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ओपन के छात्रों को लेकर हाईकोर्ट ने दिया आदेश, दिल्‍ली के सरकारी स्‍कूलों में मिलेगा दाखिला

ओपन स्‍कूल के छात्रों को दिल्‍ली के सरकारी स्‍कूलों में मिलेगा दाखिला

नई दिल्ली, 26 मई: दिल्ली हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि ओपन स्‍कूल से पढ़ाई करने वाले छात्रों को वो सरकारी स्कूलों में एडमिशन से मना ना किया जाए। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब एनआईओएस से पढ़ाई करने वाले छात्र दिल्‍ली के सरकारी स्‍कूलों में दाखिला ले सकेंगे। अदालत ने कहा है कि अगर कोई छात्र पास है तो उसे सरकारी स्कूल में दाखिले से रोका नहीं जा सकता है।

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ओपन स्‍कूल से पढ़ाई करने वाले छात्रों को दिल्‍ली हाईकोर्ट ने राहत दी है। एनआईओएस से पढ़ाई करने के बाद अब इन छात्रों को सीधे दिल्‍ली के सरकारी स्‍कूलों में दाखिला मिल सकेगा. दिल्‍ली सरकार के स्‍कूल 33 फीसदी अंक हासिल करने वाले छात्रों को भी स्‍कूल में दाखिला देने से मना नहीं कर पाएंगे।

एजुकेशन एक्टिविस्‍ट और एडवोकेट अशोक अग्रवाल का कहना है कि नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ ओपन स्‍कूलिंग से दसवीं क्‍लास पास करने वाले छात्रों को दिल्‍ली सरकार के स्‍कूल 11वीं में दाखिला देने से मना नहीं कर पाएंगे। अभी तक ऐसा ही होता आ रहा था कि एनआईओएस से पढ़ाई करने वाले छात्रों को रेगुलर सकूलों में दाखिला नहीं मिलता था और आगे की पढ़ाई भी ओपन स्‍कूलिंग से ही करनी होती थी।

एडवोकेट अशोक कहते हैं कि दिल्‍ली हाईकोर्ट ने दिल्‍ली सरकार को आदेश दिया है कि 38 फीसदी अंकों से 10वीं पास करने वाली छात्रा अनु कुमारी को दिल्‍ली सरकार के स्‍कूल में ह्यूमैनिटीज विषयों के साथ दाखिला दिया जाए. ऐसे में यह फैसला एक नजीर होगा और एनआईओएस से पढ़ने वाले सभी छात्रों को लाभ देगा।

अनु कुमारी पहले दिल्‍ली सरकार के स्‍कूलों में ही पढ़ती थी लेकिन घरेलू कारणों से उसने स्‍कूल छोड़ दिया और 10वीं ओपन स्‍कूलिंग से की. जिसमें उसके 38 फीसदी अंक आए। 11 वीं के लिए जब अनु दोबारा दिल्‍ली के सरकारी स्‍कूल में गई और दाखिले की मांग की तो उसे दिल्‍ली सरकार के एक सर्कुलर के आधार पर दाखिला देने से मना कर दिया गया।

अनु ने सीधे ही एनआईओएस से पढ़ाई की थी लिहाजा दिल्‍ली सरकार ने दाखिला देने से मना कर दिया था। अब हाईकोर्ट ने अनु की याचिका को स्‍वीकार करने के साथ ही दिल्‍ली सरकार को आदेश दिया है कि उसे सत्र 2021-22 के लिए 11वीं में तत्‍काल दाखिला दिया जाए. हाईकोर्ट ने यह भी कहा है कि जो वर्गीकरण दिल्‍ली सरकार ने अपने सर्कुलर में किया है वह न्‍यायसंगत नहीं है।

दिल्‍ली सरकार के सर्कुलर के अनुसार एनआईओएस से पढ़ने वाले छात्रों को कम से कम दसवीं में 55 फीसदी अंक लाने होंगे. इस सर्कुलर में एक बात यह भी थी कि अगर बच्‍चे दिल्‍ली सरकार के प्रोजेक्‍ट सेंटर से ओपन स्‍कूलिंग के तहत पढ़ाई करते हैं तो प्राप्‍तांक प्रतिशत की यह बाध्‍यता लागू नहीं होती लेकिन सीधे एनआईओएस से करने पर लागू होती है।

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