Rahul Gandhi: जेल जाने में है राहुल गांधी को फायदा
राहुल गांधी यदि कुछ समय के लिए जेल जाते हैं, तो उन्हीं के लिए मुनाफे का सौदा हो सकता है। इस रणनीति से वह प्रधानमंत्री पद पर दावेदारी कर रहे क्षेत्रीय दलों के नेताओं पर भारी पड़ जाएंगे।

Rahul Gandhi: राहुल गांधी की सजा पर अगर 19 मई तक स्टे नहीं मिला, तो उन्हें जेल जाना पड़ेगा, जहां उनको वीआईपी ट्रीटमेंट तो मिलेगा ही, क्योंकि वह सांसद रहे हैं| वैसे कहा जाता है जब तक कोई नेता जेल नहीं जाता, तब तक उसकी नेतागिरी में निखार नहीं आता| जेल जाना राहुल के लिए फायदेमंद होगा| मीडिया के एक वर्ग ने तो लिखना और बोलना शुरू भी कर दिया है कि राहुल गांधी को सजा होने और उनके घर को खाली करवाने के बाद उनकी लोकप्रियता में जबर्दस्त उछाल आया है| अगर ऐसा है, तो जेल जाने पर तो उनकी लोकप्रियता में और भी उछाल आएगा|

फिलहाल यह मामला गुजरात हाईकोर्ट में है| एक्टिंग चीफ जस्टिस ने 25 अप्रेल को याचिका दाखिल होते ही राहुल गांधी का केस जस्टिस गीता गोपी के पास भेजा था, क्योंकि आपराधिक मामलों की रिवीजन पिटीशन उन्हीं के पास भेजी जाती हैं| अगले दिन बुधवार को उन्होंने सुनवाई शुरू भी की, लेकिन थोड़ी देर ही बाद खुद को केस से अलग करते हुए कहा कि वह यह केस नहीं सुनेंगी, किसी और जज के पास जाईए| अब नया जज सुनवाई करेगा|
सवाल यह है कि गीता गोपी ने राहुल गांधी का केस सुनने से इंकार क्यों किया| आमतौर जज बता दिया करता है कि वह उस केस को सुनने से इंकार क्यों कर रहा है| कई बार होता यह है कि अगर कोई जज किसी रूप में याचिकाकर्ता या दूसरे पक्ष से कभी जुड़ा रहा हो, तो वह अपने आपको केस की सुवाई से अलग कर लेता है| लेकिन जस्टिस गीता गोपी ने कोई कारण नहीं बताया| सवाल यह है कि क्या जिस जज को केस भेजा जाएगा, वह सुनवाई करेगा?
अतीक अहमद का किस्सा याद आता है, 2012 में वह जेल में बंद था| विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए उसने इलाहाबाद हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की थी। तब एक एक कर दस जजों ने उसकी याचिका की सुनवाई करने से इनकार कर दिया था| सभी जजों ने याचिका नहीं सुनने का कारण व्यक्तिगत बताया था|
दूसरा किस्सा सुप्रीमकोर्ट का याद आता है| एक अपराधी सोहराबुद्दीन शेख और उसकी पत्नी कौसर बी की गुजरात में मुठभेड़ में मौत हो गई थी| यह बात 2005 की है, गुजरात दंगों के बाद से एक लॉबी लगातार मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बना रही थी| उसके बाद इस मुठभेड़ को फर्जी बताने वाले सोहराबुद्दीन शेख के मित्र प्रजापति की भी मुठभेड़ में मौत हो गई। वह सोहराबुद्दीन शेख की मुठभेड़ में मौत का गवाह भी था|
तथाकथित सेक्युलर लिबरल गैंग ने दोनों मुठभेड़ों को फर्जी बताया और गुजरात के तत्कालीन गृहमंत्री अमित शाह पर फर्जी मुठभेड़ करवाने का आरोप लगाया| सुप्रीमकोर्ट ने फर्जी मुठभेड़ केस की सुनवाई गुजरात से बाहर मुम्बई में ट्रांसफर कर दी थी| जस्टिस लोया इस केस की सुनवाई कर रहे थे कि दिसंबर 2014 में उनकी अचानक मृत्यु हो गई| सेक्युलर गैंग ने जस्टिस लोया को भी मरवा देने का आरोप लगाया, जिस पर कांग्रेस के एक नेता तहसीन पूनावाला ने सुप्रीमकोर्ट में जांच करवाने का केस दर्ज किया था|
