Chhath Puja Surya Arghya: क्यों दिया जाता है सूर्य को अर्घ्य? क्या है इसका महत्व?
Chhath Puja, First Surya Arghya: छठ पर्व के आज तीसरे दिन संध्याकाल में सूर्यदेव को पहला अर्घ्य दिया जाएगा, भक्तगण तालाबों-नदियों के पानी में खड़े होकर भगवान भास्कर को जल अर्पित करेंगे और उनसे घर-परिवार को सुखी और स्वस्थ बनाने की प्रार्थना करेंगे।
आपको बता दें कि भारतीय संस्कृति में सूर्य देवता की पूजा एवं अर्घ्य अर्पण का एक विशेष महत्व है।हमारे यहां केवल छठ पूजा में ही नहीं बल्कि आम पूजा में भी सूर्यदेव को अर्घ्य देने की परंपरा रही है।

आपको जानकर हैरत होगी कि सूर्य को अर्घ्य देना केवल धार्मिक दृष्टिकोण से ही महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि इसे वैज्ञानिक भी काफी अहम मानते हैं।
उनका कहना है कि सूर्य को अर्घ्य देने से शरीर तो स्वस्थ रहता ही है क्योंकि सूर्य की किरणें इंसान की शक्ति के लिए काफी अच्छी होती हैं तो वहीं ये इंसान के मन को भी मजबूत बनाती है क्योंकि ये सकारात्मकता का पर्याय है और नकारात्मक ऊर्जा दूर करती है।
सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा ( Surya Arghya Significance)
सूर्य को जल अर्पित या "अर्घ्य देना"एक प्राचीन और महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। यह प्रथा भगवान सूर्य को सम्मान, आभार और उनके प्रकाश और ऊर्जा के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का एक तरीका है। मान्यता है कि इससे हमारे पूर्वजों को भी संतुष्टि प्राप्त होती है और उनका आशीर्वाद हमारे साथ बना रहता है।
शाम के सूर्य अर्घ्य का सीधा संबंध धन, स्वास्थ्य और सौभाग्य की प्राप्ति से भी जोड़ा गया है। विशेषकर कार्तिक मास में सूर्य को शाम का अर्घ्य देने से पवित्रता और पुण्य की प्राप्ति होती है, जिससे जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
शाम के सूर्य को अर्घ्य देने के लाभ
- मानसिक शांति: शाम के समय सूर्य अस्ताचलगामी होता है, जिसका अर्थ है कि दिन का अंत और रात का प्रारंभ। इस समय में अर्घ्य देने से मानसिक शांति और तनाव मुक्ति मिलती है।
- आध्यात्मिक ऊर्जा: शाम के सूर्य को अर्घ्य देने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो हमारे मन और शरीर को आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाता है।
- धन और समृद्धि: ऐसा माना जाता है कि शाम को सूर्य को अर्घ्य देने से लक्ष्मी जी की कृपा प्राप्त होती है और धन की वृद्धि होती है।
- कर्म सुधार: शाम के समय सूर्य को अर्घ्य देना हमारे कर्मों को सुधारने में भी सहायक माना जाता है।
अर्घ्य देने की विधि
शाम के समय सूर्य को अर्घ्य देने के लिए जल को किसी तांबे या पीतल के पात्र में लें। जल में कुछ चावल और लाल पुष्प डालकर सूर्य की ओर मुख करके जल अर्पित करें। इस दौरान निम्नलिखित सूर्य मंत्र पढ़ने चाहिए।
- ॐ सूर्याय नमः।
- ॐ आदित्याय नमः।
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।












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