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UP Investors Summit: कितना सफल है 'निर्भय निवेश सक्षम उत्तर प्रदेश' का अभियान?

UP-बिहार ये दो ऐसे हिन्दीभाषी राज्य रहे हैं जो औद्योगिक विकास के मामले में बीमारू राज्य के तौर पर चिन्हित किये गये थे। लेकिन योगी के नेतृत्व में UP निवेश सक्षम प्रदेश के रूप में अपनी पहचान बनाने की गंभीर कोशिश कर रहा है।

UP Investors Summit 2023 yogi adityanath efforts to establish investment capable uttar pradesh

UP Investors Summit: उत्तर प्रदेश लैंड लॉक्ड प्रदेश है। अर्थात इसका समुद्र से कोई सीधा संपर्क नहीं है। ऐसे राज्यों या देशों के लिए निर्माण और व्यापार के अवसर सीमित हो जाते हैं जिनका समुद्र से सीधा संपर्क न हो। लेकिन बीते कुछ सालों से उत्तर प्रदेश इस समस्या को दरकिनार कर औद्योगिक उत्पादन बढ़ाने के प्रयास में लगा हुआ है। प्रदेश की पूर्व सरकारों ने ऐसे प्रयास किये थे लेकिन उसमें कोई खास सफलता नहीं मिली। उत्तर प्रदेश का समुद्री सीमा से न जुड़ा होना उसके औद्योगिक विकास में व्यावहारिक बाधा है। लेकिन सत्ता में आने के बाद योगी आदित्यनाथ ने इसे चुनौती के रूप में लिया और 2018 में पहले यूपी इन्वेस्टर समिट का आयोजन किया। उसके उत्साहजनक परिणाम आने के बाद अब फरवरी में यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर समिट का आयोजन किया है।

विदेशी निवेशकों को निमंत्रित करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्व के कई देशों में मंत्रियों और अधिकारियों को व्यक्तिगत स्तर पर भेजा। प्रत्येक निवेश प्रस्ताव को संभव बनाने के लिए ऑनलाइन ट्रैकिंग की व्यवस्था की गयी। प्रत्येक निवेश प्रस्ताव के लिए एक समर्पित निवेश सारथी की व्यवस्था हुई है। यह निवेश सारथी ठीक उसी तरह से काम करेगा जैसे किसी कॉर्पोरेट कंपनी में अकाउंट मैनेजर काम करता है।

प्रत्येक निवेश प्रस्ताव को संभव बनाने के लिए निवेश सारथी हर काम में निवेशकों की सहायता करेगा ताकि उसके निवेश की सुगमता में कोई बाधा ना आये। प्रत्येक निवेश प्रस्ताव की समीक्षा और निवेशकों के साथ बातचीत और समझने के बाद ही निवेश प्रस्ताव को सरकार के अप्रूवल के लिए आगे बढ़ाया जा रहा है। यह सारी कवायद बताती है कि जो भी निवेश प्रस्ताव आयेंगे उसके शत प्रतिशत क्रियान्वयन को लेकर योगी सरकार कितना गंभीर है। प्रत्येक निवेश प्रस्ताव को ऑनलाइन सब्सिडी से भी जोड़ा गया है ताकि किसी निवेशक को मिलने वाली कोई सब्सिडी छूट ना जाये। प्रत्येक MoU की निगरानी वरिष्ठ अधिकारियों के साथ साथ मुख्यमंत्री स्वयं कर रहें हैं।

इस साल के यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के लिए सरकार ने यूपी की एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए दस लाख करोड़ रूपये निवेश हेतु निर्धारित किये थे। इसका आधा तो मुख्यमंत्री को मुंबई रोड शो से ही मिल गया जहां वह व्यक्तिगत रूप से स्वयं उपस्थित थे। मुंबई में मुख्यमंत्री देश के उद्योगपतियों के साथ साथ उत्तर प्रदेश के प्रवासियों से भी अलग से मिले जिन्होंने अपने श्रम और कौशल से महाराष्ट्र के उद्योग जगत में पहचान बनाई है। अभी तक जो रिपोर्ट आई है उसके मुताबिक दस लाख करोड़ से ऊपर के निवेश प्रस्ताव आ चुके हैं जबकि पिछले समिट में 4.68 लाख करोड़ के प्रस्ताव आये थे।

