जानिए क्यों होती है नागपंचमी में सर्प की पूजा?

बैंगलुरू। आज नागपंचमी हैं, शिव के गले में सजने वाले नागों की आज पूजा की जाती है। हिन्दू पंचांग के अनुसार श्रावण मास की शुक्ल पंचमी को नागपंचमी का त्यौहार मनाया जाता है। सर्प हमारे शत्रु हैं लेकिन फिर भी लोग उनकी पूजा करते हैं, अक्सर लोगों के दिमाग में बात आती है कि आखिर जिस सर्प से इंसानों को इतना डर लगता है उसकी पूजा क्यों की जाती है?

आईये आज हम आपके इस समस्या का निवारण करते हैं और बताते हैं इसके पीछे के खास कारण

  • भारत एक कृषिप्रधान देश है और सांप हमारे खेतों की रक्षा करते हैं क्योंकि यह फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले चूहों और कीड़ों को खा लेते हैं इसलिए उन्हें क्षेत्रपाल भी कहा जाता है और इसी कारण लोग उनकी पूजा भी करते हैं।
  • सांप सुगंध प्रिय होती है और इसी कारण हमारे पुराणों में सर्प को काफी ऊंचा स्थान दिया गया है इस कारण भी लोग उन्हें पूजते हैं।

और कारणों को जानने के लिए नीचे की स्लाइडों पर क्लिक कीजिये..

भगवान शिव के आभूषण

भगवान शिव के आभूषण

लोग सर्प को तीनों लोक के स्वामी भगवान शिव के आभूषण के रूप में देखते हैं इसलिए इनकी पूजा करते हैं।

समु्द्र मंथन

समु्द्र मंथन

देव-दानवों के बीच जब समु्द्र मंथन हुआ था तब शेषनाग के ही द्वारा यह संभव हो पाया था और इस मंथन से ही अमृत निकला था इसलिए भी नागों की पूजा होती है।

भगवान विष्णु

भगवान विष्णु

भगवान विष्णु भी शेषनाग की शय्या में विश्राम करते हैं इसलिए भी इनकी पूजा होती है।

किसी को नुकसान ना पहुंचायें

किसी को नुकसान ना पहुंचायें

वर्षा के दिनों में सारे जीव-जन्तु अपने बिल से बाहर निकलकर किसी सुरक्षित स्थान की तलाश में भटकते है। ऐसे में ये जहरीले जीव-जन्तु हमारे घर में प्रवेश करके हमें नुकसान पहॅुचा सकते है इसलिए पूजा के जरिये इनसे प्रार्थना की जाती है कि वो किसी को नुकसान ना पहुंचायें।

कृतज्ञ बुद्धि

कृतज्ञ बुद्धि

समग्र सृष्टि के हित के लिए बरसते बरसात के कारण निर्वासित हुआ सांप जब हमारे घर में अतिथि बनकर आता है तब उसे आश्रय देकर कृतज्ञ बुद्धि से उसका पूजन करना हमारा कर्त्तव्य हो जाता है। इस तरह नाग पंचमी का उत्सव सावन महीने में रखा गया है।

सावन में करें शिवपुराण का पाठ, कष्टों से पायें मुक्ति

सावन में करें शिवपुराण का पाठ, कष्टों से पायें मुक्ति

कहते हैं कि सावन के इस महीने में प्रत्येक जातक को शिवपुराण का पाठ करना चाहिए क्योंकि यह पाठ ही आपको सारे कष्टों से मुक्ति करायेगा।

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