आठ साल बाद फिर से शुरू हो सकते हैं उत्तराखंड के हाइड्रो प्रोजेक्ट, सभी मंत्रालयों में बनी सहमति

नई दिल्ली, अगस्त 27: जून 2013 में अचानक आई बाढ़ में 5 हजार से ज्यादा लोगों की मौत के बाद उत्तराखंड में हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को मंजूरी देने पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगा दी गई थी। आठ साल के बाद अब केंद्रीय पर्यावरण, बिजली और जल शक्ति मंत्रालय सात जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण की अनुमति देने पर आम सहमति पर पहुंच गए हैं। ये प्रोजेक्ट गंगा और उसकी सहायक नदियों पर हैं।

Hydro projects of Uttarakhand can be started again after eight years, all the ministries agreed

पर्यावरण मंत्रालय ने 17 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामे में सहमति व्यक्त की है। सूची में एनटीपीसी की चार 130 मेगावाट की तपोवन विष्णुगढ़ परियोजना है। जो इस साल फरवरी में चमौली जिले में धौली गंगा नदी में अचानक आई बाढ़ से तबाह हो गई थी। इसके अलावा 1 हजार मेगावाट टिहरी स्टेज-2, 444 मेगावाट विष्णुगढ़ पीपलकोट, 99 मेगावाट सिंगोली भटवारी, 76 मेगावाट फाटा ब्योंग, 15 मेगावाट मदमहेश्वर और 4।5 मेगावाट कालीगंगा-2 परियोजनाओं को भी मंजूरी दिए जाने पर विचार किया गया है।

पर्यावरण मंत्रालय द्वारा बनाई गई एक्सपर्ट कमेटी ने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट इसे स्वीकर कर लेता है तो राज्य में कई अन्य जल विद्युत परियोजनाओं के लिए रास्ता साफ हो सकता है। क्योंकि ये 7 परियोजनाएं, 26 परियोजनाओं का हिस्सा है।

अगस्त 2013 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने के बाद पर्यावरण मंत्रालय ने कई विशेष पैनल बनाए हैं और पहली विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट को स्वीकार करने से अपनी स्थिति बदल ली है। इस रिपोर्ट में आपदा को बढ़ाने के लिए बांधों को दोषी ठहराया गया था। वहीं नई विशेषज्ञ समिति के निष्कर्ष का समर्थन करने के लिए 26 हाइड्रोपावर योजनाएं कुछ नए संशोधनों के साथ शुरू की जा सकती है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा में चालू वित्त वर्ष के लिए 5,720।78 करोड़ रुपए का अनुपूरक बजट पेश किया। अनुपूरक बजट में राजस्व व्यय के तहत 2,990।53 करोड़ रुपए और पूंजीगत व्यय के तहत 2,730।25 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। केंद्र द्वारा प्रायोजित योजनाओं के लिए 3,178।87 करोड़ रुपए और बाहरी सहायता प्राप्त परियोजनाओं के लिए 56 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

कोरोना महामारी के मद्देनजर अलग-अलग तरह की सहायता और राहत के लिए 600 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। अनुपूरक बजट में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के लिए 570 करोड़ रुपए, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए 449 करोड़ रुपये, जल जीवन मिशन के लिए 401 करोड़ रुपए, अमृत योजना के लिए 137।29 करोड़ रुपए, प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए 70।01 करोड़ रुपए, स्वच्छ भारत मिशन के लिए 24।65 करोड़ रुपए और समग्र शिक्षा अभियान के लिए 214।57 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

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