कोरोना थर्डवेव: दिल्ली सरकार ने कसी कमर, तेजी से नये अस्पताल तैयार करने के लिए इस तकनीक पर होगा काम
नई दिल्ली, 3 सितंबर। कोरोना की संभावित थर्डवेव से दिल्ली को बचाने के लिए दिल्ली सरकार ने और तेजी से काम करना शुरू कर दिया है। सरकार ने अब नये अस्पतालों का निर्माण करने के लिए नए मानक और तकनीक को अपनाने की तैयारी की है। यह तकनीक न केवल ऊर्जा और पर्यावरण के लिहाज से अच्छी मानी जा रही है बल्कि निर्माण को रफ्तार देने के लिये भी खास होगी। ऐसे नये अस्पतालों के निर्माण करने के लिए इनका स्ट्रक्चर फैक्ट्री में तैयार होकर आएगा। इसको सिर्फ साइट पर लाकर फिट किया जा सकेगा।

इस संबंध में दिल्ली के स्वास्थ्य एवं लोक निर्माण मंत्री सत्येंद्र जैन ने पीडब्ल्यूडी और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ एक अहम मीटिंग भी की है। कई घंटे चली मीटिंग में मंत्री ने सरकार द्वारा बनाए जा रहे 7 नये अस्पतालों पर विस्तार से चर्चा भी की है और इसमें कई अहम निर्णय भी लिए गए हैं।
इन इलाकों में बनाये जा रहे हैं ये 7 नये अस्पताल
दिल्ली सरकार इन 7 अस्पतालों का निर्माण दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में कर रही है जिसमें सरिता विहार, शालीमार बाग, सुल्तानपुरी, किराड़ी, रघुबीर नगर, जीटीबी अस्पताल परिसर और चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय प्रमुख रूप से शामिल हैं।
सभी 7 अस्पताल पूरी तरह से मॉड्यूलर होंगे
सरकार ने इन 7 नये अस्पतालों के निर्माण की प्रक्रिया के मानकों को निर्धारित किया और कहा कि जिन 7 नए अस्पतालों का निर्माण किया जा रहा है, वे ऊर्जा व पर्यावरण के प्रति अनुकूल होने के साथ-साथ 'प्रीकास्ट बिल्डिंग मैटेरियल' तकनीक से बनाए जाएंगे। सभी 7 अस्पताल पूरी तरह से मॉड्यूलर होंगे।
अस्पतालों के निर्माण के लिए सभी स्टील और कंक्रीट की संरचनाओं का निर्माण कारखानों में ही किया जाएगा और उन्हें निर्माण स्थल पर लाकर लगाया जाएगा, जिससे निर्माण की गति में तेज़ी आएगी। अच्छी बात यह होगी कि इन अस्पतालों में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज वाले इन-हाउस ग्रीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) भी बनाए जाएंगे।
दिल्ली सरकार की ओर से अपनाई जाने वाली इस नई और आधुनिक तकनीक के जरिए इन निर्माणाधीन 7 अस्पतालों का कार्य अब और तेजी के साथ पूरा किया जा सकेगा। माना जा रहा है कि इन सभी 7 नये अस्पतालों का निर्माण अगले 6 माह के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।
इन अस्पतालों का निर्माण तेजी से करने के लिए स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने अधिकारियों को निर्देश भी दिए हैं। साथ ही यह भी कहा है कि अधिकारियों को निर्माण के आधुनिक तरीके अपनाने की जरूरत है। इस कार्य को गुणवत्ता के साथ रिकॉर्ड समय में पूरा किया जाए।
प्रीकास्ट बिल्डिंग मैटेरियल' तकनीक से होगा अस्पतालों का निर्माण
बताया जाता है कि सभी सातों नए अस्पताल 'प्रीकास्ट बिल्डिंग मैटेरियल' के साथ बनाए जाएंगे। ऐसे 'प्रीकास्ट बिल्डिंग मैटेरियल' मजबूत होते हैं और बहुत समय बचाते हैं। 'प्रीकास्ट बिल्डिंग मैटेरियल' कंक्रीट के ब्लॉक होते हैं, जिन्हें कारखानों में पहले से बनाया जाता है और फिर निर्माण स्थल पर लाया जाता है, जहां उन्हें अंतिम रूप दिया जाता है।
कारखानों में किया जाएगा स्टील संरचनाओं का निर्माण
इसके साथ ही अस्पताल निर्माण में प्रयोग होने वाली सभी स्टील की संरचनाओं का निर्माण भी कारखानों में किया जाएगा और निर्माण स्थल पर केवल असेंबलिंग के लिए ही लाया जाएगा जैसे कि 'प्रीकास्ट बिल्डिंग मैटेरियल' को लाया जाएगा। इससे निर्माण की गति में वृद्धि होगी, जिससे समय पर काम पूरा हो सकेगा। ये सभी अस्पताल पूरी तरह से मॉड्यूलर होंगे।
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अस्पतालों में बनाये जाएंगे ग्रीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
इन अस्पतालों में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए ग्रीन तकनीक को अपनाने की भी तैयारी की जा रही है इन अस्पतालों में ग्रीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने के भी निर्देश दिए। ग्रीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की यह खासियत है कि ये किसी भी दुर्गंध से रहित होंगे और काम करने के लिए बहुत कम उर्जा का इस्तेमाल करेंगे।
5 स्टार बिजली के उपकरणों से लैस होंगे सभी अस्पताल
सभी 7 नए अस्पतालों में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज के साथ इन-हाउस एसटीपी होंगे। सभी अस्पताल 5 स्टार बिजली के उपकरणों से लैस होंगे। इन अस्पतालों में मरीजों के बेड से जुड़े कैमरे की भी व्यवस्था होगी।












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