Anant Chaturdashi 2023: सूत का धागा देता है अनंत सुख

Anant Chaturdashi 2023: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी कहा जाता है और इस दिन अनंत चतुर्दशी व्रत किया जाता है। अनंत चतुर्दशी व्रत करने के अनेक फल शास्त्रों में बताए गए हैं। इस व्रत को करने से उत्तम संतान की प्राप्ति होती है, कष्टों का निवारण होता है अनंत गुना सुख प्राप्त होता है। यह व्रत 28 सितंबर 2023 गुरुवार को किया जाएगा।

 Anant Chaturdashi 2023:

इस दिन दस दिवसीय गणेशोत्सव का समापन होता है और पार्थिव गणेश का विसर्जन किया जाता है। महाभारत काल में इस व्रत की शुरुआत मानी जाती है। जब पांडव जुएं में अपना राज्य गंवाकर वन-वन भटक रहे थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें अनंत चतुर्दशी व्रत करने को कहा। धर्मराज युधिष्ठिर ने अपने भाइयों व द्रौपदी के साथ इस व्रत को किया। तभी से इस व्रत का चलन शुरू हुआ।

12 घंटे 32 मिनट मुहूर्त

चतुर्दशी तिथि 27 सितंबर को रात्रि 10 बजकर 18 मिनट पर प्रारंभ होकर 28 सितंबर को सायं 6 बजकर 49 मिनट तक रहेगी। 28 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पूजा का मुहूर्त प्रात: 6 बजकर 17 मिनट से सायं 6 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। कुल 12 घंटे 32 मिनट का मुहूर्त पूजन का रहेगा। इस दिन पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र, गंड योग और गर करण रहेगा। चंद्र कुंभ राशि में और सूर्य कन्या राशि में रहेगा। इस दिन अभिजित मुहूर्त दोप 11:53 से 12:41 तक रहेगा।

अनंत चतुर्दशी व्रत विधि

अनंत चतुर्दशी के दिन व्रती प्रात: स्नानादि से निवृत्त होकर सूर्य को अर्घ्य दें और नित्य पूजनादि करके चतुर्दशी व्रत का संकल्प लें। पूजा घर में कलश स्थापित करें और कलश पर भगवान विष्णु का चित्र या मूर्ति स्थापित करें। सूत के धागे में चौदह गांठ लगाएं। इसे अनंत सूत्र कहा जाता है। इस सूत्र को भगवान विष्णु के समक्ष रखें। भगवान विष्णु तथा अनंतसूत्र की षोडशोपचार पूजा करें। भगवान को मिष्ठान्न तथा फलों का नैवेद्य लगाएं।

अनंत को स्त्री और पुरुष अपने हाथों में बांध लें

ओम अनंताय नम: मंत्र का जाप करें। पूजा के बाद अनंत को स्त्री और पुरुष अपने हाथों में बांध लें और अनंत चतुर्दशी व्रत की कथा सुनें। अनंतसूत्र बांधने के बाद ब्राह्मण को भोजन कराएं। यथायोग्य दान-दक्षिणा देने के बाद उनका आशीर्वाद लें और स्वयं अपने परिवार सहित प्रसाद ग्रहण करें।

सूत के धागे से बनता है अनंत

अनंत चतुर्दशी व्रत में सूत या रेशम के धागे को कुमकुम से रंगकर उसमें चौदह गांठें लगाई जाती हैं। ये 14 गांठें भगवान श्री हरि के 14 लोकों की प्रतीक मानी गई है। गांठ लगाकर राखी की तरह का अनंत बनाया जाता है। इस अनंत रूपी धागे को पूजा में भगवान विष्णु पर अर्पित करके व्रती अपनी भुजा में बांधते हैं। यह अनंत हम पर आने वाले सब संकटों से रक्षा करता है। यह अनंत धागा भगवान विष्णु को प्रसन्न करने वाला तथा अनंत फल देता है।

अनंत चतुर्दशी व्रत के लाभ

  • इस व्रत को करने से नि:संतान दंपत्ति को उत्तम संतान की प्राप्ति होती है।
  • इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति का खोया हुआ धन, संपत्ति, सम्मान पुन: मिल जाता है।
  • अनंत चतुर्दशी व्रत व्यक्ति के सोये हुए भाग्य को जगाता है।
  • पारिवारिक सामंजस्य और प्रेम स्थापित करवाता है यह व्रत।

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