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UP BJP Politics: प्रयागराज में सतह पर आया केशव और नंदी का शीतयुद्ध

उत्तर प्रदेश में निकाय चुनावों के बीच भाजपा के दो नेताओं केशव प्रसाद मौर्य और नंद गोपाल नंदी का शीतयुद्ध सतह पर आ गया है। नंदी खुलकर केशव मौर्य के खिलाफ हो गये हैं तो केशव मौर्य भीतरखाने नंदी का सफाया करने में जुटे हैं।

up nikay chunav 2023 cold war between Keshav Prasad Maurya and Nand Gopal Nandi in Prayagraj

UP BJP Politics: प्रयागराज में आजकल कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। उमेश हत्‍याकांड के बाद अतीक एवं अशरफ मर्डर के लिये चर्चा में रहे प्रयागराज में अब दो मंत्रियों के बीच कलह के कारण खबरें बन रही हैं। भाजपा सरकार के दो कद्दावर मंत्रियों के बीच लंबे समय से चल रहे शीतयुद्ध के सतह पर आ जाने से राजनीतिक माहौल गर्म है।

दरअसल, उत्‍तर प्रदेश के उपमुख्‍यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य तथा कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्‍ता नंदी की राजनीतिक विरासत प्रयागराज मंडल में ही है। भाजपा का प्रदेश अध्‍यक्ष बनने के बाद केशव प्रसाद मौर्य का कद बढ़ा तथा वह कौशांबी से निकलकर पूरे प्रयागराज जोन में अपनी सियासी जमीन मजबूत करने में जुट गये। 2017 में भाजपा के प्रचंड बहुमत से जीतने और उपमुख्‍यमंत्री बनने के बाद उन्‍होंने अपने स्‍वजातीय एवं पिछड़े नेताओं को सेट कराकर पूरे प्रयागराज जोन में खुद को मजबूत किया।

इधर, प्रयागराज में लंबे समय से प्रभावी नंदगोपाल गुप्‍ता नंदी भी बसपा, कांग्रेस का सफर करने के बाद विधानसभा चुनाव 2017 से पहले अमित शाह और सुनील बंसल के सहयोग से भाजपा में आ गये। नंदी ने इन दोनों नेताओं से अपनी नजदीकी बढ़ाई और दिल्‍ली दरबार के खास बन गये। 2017 में जब योगी आदित्‍यनाथ की सरकार बनी तो नंदी दिल्‍ली दरबार की नजदीकी के चलते कई पुराने दिग्‍गज भाजपाइयों को पछाड़ते हुए कैबिनेट मंत्री बन गये, जबकि उनकी पत्‍नी प्रयागराज की मेयर की सीट पर लगातार काबिज रहीं।

केशव और नंदी के बीच प्रयागराज जोन में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कयायद में शीतयुद्ध लगातार चल रहा था। अंदरखाने एक दूसरे को शह और मात देने की कोशिशें जारी थीं। भाजपा की पहली सरकार में केशव प्रसाद जब ऊपरी सहयोग मिलने के बाद योगी आदित्‍यनाथ के खिलाफ मोर्चा खोले थे और पूरा ध्‍यान लखनऊ पर लगा रखा था, तब नंदी प्रयागराज में अपनी सियासी ताकत बढ़ाने में जुटे हुए थे। पत्‍नी को मेयर का टिकट दिलवाया तो स्‍थानीय संगठन में भी अपने लोगों को सेट कराने में सफल रहे।

विधानसभा चुनाव 2022 में जब केशव प्रसाद मौर्य अपनी सीट हार गये, तब उन्‍हें अपनी जमीन खिसकने का अंदाजा हुआ। दिल्‍ली के सहयोग से दुबारा डिप्‍टी सीएम बने तो वह प्रयागराज जोन में अपनी जमीन मजबूत करने में जुट गये, जो नंदी को रास नहीं आ रहा था। इसी बीच, प्रयागराज में उमेश पाल हत्‍याकांड के बाद नंदी का नाम अतीक अहमद के साथ जुड़ा। अतीक की बहन ने प्रेस कांफ्रेंस करके कहा कि अतीक भाई ने कहा है कि नंदी उनका उधार लिया पांच करोड़ रुपये उन्‍हें वापस लौटा दें।

बस, इसी के बाद केशव प्रसाद को मौका मिल गया। नंदी से केशव की अदावत का एक कारण योगी आदित्यनाथ भी हैं। केशव और नंदी भले ही दिल्ली दरबार के आशीर्वाद से मलाई वाले पदों पर पहुंचे हों लेकिन केशव और योगी में खींचतान बढ़ी तो नंदी योगी कैम्प के करीब हो गये। ऐसा इसलिए किया क्योंकि वो जानते थे कि केशव मौर्य और योगी में भीतरी खींचतान चल रही है। हालांकि उन्होंने दिल्ली से अपने तार जोड़े रखा। ऐसा लगता है कि अब उनके पर करतने की कोशिशें जरूर शुरू हो गई हैं। माना जा रहा है कि दिल्‍ली ने हस्‍तक्षेप नहीं किया तो देर सबेर पार्टी में उन्‍हें हाशिये पर डाला जा सकता है।

