दिल्ली को 976 ​मीट्रिक टन ऑक्सीजन के लिए 187 क्रायोजेनिक टैंकर दिलवाए केंद्र सरकार: राघव चड्ढा

नई दिल्ली। दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष और विधायक राघव चड्ढा ने ऑक्सीजन बुलेटिन जारी करते हुए कहा कि देश में 1631 टैंकर 8500 मीट्रिक टन ऑक्सीजन उठा रहे हैं। इस हिसाब से दिल्ली को 976 मीट्रिक टन ऑक्सीजन के लिए केंद्र सरकार 187 क्रायोजेनिक टैंकर मुहैया कराए। भारत में क्रायोजेनिक टैंकरों की कोई कमी नहीं है। देश में 1631 क्रायोजेनिक टैंकर हैं और 8500 मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन हो रहा है। क्रायोजेनिक टैंकरों की संख्या ऑक्सीजन उत्पादन से 3 गुना ज्यादा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जिस प्रकार से ऑक्सीजन का नियंत्रण और वितरण कर रही है उसी हिसाब से देशभऱ में क्रायोजेनिक टैंकर का नियंत्रण और वितरण करना चाहिए।

Central govt provides 187 cryogenic tankers for 976 mt of oxygen to Delhi: says AAP Raghav Chadha

केंद्र सरकार ने अक्सीजन का आवंटन कर दिया और टैंकरों का आवंटन नहीं किया तो ऑक्सीजन नहीं आ पाएगी। क्रायोजेनिक टैंकरों के बिना राज्यों तक ऑक्सीजन कैसे आएगी और बांटी जाएगी? केंद्र सरकार से मांग है कि जिस हिसाब से ऑक्सीजन का आवंटन किया है उसी तरीके से हर राज्य में क्रायोजेनिक टैंकर का आवंटन भी किया जाए। हाईकोर्ट की फटकार के बाद केंद्र सरकार ने दिल्ली को अभी तक सबसे ज्यादा कल 555 मिट्रिक टन ऑक्सीजन दी है जबकि हमारी जरूरत 976 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की है।

केंद्र सरकार ने दिल्ली को आवंटित निर्धारित ऑक्सीजन प्लांटों से 555 मीट्रिक टन ऑक्सीजन नहीं दी है, बल्कि जुगाड़ के जरिए दूसरे राज्यों की ऑक्सीजन पहुंचायी है। हम चाहते हैं केंद्र सरकार अस्थायी तरीकों के बजाए दिल्ली को आवंटित प्लांटों से स्थायी तौर पर अधिक ऑक्सीजन मुहैया कराए। उन्होंने कहा कि केजरीवाल सरकार ने एसओएस कॉल से मिलने वाली दिक्कतों को दूर करने के लिए वरिष्ठ और योग्य आईएएस अधिकारियों की टीम बनायी है। यह टीम दिन-रात एसओएस कॉल से जुड़ी दिक्कतों को दूर कर रही है। दिल्ली सरकार ने एसओएस कॉल के जरिए 48 अस्पातलों में ऑक्सीजन पहुंचाई है। ऑक्सीजन के सहारे इलाज करा रहे 4036 लोगों की जान बचाने का काम किया है।

आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता और विधायक राघव चड्ढा ने बुधवार को ऑक्सीजन बुलेटिन जारी किया। राघव चड्ढा ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट ने एक बार फिर केंद्र सरकार को लताड़ा है। केंद्र सरकार की तुलना शतुरमूर्ग से की है कि आप रेत में सिर घुसा कर बैठे हुए हैं जबकि आपके आसपास मौत का तांडव हो रहा है और लोगों की जाने जा रही हैं। ऑक्सीजन नहीं है लेकिन आप इसकी और नहीं देख रहे हैं। केंद्र सरकार को डांटते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि हर हालत में आपको दिल्ली की ऑक्सीजन जरूरत को पूरा करना होगा।

