गैर-कृषि कार्यों के लिए कर सकेंगे कृषि भूमि का उपयोग, सरकार ने नियमों में किया बदलाव

राजस्थान में अब कृषि भूमि का गैर कृषि वाले कामों के लिए भी उपयोग किया जा सकेगा। सरकार ने इसके लिए नियमों में संशोधन किया है।

नई दिल्ली। राजस्थान में अब कृषि भूमि का गैर कृषि वाले कामों के लिए भी उपयोग किया जा सकेगा। सरकार ने इसके लिए नियमों में संशोधन किया है। नगरीय विकास आवासन एवं स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल ने बताया कि राज्य सरकार ने राजस्थान नगरीय क्षेत्र कृषि भूमि का गैर कृषि युक्त कामों में उपयोग के लिए अनुज्ञा एवं आवंटन नियम 2012 (Amendment to the License and Allocation Rules 2012 in rajasthan) में संशोधन किया है। उन्होंने कहा कि, "जनता के हित को ध्यान में रखते हुए नियमों में संशोधन किया गया है।"

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उन्होंने बताया कि, "पूर्व में भू-राजस्व अधिनियम की धारा 90-ए की कार्यवाही कर मांग पत्र प्राप्त होने के 6 माह में राशि (लीज) जमा कराने के प्रावधानों को संशोधित कर 1 वर्ष किया गया है। यदि 1 वर्ष में राशि जमा नहीं होगी तो 90-ए की कार्यवाही निरस्त हो जाएगी। धारीवाल ने कहा कि राशि जमा करने की प्रक्रिया को आसान बनाया गया है। आज से किसी भी व्यावसायिक कार्य के लिए 5% जबकि अन्य सभी प्रकार के कार्यों के लिए 2.5% ही राशि (लीज) देनी होगी।" उन्होंने आगे कहा कि, "अब तक कृषि भूमि के पट्टे लीज होल्ड पर दिए जाते थे जिसमें नया प्रावधान किया गया है। अब से कृषि भूमि के फ्री होल्ड पट्टे दिए जा सकेंगे।"

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नगरीय विकास आवासन एवं स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल के अनुसार, कृषि भूमि के पट्टों में निर्माण अवधी 7 वर्ष से घटा कर 5 वर्ष कर दी गई है। उन्होंने बताया कि 5-10 वर्ष की अवधि के अंदर यदि निर्धारित जमीन पर कोई निर्माण नहीं करता है तो आवासीय दर की 1 प्रतिशत राशि जमा करवाकर निर्माण अवधी विस्तार करवाया जा सकता है और 10 वर्षों के बाद भी उक्त भूमि पर यदि कोई निर्माण नहीं होता है तो निकाय नोटिस देकर आवंटन/नियमन निरस्त कर दिया जाएगा।

उन्होंने जानकारी दी कि स्वतंत्र भूखण्डों में एक ईकाई निर्माण (एक कमरा, रसोई, लेट-बाथ) न्यूनतम करना आवश्यक होगा। इसके अलावा अन्य बड़े भूखण्डों में आच्छादित क्षेत्र में भूखण्डों के 1/5वें भाग तक न्यूनतम निर्माण आवश्यक है।

पंजीकृत विक्रय पत्रों के आधार पर नाम हस्तांतरण पर हस्तांतरण की राशि में 10 रुपए की बढ़ोत्तरी करते 100 वर्ग मीटर तक 10 रुपए प्रति वर्ग मीटर, 100-300 वर्ग मीटर तक 15 रुपए प्रति वर्ग मीटर, 300-500 वर्ग मीटर तक 20 रुपए प्रति वर्ग मीटर, 500 से अधिक वर्ग मीटर तक 25 रुपए प्रति वर्ग मीटर, की गई है।

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