Chaitra Navratri Day 1: चैत्र नवरात्रि का पहला दिन आज, कैसे करें मां शैलपुत्री की पूजा?
Chaitra Navratri Day 1: चैत्र नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित होता है। इन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है , ये दिन शक्ति, स्थिरता और शुद्धता का प्रतीक हैं। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि आती है।

Maa Shailputri ki Puja: मां शैलपुत्री कौन हैं?
मां शैलपुत्री पिछले जन्म में सती थीं, जो भगवान शिव की पत्नी थीं। जब उनके पिता दक्ष प्रजापति ने भगवान शिव का अपमान किया, तो सती ने यज्ञ में अपने प्राण त्याग दिए। अगले जन्म में वे हिमालय के घर जन्मीं और 'शैलपुत्री' कहलायीं, फिर से भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया। मां शैलपुत्री वृषभ (बैल) पर सवार रहती हैं। इनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल होता है। ये शांति, शक्ति और स्थिरता का प्रतीक मानी जाती हैं।
Chaitra Navratri 2026 Puja Vidhi: मां शैलपुत्री पूजा विधि
चैत्र नवरात्रि 2026 के पहले दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें। लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां शैलपुत्री की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। मिट्टी के पात्र में जौ बोएं, कलश में जल भरकर उसमें सुपारी, सिक्का और आम के पत्ते डालें। नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर कलश पर रखें। यह कलश देवी शक्ति का प्रतीक माना जाता है। सबसे पहले गणेश जी का ध्यान करें। मां शैलपुत्री को रोली, अक्षत, फूल और गंध अर्पित करें,उन्हें सफेद फूल और शुद्ध घी का भोग लगाना विशेष फलदायी माना जाता है। धूप-दीप जलाकर पूजा करें।
Maa shailputri Puja Significance: मां शैलपुत्री की पूजा का महत्व
मां शैलपुत्री की पूजा से मूलाधार चक्र मजबूत होता है।जीवन में स्थिरता, आत्मविश्वास और साहस बढ़ता है। यह पूजा नए कार्यों की शुरुआत के लिए शुभ मानी जाती है।
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी बात को अमल में लाने से पहले किसी पंडित या ज्योतिषी से जरूर बातें करें।












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