छत्तीसगढ़ः कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष ने राज्य में खाद की कमी के लिए मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराया
रायपुर। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने छत्तीसगढ़ के खाद संकट के लिए मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि मोदी सरकार किसानों, केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ के किसानों के साथ लगातार भेदभाव कर रही है। खरीफ सीजन 2021 के लिए छत्तीसगढ़ राज्य को 11 लाख 75 हजार मीट्रिक टन रासायनिक उर्वरक की जरूरत है। केंद्र सरकार से उक्त मात्रा में रासायनिक की आपूर्ति की डिमांड छत्तीसगढ़ की ओर से की गई थी, परंतु 13 जुलाई 2021 की स्थिति में केन्द्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य को मात्र छह लाख एक हजार मीट्रिक टन रासायनिक खाद दी गई है, जो कि हमारी मांग का मात्र 51 प्रतिशत है।

खरीफ 2021 सीजन के लिए केंद्र सरकार को 11.75 लाख मीट्रिक टन रासायनिक उर्वरकों की आपूर्ति की डिमांड भेजी गई थी, जिसमें यूरिया की मात्रा 5.50 लाख टन, डीएपी 3.20 लाख टन, एनपीके 80 हजार मीट्रिक टन, एमओपी 75 हजार मीट्रिक टन, सिंगल सुपरफॉस्फेट 1.50 लाख मीट्रिक टन शामिल है। 13 जुलाई 2021 की स्थिति में छत्तीसगढ़ राज्य को 5.50 लाख टन यूरिया की मांग के विरूद्ध 2.67 लाख मीट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति की गई है, जो मात्र 49 प्रतिशत है।
इसी तरह डीएपी खाद की 3.20 लाख मीट्रिक टन मांग के विरूद्ध अब तक 1.55 लाख टन खाद प्रदाय की गई है, जो कि मांग का मात्र 48 प्रतिशत है। एनपीके उर्वरक की 80 हजार मीट्रिक टन की मांग के बदले अब तक छत्तीसगढ़ राज्य को मात्र 52 हजार मीट्रिक टन उर्वरक की आपूर्ति हुई है, जो कि मांग का मात्र 65 प्रतिशत है। छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा एमओपी उर्वरक 75 हजार मेट्रिक टन की मांग के विरूद्ध अब तक 74 हजार मीट्रिक टन की आपूर्ति की गई है, जो कि मांग का 73 प्रतिशत सिंगल सुपर फॉस्फेट उर्वरक की छत्तीसगढ़ राज्य को 1.50 लाख मीट्रिक टन की जरूरत है।
13 जुलाई 2021 की स्थिति में मात्र 72 हजार मीट्रिक टन उर्वरक प्राप्त हुई है, जो मांग का मात्र 48 प्रतिशत है। इस प्रकार देखा जाए तो छत्तीसगढ़ राज्य को 13 जुलाई की स्थिति में मात्र छह लाख एक हजार टन सभी प्रकार के रासायनिक उर्वरकों की आपूर्ति हुई है, जो कि हमारी कुल मांग का मात्र 51 प्रतिशत है। रासायनिक उर्वरकों की आपूर्ति में कमी के चलते राज्य में खाद का संकट बना हुआ है। इस साल खरीफ सीजन के लिए राज्य को अब तक प्राप्त रासायनिक उर्वरकों की मात्रा बीते छह सालों में मिले रासायनिक उर्वरकों की मात्रा की तुलना में लगभग आधी है।












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