केंद्र सरकार ने फटकार के बाद दिल्ली को अभी तक की सबसे ज्यादा ऑक्सीजन कल मिली है। दिल्ली को कल 555 मिट्रिक टन ऑक्सीजन मिली है जबकि हमारी जरूरत 976 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की है। दिल्ली की जरूरत के मुकाबले कुल 57 फीसदी ऑक्सीजन मिली है। पिछले 15 दिनों में दिल्ली को मिल रही ऑक्सीजन से तुलना करें तो हाईकोर्ट की फटकार के बाद सबसे ज्यादा ऑक्सीजन कल मिली है। उन्होंने कहा कि ऐसा ना हो कि हाईकोर्ट की फटकार के बाद ही दिल्ली को ज्यादा ऑक्सीजन मिले बल्कि स्थायी तौर पर दिल्ली की जरुरत के मुताबिक ऑक्सीजन दी जाए।

राघव चड्ढा ने कहा कि ऑक्सीजन जो कल मुहैया करायी गई है वह निर्धारित स्रोतों से नहीं कराई गई है। दिल्ली को अतिरिक्त इंतजाम कर यह ऑक्सीजन मुहैया कराई गई है। जहां से हमें ऑक्सीजन का आवंटन किया गया जैसे कलिंगानगर, दुर्गापुर काशीपुर सहित अन्य जगहों से ऑक्सीजन नहीं आयी है बल्कि केंद्र सरकार ने आनन-फानन में किसी और राज्य की ऑक्सीजन दिल्ली पहुंचा दी है।

ऐसे में हमें अभी भी निर्धारित स्रोत से पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल रही है। केंद्र सरकार से हमारी प्रार्थना है कि आने वाले समय में जिन-जिन प्लांटों से हमें ऑक्सीजन का आवंटन किया गया है उन प्लांटों से हमें ऑक्सीजन पहुंचायी जाए। ऐसा ना हो कि हाईकोर्ट जब-जब केंद्र सरकार को डांट लगाएं केवल उसी दिन हमें ऑक्सीजन मिले। यह एक प्रक्रिया बन जाए जिससे बिना डांट के भी दिल्ली को सुनिश्चित प्लांटों से ऑक्सीजन दिल्ली को मिले।

राघव चड्ढा ने कहा कि दिल्ली सरकार के वार रूम में कल 48 एसओएस कॉल कई अस्पतालों से आयी। इनमें कहीं पर ऑक्सीजन खत्म हो रही थी, कहीं पर सिलेंडर नहीं पहुंचे थे और कहीं पर 1 घंटे की ऑक्सीजन बची थी। दिल्ली सरकार की हेल्पलाइन पर आयी 48 एसओएस कॉल से जुड़ी सभी दिक्कतों को दूर किया। हमने कल लगभग 36.40 मीट्रिक टन ऑक्सीजन एसओएस कॉल से जुड़ी दिक्कतों को दूर करने के लिए इस्तेमाल की है। आपातकाल ऑक्सीजन स्टॉक से लगभग 48 अस्पतालों को एसओस कॉल पर ऑक्सीजन की आपूर्ति की गई। दिल्ली में हमने कई जोन में रिस्पांस पॉइंट बनाए हुए हैं। जब भी किसी अस्पताल से कोई इमरजेंसी आती है तो मायापुरी और राजघाट रिस्पांस पाइंट से हम रिजर्व ऑक्सीजन स्टॉक भेजते हैं। वहीं, जिन-जिन अस्पतालों से एसओएस कॉल आयीं उनमें कुल 4036 ऑक्सीजन बेड हैं।

यानी कि जिन अस्पतालों में ऑक्सीजन खत्म हो रही थी वहां पर 4036 मरीज ऑक्सीजन के सहारे अपना इलाज करा रहे थे। ऐसे में केजरीवाल सरकार ने पर्याप्त ऑक्सीजन पहुंचाकर लगभग 4036 लोगों की जान बचाने का काम किया है। हमने एसओएस कॉल को दूर करने के लिए एक टीम भी बनाई है। दिल्ली सरकार के वरिष्ठ और योग्य आईएएस अधिकारियों की टीम लगातार दिन-रात एसओएस कॉल से जुड़ी दिक्कत को दूर करती है। ऑक्सीजन का वितरण कराने का पूरी जद्दोजहद करती। अधिकारी 24 में से 23 घंटे काम कर रहे हैं। एक बहुत ही योग्य टीम केजरीवाल सरकार ने बनाई है। ऑक्सीजन वार रूम को आईएएस अधिकारी चला रहे हैं।

