आर्गेनिक कार्बन घटने से कम हो रही जमीन की उपजाऊ शक्ति, हरियाणा में पराली बनेगी समाधान!

चंडीगढ़। जमीन की कम होती उपजाऊ शक्ति को दुरुस्त रखने की खातिर हरियाणा में अब पराली समाधान बन सकती है। अधिकारियों का मानना है कि अगर किसान पराली को मल्चिंग और हैपीसीडर का प्रयोग कर खेतों में ही मिलाते हैं तो उस खेत में आर्गेनिक कार्बन की मात्रा को बढ़ाया जा सकता है। गेहूं और धान दोनों ही फसलों में पराली किसानों के लिए सिरदर्द बन जाती है। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विशेषज्ञ कहते हैं कि इस समस्या का समाधान मशीनों की मदद से निकल सकता है।

organic carbon in farming: know how to increase fertile power of land in Haryana

प्रदेश के कई कृषक अक्सर कहते हैं कि उनके पास समाधान नहीं है तो सरकार लाख सब्सिडी दे मगर जमीनी स्तर पर उसका प्रयोग नहीं हो रहा। इस समस्या के उपाय समझने से पहले किसानों को समस्या समझना जरूरी है। पराली की समस्या में आधुनिकता और मशीनीकरण का अहम योगदान है। अब इसी रास्ते से हमें समाधान निकालना होगा। अब मल्चिंग और हैपीसीडर से किसान पराली के सामाधान से लेकर आगामी गेहूं की फसल में अधिक पैदावार तक पा सकते हैं। विवि कई बार इस प्रयोग काे सफलता के साथ पूरा कर चुका है। हमारा समाज जैसे-जैसे मशीनीकरण की ओर आगे बढ़ा हमारी समस्याएं भी उसी तेजी से बढ़ती गईं। पहले खेतों में किसान हाथ से धान की फसल काटता था, जिसमें ऐसी प्रैक्टिस थी कि पौधे को एकदम नीचे से काटना है। मगर अब मशीनें करीब एक हाथ की ढुंठल छोड़ देते हैं। जिसके लिए किसान के पास कोई सामाधान नहीं हो तो किसान कुछ वर्षों से इसमें आग ही लगाने लगे। अब इससे उर्वरक शक्ति कम हुई तो मित्र कीट भी मर गए। हमारा दोहरा नुकसान हुआ।

किसानों को सबसे पहले यह ध्यान रखना है कि वह पराली में आग न लगाएं। सबसे पहले किसान मल्चर मशीन को पराली वाले खेतों में चलाएं। यह मशीन पराली के ढुंठलों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट देती है, फिर हैपीसीडर मशीन के माध्यम से बिजाई करें, इसमें पराली के छोटे टुकड़ों को खेतों में बिखर जाएंगे। जब यह दोनों काम किसान कर लें फिर उन्हें गेहूं की फसल के लिए जुताई करने की आवश्यकता नहीं है। इस प्रक्रिया से कई फायदे होंगे। सबसे पहले तो जुताई पर लगने वाली लागत और समय दोनों बचा, इससे गेहूं की फसल जल्दी पककर तैयार हो जाएगी, मार्च अप्रैल में जब अधिक गर्मी होती तो पराली मिलाने से उस खेत का तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियश कम मिलेगा तो पैदावार भी अच्छी होगी।उन्होंने कहा कि किसान यह उपाय उपनाएं उन्हें निश्चित ही लाभ मिलेगा।

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