हरियाणा: पौराणिक सरस्वती नदी जल्द होगी पुनर्जीवित, जलप्रवाह बढ़ाने के लिए बनाया गया मास्टर प्लान
चंडीगढ़, जून 1। भारत के प्राचीन काल से ही गंगा, यमुना, सरस्वती तीनों नदियों का नाम एक साथ लिया जाता रहा है। वेदों में भी इस नदी का उल्लेख है। लेकिन, बीतते समय के साथ ये नदी विलुप्त हो चली है। हालांकि, अब सरस्वती नदी को पुनर्जीवित करने के प्रयास तेजी से चल रहे हैं। इसके चलते नदी किनारे सरोवर बनाए जाएंगे। कई पंचायतों ने इसके लिए जमीन देने की भी पेशकश की है।

20 बड़े जलाशय बनाने का काम जल्द होगा शुरू
सरस्वती के उद्गम स्थल आदिब्रदी से लेकर पिहोवा तक एक साल में 20 बड़े जलाशय (सरोवर) बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें बरसाती पानी का संचय कर नदी में जल प्रवाह सुनिश्चित किए जाने की योजना है। सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड की योजना के अंतर्गत रामपुरा हेरियां, रामपुरा कंबोयान, बोहली, मछरौली, संगौर, मुकुरपुर और स्योंसर में जलाशय बनाए जाएंगे। रामपुरा कंबोयान में 350 एकड़ भूमि पर बड़ा जलाशय बनाया जाएगा, जिसमें 300 क्यूसेक पानी को इकट्ठा करने की क्षमता होगी। सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड जलाशयों के लिए ग्राम पंचायतों से जमीन लेने की कोशिश में जुटा है। कई पंचायतों ने हामी भी भर दी है, जहां जल्द ही जलाशय बनाने का काम शुरू किया जाएगा।
वर्ष 2024-25 तक आद्रिबद्री पर बांध बनाने का लक्ष्य
वहीं, सरकार का मुख्य ध्यान उद्गम स्थल आद्रिबद्री पर बांध बनाने पर केंद्रित है, जिसे वर्ष 2024-25 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सरस्वती नदी में पुन: जलधारा को गति देने के लिए हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बनने वाले डैम को लेकर इसी महीने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर (एमओयू) होना है। सरस्वती नदी को पुनर्जीवित करने को लेकर गंभीर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर पहले ही इस डैम को निर्धारित समयावधि में पूरा करने के निर्देश दे चुके हैं।
मास्टर प्लान तैयार
सरस्वती नदी के विकास को लेकर सरकार ने 388 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमच ने बताया कि गंदगी से पटी पड़ी सरस्वती में पानी प्रवाहित करने से पहले उसे स्वच्छ करने का मास्टर प्लान भी तैयार कर लिया गया है। कुरुक्षेत्र के पिपली से लेकर गीता की उद्गम स्थली ज्योतिसर तक सफाई अभियान चलाया जाएगा। इसके अलावा शाहाबाद से लेकर इस्माईलाबाद के जलबेड़ा तक मारकंडा के ओवरफ्लो पानी को भी संचित किया जाएगा। इसको लेकर बीबीपुर झील में बड़ा जलाशय बनाने की योजना है।












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