राघव चड्ढा ने कहा कि क्रायोजेनिक टैंकर से जुड़ा हुआ महत्वपूर्ण विषय है। लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन को एक विशेष क्रायोजेनिक टैंकर में लाया जाता है। इस समय हिंदुस्तान में 1631 क्रायोजेनिक टैंकर हैं। यह जानकारी खुद केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दर्ज करके दी है। देश में 8500 मीट्रिक टन लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन होता है। यानी कि 1631 क्रायोजेनिक टैंकर 8500 हजार मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन को ला रहे हैं। टैंकरों की संख्या हमारे देश की ऑक्सीजन जरूरत से 3 गुना ज्यादा है। 1631 टैंकर कुल 23 हजार मैट्रिक टन ऑक्सीजन को भी कहीं पर ले जा सकते हैं। जबकि आज इनका उपयोग मात्र 8500 मीट्रिक टन लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन को लाने ले जाने में किया जा रहा है। यानी कि हमारे पास हमारे देश में क्रायोजेनिक टैंकर की कोई कमी नहीं है।

इस आपातकाल में क्रायोजेनिक टैंकर राष्ट्रीय संपति हैं। इन क्रायोजेनिक टैंकरों पर वर्तमान में राज्य सरकारों ने कब्जा किया हुआ है। इन क्रायोजेनिक टैंकरों का ठीक से वितरण नहीं हो पा रहा है। हमारा मानना है कि जिस प्रकार से केंद्र सरकार इस समय ऑक्सीजन का नियंत्रण कर रही है और वितरण कर रही है, उसी हिसाब से देशभऱ में क्रायोजेनिक टैंकर का नियंत्रण और वितरण जरूरत के अनुसार करना चाहिए। हमारी विनती है कि केंद्र सरकार इन 1631 क्रायोजेनिक टैंकरों का नियंत्रण और वितरण उसी हिसाब से करे जिस हिसाब से राज्यों को ऑक्सीजन का वितरण किया है।

अक्सीजन का आवंटन कर दिया और टैंकरों का आवंटन नहीं किया तो ऑक्सीजन नहीं आ पाएगी। क्रायोजेनिक टैंकरों के बिना राज्यों तक ऑक्सीजन आएगी और बांटी कैसे जाएगी। अगर टैंकर नहीं मिले और ऑक्सीजन मिल गई तो उसका क्या फायदा होगा। केंद्र सरकार ने जिस हिसाब से ऑक्सीजन का वितरण किया है उसी हिसाब से ऑक्सीजन का वितरण भी होना चाहिए।

राघऴ चड्ढा ने कहा कि दिल्ली को 976 मीट्रिक टन ऑक्सीजन पर 187 क्रायोजेनिक टैंकर की जरुरत पड़ेगी। 1631 टैंकर 8500 मीट्रिक टन ऑक्सीजन उठा रहे हैं तो 976 मीट्रिक टन उठाने के लिए 187 टैंकर चाहिए होते हैं। केंद्र सरकार से हम मांग करते हैं कि दिल्ली को 187 क्रायोजेनिक टैंकर मुहैया कराए जाएं। इसके साथ-साथ दिल्ली एक उद्योगिक राज्य नहीं है, यह दिल्ली हाईकोर्ट ने भी माना है। दिल्ली हाईकोर्ट ने कुछ दिन पहले कहा कि क्योंकि दिल्ली एक औद्योगिक राज्य नहीं है।

दिल्ली के अंदर कोई स्टील प्लांट और कोई ऑक्सीजन के प्लांट नहीं हैं। इसलिए दिल्ली के अंदर ऑक्सीजन का उत्पादन नहीं होता है। जिसकी वजह से दिल्ली की सड़कों पर क्रायोजेनिक टैंकर नहीं दौड़ते हैं। ऑक्सीजन मुहैया कराना और यह टैंकर मुहैया कराना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है। इसलिए हम केंद्र सरकार से मांग करते हैं कि जिस हिसाब से ऑक्सीजन का आवंटन किया है उसी तरीके से क्रायोजेनिक टैंकर का आवंटन भी हर राज्य में किया जाए। भारत सरकार इन 1631 टैंकरों को राष्ट्रीय संपत्ति मानकर पूरा नियंत्रण और वितरण करे।

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