गोरखपुर के हथकरघा बुनकरों के उत्पाद बिकेंगे अमेजन और फ्लिपकार्ट पर, योगी सरकार करेगी करार

गोरखपुर। ई-कॉमर्स प्लेटफार्म पर अब हथकरघा बुनकरों के उत्पाद नजर आएंगे। इसके लिए हथकरघा हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्रालय अमेजन व फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियों के साथ करार करेगा। मंत्रालय ने प्रदेश के सभी जिलों से उत्कृष्ट उत्पाद तैयार करने वाले हथकरघा बुनकरों की मांगी सूची। उन्हें बुनाई की नई तकनीक का प्रशिक्षण देकर उनके उत्पाद और चमकदार बनाए जाएंगे।

Handicrafts of Gorakhpur will be sold on e commerce websites

प्रदेश सरकार की कोशिशों से हथकरघा बुनकरों के उत्पाद को जल्द ही नया मंच मिलेगा। रंगों के समावेश से शानदार चादर, गमछा, पर्दा एवं तौलिया बनाने वाले बुनकर घर बैठे ही अपना माल आनलाइन बेच सके हैं। इससे न सिर्फ उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, बल्कि देश भर में उनका उत्पाद बिकेगा। उत्पाद को कैसे बेहतर बनाया जाए इसके लिए विशेषज्ञ बुनकरों को प्रशिक्षण देंगे। गोरखपुर में हथकरघा पर बहुत अच्छा काम होता है। लगातर तीन वर्षों से गोरखपुर के बुनकर संतकबीर राज्य हथकरघा पुरस्कार जीतते आ रहे हैं।

नेपाल की ढाका टोपी का कपड़ा भी यहीं तैयार होता है। गोरखपुर एवं संतकबीर में तकरीबन एक हजार परिवार इस कुटीर उद्योग से जुड़ा हु़आ है। सहायक आयुक्त हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग रामबड़ई ने बताया कि प्रदेश सरकार बुनकरों के उत्थान की कोशिश में जुटी हुई है। उनके लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। बीते दिनों हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री सिद्धार्थनाथ स‍िंह ने बुनकरों के उत्कृष्ट उत्पाद आनलाइन प्लेटफार्म पर बेचवाने की घोषणा की थी। इसको लेकर तैयारी शुरू कर दी गई है। प्रशिक्षण के बाद बुनकरों से ऐसा उत्पाद तैयार कराया जाएगा जो देखने वालों को पहली नजर में पसंद आए।

कृषि के बुनकरी ने दिया था सबसे ज्यादा रोजगार
कृषि के बाद बुनकरी एक ऐसा पेशा था जिसने गोरखपुर में हजारों परिवारों को रोजगार दिया था। 1947 से लेकर 1980 तक हथकरघा बुनकरों का स्वर्णिम काल था। 30 हजार परिवार (करीब एक लाख लोग) स्थायी व अस्थायी रूप से इस पेशे से जुड़े हुए थे। हथकरघा पर तैयार शादानर चादर, गमछा, पर्दा और तौलिया हाथों-हाथ बिकता था। आकर्षक डिजाइन और वजन में हलकी चादर लोगों को खूब पसंद आती थी। अस्सी के दशक के बाद हथकरघा बुनकरों की स्थिति खराब होने लगी।

इसकी सबसे बड़ी वजह प्रदेश की वह 21 कताई मिलें थीं जिनसे सस्ते दर पर बुनकरों को धागा मुहैया कराना जाता था। मिल बंद हुई तो बुनकरों को महंगे दामों पर धागा और नायलान लेना पड़ा। इससे बुनकरों का मुनाफा कम होने लगा। यही वक्त था जब हथकरघा की खटर-पटर की आवाज कम होने लगी। इन मोहल्लों में चलता है हथकरघा गोरखनाथ, पुराना गोरखपुर, रसूलपुर, अजय नगर, जाहिदाबाद, शाहिदाबाद, लच्छीपुर, पिपरापुर, इलाहीबाग।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+