Modi in Lakshadweep: क्या है मोदी का लक्षद्वीप एजेंडा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 3 जनवरी को लक्षद्वीप गए थे।उन्होंने वहां सरकारी कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।कई परियोजनाओं का उद्घाटन किया, कई परियोजनाओं के वायदे किए। उनके कार्यक्रमों का कई टीवी चैनलों ने सीधा प्रसारण किया।लोग हैरान थे कि क्या मोदी 95 प्रतिशत मुस्लिम आबादी और सिर्फ 55 हजार वोटरों वाली लक्षद्वीप लोकसभा सीट का लक्ष्य साध कर लक्षद्वीप गए थे।
अगले दिन दोपहर बाद नरेंद्र मोदी ने एक्स पर अपनी कुछ तस्वीरें और वीडियो शेयर किये।इन तस्वीरों की पहले दिन किसी को भनक तक नहीं थी।तस्वीरें लोड होते ही सोशल मीडिया पर लक्षद्वीप ट्रेंड करने लगा।सिर्फ भारत नहीं, लक्षद्वीप दुनिया भर में ट्रेंड करने लगा।

तस्वीरों और वीडियो की शूटिंग समुद्र किनारे की गई थी। यह वैसे ही एक विज्ञापन जैसी वीडियो है, जैसी वीडियो उन्होंने गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए कच्छ की बनवाई थी।फर्क सिर्फ यह था कि वीडियो में अमिताभ बच्चन की जगह नरेंद्र मोदी मॉडल थे।आप को वह डायलॉग जरुर याद आया होगा, "कुछ दिन तो गुजारो गुजरात में"।
अमिताभ बच्चन गुजरात टूरिज्म के ब्रांड एम्बेसडर बनाए गए थे।तो नरेंद्र मोदी लक्षद्वीप के ब्रांड एम्बेसडर के रूप में दिखाई दिए।और वह सच में कहते दिखाई दे रहे हैं कि कुछ दिन तो गुजारो लक्षद्वीप में।बाकी सब तो प्रधानमंत्री के नाते मोदी के प्रोग्राम थे, वह असल में मॉडलिंग करने ही लक्षद्वीप गए थे।

अगर मोदी की जगह अमिताभ बच्चन या कोई अन्य हीरो या हीरोईन मॉडल होती, तो यह विज्ञापन भारत तक ही सीमित हो कर रह जाता।मोदी का लक्ष्य पूरा नहीं होता।इस मॉडलिंग के पीछे छिपा है एक बड़ा लक्ष्य, जिसे राजनीतिक दिमाग वाले लोग सोच भी नहीं सकते।बल्कि एक नहीं, दो दो लक्ष्य हैं।पहला लक्ष्य मालदीव के मुकाबले का टूरिस्ट स्पॉट लक्षद्वीप को बताना है, और दूसरा लक्ष्य चीन की तरफ से बढ़ते खतरे को रोकना है।
2013 में भारत ने दो हेलीकाप्टर और 2020 में एक सैन्य विमान मालदीव को उपहार में दिए थे।हेलीकाप्टरों और विमानों का इस्तेमाल मालदीव के अलग अलग द्वीपों के बीमारों और घायलों को एयर लिफ्ट करने के लिए किया जाता था।विमान और हेलीकाप्टरों का संचालन करने के लिए 75 भारतीय सैनिक भी मालदीव में तैनात थे।इस बीच प्रधानमंत्री मोदी की मालदीव यात्रा के दौरान भारतीय नौसेना को मालदीव के जलक्षेत्र में हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण की इजाजत मिली थी।सामरिक दृष्टि से यह समझौता भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण था|
2022 में राष्ट्रपति पद के चीन समर्थक उम्मीदवार मोहम्मद मोइज्जू ने अपने चुनाव अभियान के दौरान भारत के खिलाफ जम कर प्रचार किया।उन्होंने कहा अगर वह जीत गए, तो भारतीय सैनिकों को वापस भारत भेजा जाएगा।वह चुनाव जीत गए, और राष्ट्रपति पद की शपथ लेने से पहले ही उन्होंने भारत से अपने 75 सैनिक वापस बुलाने की मांग की।जिसके लिए भारत को तैयार होना पड़ा।
इतना ही नहीं, उन्होंने भारत के साथ हुआ हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण का समझौता भी रद्द कर दिया।ऐसा लगता है कि मालदीव अब यह समझौता चीन के साथ करना चाहता है।चीन अगर मालदीव को अपना नया अड्डा बना लेता है, तो भारत के लिए खतरे की घंटी होगा।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आने वाले खतरे को तभी भांप लिया था, जब चीन समर्थक मोहम्मद मोईज्जू मालदीव के राष्ट्रपति चुने गए थे|