इस बार सरकार ने सभी जिलों में भी रोड शो का आयोजन रखा है और इससे जिला प्रशासन के साथ साथ जनप्रतिनिधियों को भी जोड़ा है। इस मुहिम ने उन सभी उद्यमियों को भी जगा दिया है जिनके अंदर कुछ उद्यम करने की भावना थी। बस्ती जिले के एक निवेशक शिव प्रसाद जायसवाल ने 15 करोड़ के निवेश प्रस्ताव दिए। वो लंबे समय से सोच रहे थे कि जिस चीज का व्यापार कर रहे हैं उसका एक कारखाना लगा लें। लेकिन जब सरकार ने जिला स्तर पर जाकर उद्योग लगाने का आह्वान किया तो उनके अंदर की भावना प्रबल हो गयी और उन्होंने कारखाना लगाने का निश्चय कर लिया। यह तो एक कस्बे की कहानी है। अगर हर जिले में छोटे बड़े 100 उद्यमी भी ऐसे जगते गए तो 7500 यूनिट तो सिर्फ एक बार पूछने से ही लग जायेगी। यही यूपी के लिए बड़ी सफलता होगी कि स्थानीय लोगों में उद्यमशीलता का विकास हो।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस सफलता में मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों का भी बड़ा लाभ मिल रहा है। नए मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के लिए भारत में आयकर काफी आकर्षक हो गया है। GST से भी टैक्स की परिभाषाओं को समझने की जो सहूलियतें मिली और फेसलेस स्क्रूटिनी तथा विवाद निपटान तंत्र की जो घोषणा हुई उसका सबने स्वागत किया।

आज नई घरेलू मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी यदि कोई प्रोत्साहन या छूट नहीं ले रही है तो वह 15 फीसदी कॉरपोरेट टैक्स रेट के हिसाब से टैक्स दे सकती है। सभी सरचार्ज और सेस लगाने के बाद नई मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी के लिए टैक्स की प्रभावी दर 17.01 फीसदी हो जाएगी। अभी चीन में कॉरपोरेट टैक्स की मानक दर 25 फीसदी है। यदि कोई कॉरपोरेट चीन की सरकार द्वारा प्रोत्साहन के लिए चिन्हित क्षेत्रों में कारोबार करता है तो उसके लिए कॉरपोरेट टैक्स की दर घटाकर 15 फीसदी की जा सकती है। कॉरपोरेट टैक्स की दर घटने से अमेरीकी कारोबारियों ने भी इसका स्वागत किया है जो भारत में सबसे बड़े निवेशक हैं।

वैश्विक स्तर पर अगर देखेंगे तो जो शीर्ष के 10 मैन्युफैक्चरिंग देश हैं उनके यहां भी जो कर की प्रभावी दर है निर्माण कारखानों पर, वह भारत से ज्यादा हो गई है। नये मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के संदर्भ में चीन, यूके, कोरिया, इटली, जापान फ्रांस आदि देशों के आयकर अब भारत के नए प्रभावी आयकर से अधिक हो गये हैं। टैक्स की दर के हिसाब से सिंगापुर को टैक्स फ्रेंडली देश माना जाता है। अब भारत की नई निर्माण यूनिट पर लगने वाली दर और सिंगापुर की दर समान हो गई है। ऐसी दशा में जो वैश्विक निवेशक हैं उनके लिए भारत अब नए इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन के रूप में सामने आया है क्यूंकि यहां सस्ता श्रम और बाजार दोनों मौजूद हैं।

इन सब नीतियों को समझकर ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी टीम ने इसमें लीड ली है। उत्तर प्रदेश जो पहले मैन्युफैक्चरिंग में पिछड़ा राज्य था, वह भारत ही नहीं विश्व का मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की राह पर निकल पड़ा है। नई यूनिट लगाने पर निवेशक को सिर्फ कॉरपोरेट टैक्स का फायदा ही नहीं मिलेगा बल्कि उसे उसकी पूंजीगत लागत हेतु लिए गए ऋण पर ब्याज दर में 5 फीसदी की छूट भी मिलेगी।

यूपी सरकार नए यूनिट के ऐसे जीएसटी इनपुट क्रेडिट को भी रिफंड कर रही है जिसे निवेशक नियमों के तहत प्राप्त नहीं कर पाता है। टैक्स हॉलिडे अवधि तक निवेशक स्टेट GST का भी रिफंड प्राप्त करेगा। नई यूनिट पर स्टाम्प ड्यूटी क्षेत्रवार 50 से 100 फीसदी तक माफ़ कर दी गई है। बिजली की ड्यूटी, पीएफ, मंडी शुल्क में भी छूट है।

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    सबसे अधिक MSME वाले राज्य यूपी में MSME को भी कई रियायतें दी गई हैं। घटे हुए आयकर के साथ नए उद्योग सरकार के नियमों के तहत अपने निवेश में छूट प्राप्त कर सकते हैं। निवेश मित्र पोर्टल काम कर रहा है। इसके अलावा एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे जैसे आधारभूत ढांचे के विकास की दिशा में भी यूपी काफी तेजी से काम कर रहा है। ये सारी परिस्थितियां मिलकर यूपी का भविष्य उज्जवल कर सकती हैं।

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    (इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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