीं ह्रीं श्री लक्ष्मी वासुदेवाय नम:।
सभी मंत्रों का जाप कम से कम 11 बार करें।
कुबेर मंत्र
- ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये
- धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥
- ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः॥
- ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्ट-लक्ष्मी मम गृहे धनं पुरय पुरय नमः॥
सभी मंत्रों का जाप कम से कम 5 बार करें।
धनवंतरि मंत्र
आयुर्वेद के जनक भगवान धनवंतरि की पूजा इन मंत्रों से करने से इंसान शारीरिक और मानसिक दोनों ही तरह से सुखी रहता है।
- ऊं नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतराये:
- अमृतकलश हस्ताय सर्व भयविनाशाय
- सर्व रोगनिवारणाय त्रैलोक्यपतये त्रैलोक्यनिधये
- श्री महाविष्णुस्वरूप श्री धनवंतरी स्वरूप
- श्री श्री श्री औषधचक्र नारायणाय स्वाहा।
गणेश मंत्र
कोई भी पूजा बिना भगवान गणेश के पूरी नहीं होती है बल्कि हर पूजा की शुरुआत गणपति जी से होती है। वो विध्नहर्ता है और उनकी पूजा करने से इंसान के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।
- ॐ गं गणपतये नमः
- वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
- निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥.
- गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बक:।
- नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्रराजक :।।
- धूम्रवर्णों भालचन्द्रो दशमस्तु विनायक:।
- गणपर्तिहस्तिमुखो द्वादशारे यजेद्गणम।।'












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