मालदीव के समुद्री तट अपनी सुंदरता के लिए पूरी दुनिया में मशहूर हैं।वहां समुद्र के नीचे बने होटल, पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं।पर्यटन ही मालदीव की कमाई का प्रमुख स्रोत है।करीब डेढ़ लाख भारतीय हर साल मालदीव जाते हैं।मालदीव 36 टापूओं वाले भारत के केंद्र शासित लक्षद्वीप से सिर्फ 700 किलोमीटर दूर है।लक्षद्वीप के समुद्री तट भी मालदीव जितने ही खूबसूरत हैं, लेकिन पर्यटन की कोई सुविधा नहीं थी।न यातायात का साधन, न इंटरनेट कनेक्टीविटी।सीमान्त क्षेत्र होने के कारण कई तरह के यात्रा प्रतिबन्ध भी लगे हुए हैं।अब प्रधानमंत्री मोदी ने दो लक्ष्य सामने रख कर लक्षद्वीप को बढ़ावा देने की कमान संभाल ली है।
पहला लक्ष्य तो भारतीय पर्यटकों को लक्षद्वीप की ओर मोड़कर चीन की गोदी में जा कर बैठे मालदीव को झटका देना है।कनेक्टीविटी बढाने का काम शुरू हो चुका है, समुद्र के नीचे होटल भी बन रहा है और अपनी इसी यात्रा के दौरान सौ गुना ज्यादा स्पीड वाली इंटरनेट सेवा का उद्घाटन भी हो गया है। दूसरा लक्ष्य आने वाले चीन के खतरे को भांपते हुए लक्षद्वीप को सैन्य दृष्टि से मजबूत करना है।
भारत की घेराबंदी के लिए चीन पिछले कुछ सालों से हिन्द महासागर पर अपना दबदबा बनाने की कोशिश कर रहा है।वह भारत के सभी पडौसी देशों के पोर्ट्स के डवलपमेंट में इन्वेस्ट कर रहा है।इन देशों में वह अपने मिलिट्री बेस भी बना रहा है।अगर हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण का कांट्रेक्ट लेकर चीन मालदीव में अपना सैन्य अड्डा स्थापित कर लेता है, तो समुद्र के रास्ते भी वह भारत से सिर्फ 700 किलोमीटर दूर होगा।
वैसे 2008 में जब पाकिस्तानी आतंकवादियों ने अरब सागर के रास्ते भारत में घुसकर मुम्बई पर हमला किया था, तब यह बात ध्यान में आ गई थी कि हमारी समुद्री सीमाएं सुरक्षित नहीं है।सिर्फ 32 किलोमीटर क्षेत्रफल वाले लक्षद्वीप में 36 टापू हैं, सिर्फ 70 हजार की आबादी है, जिनमें 95 प्रतिशत मुस्लिम हैं।चीन मालदीव को अड्डा बनाकर बहुत आसानी से लक्षद्वीप पर कब्जा कर सकता है।60 साल तक समुद्री सीमा के इन टापूओं की सुरक्षा के बारे में कुछ सोचा ही नहीं गया।2008 के आतंकी हमले से सबक लेकर 2010 में पहली बार वहां कोस्ट गार्ड स्टेशन बनाया गया, 2012 में नेवी बेस बनाया गया।
नरेंद्र मोदी वहां पहली बार 2017 में गए थे, तब से लक्षद्वीप उनकी प्राथमिकताओं में शामिल हो गया था। 2020 में स्थानीय नेतृत्व की सारी आपत्तियों को खारिज करते हुए उन्होंने अपने विश्वासपात्र गुजरात के पूर्व मंत्री प्रफुल्ल खोड़ा पटेल को लक्षद्वीप का प्रशासक नियुक्त किया।उनकी नियुक्ति का स्थानीय स्तर पर काफी विरोश हुआ, लेकिन केंद्र सरकार ने कोई परवाह नहीं की।
2020 में मोदी सरकार ने लक्षद्वीप में एयर स्ट्रीप बनाने का फैसला किया , फिलहाल ढाई किलोमीटर लंबी एयर स्ट्रीप का निर्माण हो रहा है।अगर चीन मालदीव के कोस्टल रीजन का इस्तेमाल कर के कुछ बड़ा करने की कोशिश करेगा, तो लक्षद्वीप से भारतीय सेना उसे रोक सकती है और करारा जवाब भी दे सकती है।मोदी 3 जनवरी को उसकी प्रगति की समीक्षा करने भी गए थे।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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