सीएसयू के संस्कृत सप्ताह के कवि सपर्या कार्यक्रम को जाने माने रचनाकार आचार्य महेश शर्मा ने सुशोभित किया

केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली के सारस्वत सभागार में कुलपति प्रो श्रीनिवास वरखेड़ी की अध्यक्षता में कवि सपर्या कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें जाने माने रचनाकार आचार्य महेशचन्द्र शर्मा आमन्त्रित अतिथि उपस्थित रहें। इस कार्यक्रम का प्रारम्भ दीप प्रज्ज्वलन तथा वैदिक मन्त्रों के उच्चारण के साथ हुआ । इसके बाद कुलगीत का सामूहिक गान भी हुआ।

कार्यक्रम के अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो वरखेड़ी ने कवि शर्मा के कवि कर्म की प्रशंसा करते हुए कहा कि पंजाब प्रान्त में संस्कृत के अनेक गुरुकुलों की समृद्ध परम्परा रही है और वहां संस्कृत के अनेक उद्भट विद्वान भी हुए हैं। लेकिन इस भू-भाग अनेक बार विदेशी आक्रमणों होने के कारण बहुत सारे परिवर्तन हुए। अत: यह बहुत ही आवश्यक ऐसे क्षेत्रों को इस गरिमा से पुनः स्फूर्तिवान बनाया जाए।

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कवि सपर्या के मुख्य अतिथि कवि - उपन्यासकार आचार्य महेश चन्द्र शर्मा ने अपनी रचना यात्रा की चर्चा करते अपनी उन उन रचनाओं के कथानक तथा बिम्बों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने अपनी रचना नीरजा नामक उपन्यास में बेटियों के प्रति समाज में होने वाले भेदभाव का भी उल्लेख करते हुए एक बेटी के संघर्ष को स्पष्ट किया और वैशाली नामक उपन्यास में वर्तमान समय के अनुसार दाम्पत्य जीवन की सरोकारों के अंकन की चर्चा की ।

उन्होंने यह भी कहा कि उनकी रचनाओं में युवा तथा कृषि समस्याओं को भी विशेष ढंग से उठाया गया है । साथ ही साथ यह भी कहा कि आज के युवा वर्ग के बीच संस्कृत को पहुंचाना बहुत ही आवश्यक है ,ताकि भारतीय संस्कृति पर पाश्चात्य प्रभाव को कम किया जा सके । प्रो. मदनमोहन झा, अधिष्ठाता शैक्षणिक ने अतिथि के स्वागत करते हुए उनकी रचनाओं का उल्लेख भी किया और उनके वैशिष्ट्य पर प्रकाश डाला।

साथ ही साथ प्रो झा ने यह भी कहा कि यह कुलपति प्रो वरखेड़ी जी की सुक्ष्म तथा नीर क्षीर विवेक शक्ति और कवि सहृदयता का ही सत्परिणाम है कि आज आचार्य शर्मा जी जैसे पंजाब के दुर्लभ रचनाकार के विषय में सुनने तथा समझने का अवसर मिला है। कवि शर्मा ने मूकं निमन्त्रणम् (काव्य संग्रह), अरुणा (उपन्यास), वैशाली (उपन्यास), सुनयना (उपन्यास), नीरजा (उपन्यास), महार्हं रत्नमम्बेदकरः (जीवन वृत्त) तथा सुप्रभातं प्रतीक्ष्यते (उपन्यास) जैसी महत्त्वपूर्ण रचना लिखी है। कार्यक्रम का संचालन डा पवन व्यास तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रो सुज्ञान कुमार मोहन्ती ने किया।

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डॉ देवानन्द शुक्ल ,उप निदेशक शैक्षणिक तथा डा यशवन्त त्रिवेदी ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सक्रिय योगदान दिया। तकनीकि सहायक के रूप में राहुल कश्यप, सूरज और निखिल द्वार ने सहयोग दिया। आज के कार्यक्रम की एक और बहुत बड़ी विशेषता यह भी रही कि कुलपति प्रो श्रीनिवास वरखेड़ी के एक विशेष आयोजन में सीएसयू,मुख्यालय में कार्यरत सभी महिलाओं को सम्मानित कर मिष्ठान वितरण भी किया गया । इस विशेष आयोजन का एक बहुत बड़ा कारण यह भी था कि रक्षा बंधन के दिन ही यह विश्व संस्कृत दिवस भी मनाया जाता है ।

आज के इस संस्कृत सप्ताह महोत्सव की की एक और विशेषता यह थी कि प्रजापिता ब्रह्म कुमारीज़ ईश्वरीय विश्वविद्यालय के हरि नगर, नई दिल्ली सेंटर से पधारी बहनों ने माननीय कुलपति महोदय को रक्षा सूत्र बांधते हुए रक्षाबंधन तथा संस्कृत सप्ताह की अशेष बधाईयां तथा शुभकामनाएं भी दी।

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