भूमि बैंक: किसान स्वेच्छा से सरकार को बेच सकेंगे जमीन, हरियाणा में भू-अधिग्रहण से जुड़े झगड़े न होंगे

चंडीगढ़। किसानों से अब सरकार जबरदस्‍ती उनकी जमीन नहीं ले पाएगी। किसान अपनी मर्जी से जमीन हरियाणा सरकार को बेच सकेंगे। इसके साथ ही विकास परियोजनाओं के लिए राज्‍य सरकार भूमि बैंक भी बनाने जा रही है। इसके लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है।
नई व्यवस्था में जमीन बेचने के लिए भू-मालिक सरकार को अपने रेट बताएंगे। दाम वाजिब हुए तो सरकार इसे खरीद लेगी और फिर इसे भूमि बैंक में शामिल कर सार्वजनिक हित से जुड़ी परियोजनाओं में इस्तेमाल किया जाएगा।

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विकास परियोजनाओं को सिरे चढ़ाने के लिए बनेगा भूमि बैंक, अधिसूचना जारी
इसके लिए राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने लैंड बैंक बनाने की नीति को अधिसूचित किया है। राजस्व विभाग विभिन्न विभागों द्वारा अधिग्रहीत की गई ऐसी भूमि को भी अपने बैंक में शामिल करेगा, जिसकी उन्हें अभी आवश्यकता नहीं है। यह जमीन जरूरतमंद महकमों को दी जाएगी।

विभिन्न महकमों से अधिगृहीत जमीन काे भी दूसरी परियोजनाओं में किया जाएगा इस्तेमाल
वित्तायुक्त राजस्व तथा राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजीव कौशल ने कहा कि कई बार भूमि स्वामियों, विशेषकर विदेश में रहने वाले लोगों को बाजार में मंदी या महामारी, बिचौलियों के दबाव या विभिन्न कारणों से अपनी जमीन मजबूरी में बेचनी पड़ती है। लैंड बैंक विभागों, भूमि मालिकों, किसानों और प्रदेश सरकार के लिए फायदे की स्थिति की पेशकश करेगा।

भूमि बैंक विभागों को आवश्यक सेवाओं यथा जलघर, बिजली सब-स्टेशन, कालेज और विश्वविद्यालय, मेडिकल कालेज, अस्पताल एवं पालिटेक्निक सहित अन्य विशिष्ट संस्थानों की स्थापना के लिए भूमि प्रदान करेगा। भू-स्वामियों या किसानों को अपनी भूमि की बिक्री की पेशकश करने के लिए भू अभिलेख निदेशक के आनलाइन पोर्टल पर आवेदन करना होगा। इसमें मोलभाव करने लायक मूल्य सहित भूमि का पूरा विवरण देना होगा।

वेब-हैलरिस पोर्टल की मदद से महकमे के अधिकारी स्वामित्व, खसरा संख्या सहित संपत्ति का शीर्षक आनलाइन सत्यापित करेंगे। शहरी स्थानीय निकाय विभाग के प्रशासनिक सचिव की अगुवाई में गठित भूमि एवं दर जांच समिति भू अभिलेख निदेशक कार्यालय द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट की जांच करेगी। यह समिति यह सुनिश्चित करेगी कि बेची जा रही भूमि पर कोई अदालती मामला लंबित नहीं है। भूमि मालिक को अधिकतम छह महीने के भीतर निर्णय से अवगत करा दिया जाएगा।

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मुख्यमंत्री की अगुवाई वाली कमेटी लेगी अंतिम फैसला
वित्तायुक्त राजस्व की अध्यक्षता वाली समिति लैंड बैंक बनाने के लिए किसानों द्वारा दिए गए भूमि प्रस्तावों को सैद्धांतिक रूप से अंतिम रूप देगी और मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार प्राप्त लैंड बैंक कमेटी को सिफारिश करेगी। लैंड बैंक समिति से मंजूरी मिलने पर भूमि मालिकों द्वारा दिए गए प्रस्ताव को उच्चाधिकार प्राप्त लैंड बैंक समिति के समक्ष रखा जाएगा।

भूमि क्रय को अंतिम रूप देने के तुरंत बाद संबंधित उपायुक्त द्वारा जमीन पर एक साथ कब्जा लेकर इसे लैंड बैंक में शामिल कर लिया जाएगा। अगर किसी जमीन की लंबे समय तक जरूरत नहीं पड़ती तो उसकी ई-नीलामी भी की जा सकेगी।

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