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने जस्टिस अरुण मिश्रा को केस की सुनवाई सौंपी थी| इसके खिलाफ सुप्रीमकोर्ट के चार जजों जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस जोसेफ और जस्टिस लोकुर ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ बगावत करते हुए एक प्रेस कांफ्रेंस कर डाली| देश के न्यायिक इतिहास में यह पहली बार हुआ था कि जजों ने कोई प्रेस कांफ्रेंस की हो, और वह भी देश के चीफ जस्टिस के खिलाफ| कांग्रेस और कम्युनिस्ट नेताओं ने इन चारों जजों के समर्थन में आवाज उठाई| तब जस्टिस अरुण मिश्रा ने खुद ही केस की सुनवाई करने से इंकार कर दिया था|
यह घटना मैंने इसलिए बताई है, क्योंकि राहुल गांधी को मानहानि के केस में अपराधी ठहराए जाने के फैसले को भी राजनीतिक बताया जा रहा है| निशाना नरेंद्र मोदी और अमित शाह को बनाया जा रहा है| कांग्रेस ने खुल कर उस जज पर आरोप लगाए हैं, जिसने राहुल गांधी को दो साल की सजा सुनाई है| यहाँ तक कि सैशन कोर्ट के जज पर भी आरोप लगाया गया कि वह कभी अमित शाह का वकील रहा था|
क्या जज राहुल गांधी के केस को किसी डर के मारे नहीं सुनना चाहते| आखिर जस्टिस गोपी ने केस सुनने से क्यों इंकार किया| क्या 19 मई तक राहुल गांधी का कन्विक्शन रूक जाएगा| या राहुल गांधी जेल जाएंगे? क्या कांग्रेस की रणनीति राहुल गांधी को जेल भेज कर केस को खींचते हुए सुप्रीमकोर्ट तक ले जाने की है, ताकि उनके जेल जाने से देश भर में उनके पक्ष में वैसा ही समर्थन हासिल हो, जैसा भारत जोड़ो यात्रा के समय हुआ था|
जेल जाने से लोकप्रियता में उछाल की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं| इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगा कर जिन नेताओं को जेल में डाला था, उनमें से अनेक बाद में केंद्र और राज्यों में मंत्री बने| मोरारजी देसाई, चरण सिंह, चन्द्रशेखर, देवेगौडा और अटल बिहारी वाजपेयी तो बाद में प्रधानमंत्री भी बने| बीजू पटनायक, मुलायम सिंह, कल्याण सिंह, राजनाथ सिंह, चौधरी देवी लाल, कर्पूरी ठाकुर, रामनरेश यादव, लालू यादव, भैरो सिंह शेखावत, प्रकाश सिंह बादल, सुरजीत सिंह बरनाला, शांता कुमार सब जेल यात्राओं के बाद अपने अपने राज्य के मुख्यमंत्री बने|
यहाँ तक कि चौधरी चरण सिंह ने जब 3 अक्टूबर 1977 को इंदिरा गांधी को जीप घोटाले में गिरफ्तार करवाया था, तो एक रात की गिरफ्तारी से ही उनकी लोकप्रियता पटरी पर लौट आई थी| इंदिरा गांधी भारी मतों से चिकमंगलूर से उपचुनाव जीत कर लोकसभा में लौट आई| इसीलिए इंदिरा गांधी की गिरफ्तारी को बाद में जनता पार्टी सरकार का " आपरेशन ब्लंडर" कहा गया था|
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इसके बाद जब संसद के विशेषाधिकार हनन के मामले में लोकसभा ने प्रस्ताव पास कर के उन्हें 19 दिसंबर 1978 को एक हफ्ते के लिए जेल भेजा था, तो उनकी इस जेल यात्रा ने तो 1980 में उन्हें सत्ता में ही वापस ला दिया था| तो राहुल गांधी अगर कुछ दिन के लिए जेल जाते हैं, तो उन्हीं के लिए मुनाफे का सौदा हो सकता है| इस रणनीति से वह प्रधानमंत्री पद पर दावेदारी कर रहे क्षेत्रीय दलों के नेताओं पर भारी पड़ जाएंगे|
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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