अतीक-अशरफ कांड के बीच नंदी को पहला झटका तब लगा, जब निर्वतमान मेयर और उनकी पत्‍नी अभिलाषा गुप्‍ता का टिकट कट गया। पार्टी ने अभिलाषा की जगह केशव खेमे के उमेश चंद्र गणेश केसरवानी को टिकट दे दिया। नंदी खेमा इसके बाद से ही केशव खेमा से बुरी तरह नाराज है। मेयर चुनाव की तैयारी बैठक में भी नंदी और अभिलाषा नहीं पहुंचे। इसी बीच, नंदी को दूसरा झटका तब लगा, जब केशव प्रसाद मौर्य ने मेयर प्रत्‍याशी केसरवानी के केंद्रीय कार्यालय का उद्घाटन करने के दौरान सपा नेता रईस चंद्र शुक्‍ला को भाजपा में शामिल करा दिया। रईस चंद्र शुक्ला ने सपा प्रत्‍याशी के तौर पर शहर दक्षिणी से 2022 का विधानसभा चुनाव नंदी के खिलाफ ही लड़ा था।

इस ज्‍वाइनिंग के बाद तो दोनों नेताओं के बीच चल रहा शीतयुद्ध सतह पर आ गया। नंदी ने आरोप लगाया कि कुछ लोग पार्टी को प्राइवेट लिमिटेड की तरह चलाना चाहते हैं और अपनी जिद के चलते पार्टी का नुकसान कर रहे हैं। हालांकि उन्‍होंने सीधा कुछ नहीं कहा, लेकिन रईस चंद्र की ज्‍वाइनिंग केशव ने कराई, इसलिए माना गया कि उनका इशारा डिप्‍टी सीएम की तरफ है। उन्‍होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके खिलाफ चुनाव लड़ने वाले नेता को शामिल करने से पहले उनसे चर्चा नहीं की गई, यहां तक कि उन्‍हें कोई जानकारी नहीं दी गई। यह बेहद आपत्तिजनक और अपमानजनक है।

हालांकि रईस चंद्र की ज्‍वाइनिंग एक बार फिर 2017 का इतिहास दोहराता नजर आ रहा है। 2017 में नंदी ने जब भाजपा ज्‍वाइन की थी, तब के दिग्‍गज भाजपा नेता केसरीनाथ त्रिपाठी ने ठीक ऐसे ही आपत्ति जताई थी। त्रिपाठी ने कहा था कि उनके खिलाफ चुनाव लड़ने वाले नंदी को भाजपा में शामिल करने से पहले उनसे कोई चर्चा नहीं की गई। बाद में केसरीनाथ त्रिपाठी की सीट से भाजपा ने नंदगोपाल गुप्‍ता नंदी को ही उम्‍मीदवार बना दिया। केसरीनाथ को बाद में बंगाल का राज्‍यपाल बनाकर समायोजित किया गया। एक बार फिर सियासी कहानी उसी राह पर है, इसलिए नंदी घबराये हुए हैं। रईस चंद्र पुराने भाजपाई हैं, और एमएलसी का चुनाव भाजपा के टिकट पर लड़ चुके हैं।

हालांकि जब केशव प्रसाद मौर्य से नंदी के आरोपों के जवाब में सवाल किया गया तो उन्‍होंने जन्मदिन की बधाई देकर बात को टाल दिया। लेकिन केशव मौर्य ने यह कहकर भविष्य का संकेत भी कर दिया कि "पार्टी में अच्‍छे लोग आयेंगे और गंदे लोगों को बाहर कर दिया जायेगा।" केशव ने सीधे भले ही कुछ नहीं कहा, लेकिन उनके अच्‍छे और गंदे वाली बात को लेकर कयास लगाया जा रहा है। माना गया कि अतीक से नजदीकी में फंसे नंदी पर ही केशव ने हमला किया है। रईस शुक्ला की ज्‍वाइनिंग से नाराज नंदी ने दिल्‍ली दरबार की दौड़ भी लगाई, लेकिन वहां से क्‍या आश्‍वासन मिला इसकी जानकारी नहीं है।

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    माना जा रहा है कि माफिया अतीक से नजदीकी की खबरें सार्वजनिक होने के बाद भाजपा ने नंदी से किनारा करना शुरू कर दिया है। पहले नंदी की पत्‍नी का टिकट काटा गया, फिर शहर दक्षिणी से उनके बैकअप के रूप में रईस चंद्र शुक्‍ला को भाजपा में शामिल किया गया है। चर्चा तो यहां तक है कि आगे होने वाले मंत्रिमंडल बदलाव में नंदी का पत्ता भी काटा जा सकता है। हालांकि नंदी का मंत्रिमंडल से बाहर होना दिल्‍ली की मंशा पर तय होगा, क्‍योंकि आखिरी फैसला वहीं से लिया जायेगा, लेकिन भाजपा के दो कद्दावर नेताओं की आपसी नूराकुश्‍ती फिलहाल चर्चा में जरूर है।

    (इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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