Tata Punch: नैनो का सपना पंच ने पूरा किया
Tata Punch: टाटा समूह के लिए जो काम नैनो नहीं कर पाई वह पंच ने कर दिखाया है। रतन टाटा नैनो के जरिए छोटी कारों की दुनिया में अपनी बादशाहत कायम करना चाहते थे इसलिए एक लाख वाली कार का सपना देखा था। लेकिन वह सपना ऐसा चकनाचूर हुआ कि कार व्यापार में टाटा समूह का मनोबल गिर गया।
लेकिन अब उसी समूह की टाटा पंच ने रतन टाटा के सपनों को पूरा कर दिया है। हालांकि यह न तो एक लाख की कार है और न ही इसे नैनो जैसे सस्ते प्रोडक्ट की तरह डिजाइन किया गया है। कीमत भी 7 से 10 लाख है और डिजाइन, मजबूती ऐसी कि इसे ग्लोबल एनकैप में 5स्टार मिले हैं। शायद यही कारण है कि यह कार भारत की सबसे ज्यादा बिकने वाली कार बन गयी है।

हालांकि तकनीकी तौर पर टाटा समूह द्वारा इसे माइक्रो एसयूवी कहा जा रहा है और उसकी यह रणनीति पूरी तरह से सफल भी साबित हुई है। एंट्री लेवल कारों में पहले मारुति 800 और अब अल्टो से उकताये लोगों के लिए टाटा पंच एक बेहतर विकल्प के रूप में उभरी है इसलिए बीते दो महीनों से वह देश की सबसे अधिक बिकने वाली चार पहिया गाड़ी बन गयी है।
भारत का कार बाजार अभी उतना विकसित नहीं है जितना अमेरिका, यूरोप, चीन या फिर जापान जैसे देशों का है। आज भारतीय कार बाजार में वोक्सवैगन, ऑडी, बीएमडब्लू, मर्सिडीज ही नहीं रोल्स रॉयस और बेन्टले भी मौजूद हैं और अपनी कारें बेंच रही हैं। लेकिन व्यापक तौर पर भारतीय कार बाजार पर मारुति सुजुकी का ही राज रहा है। भारत की टॉप टेन बिकनेवाली कारों की लिस्ट बनाइये तो इसमें पांच सात कारें मारुति सुजुकी की ही मिलेंगी।
लेकिन पहले मारुति को चुनौती दी ह्युंडई ने और अब टाटा ने तो टॉप टेन लिस्ट में अपनी दो गाड़ियां खड़ी कर दी हैं। भारत की सबसे अधिक बिकनेवाली टाटा पंच के अलावा टाटा नेक्सॉन ऐसी दूसरी मिनी एसयूवी है जो भारत की टॉप टेन बिक्री वाली गाड़ियों में शामिल हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि टाटा ने ऐसा क्या किया कि उसने छोटी कार के जमे जमाये मार्केट में मारुति को चुनौती दे दी?
इंडिका से कार बाजार में अपना सफर शुरु करनेवाले टाटा समूह ने 2017 में मार्केट के क्रेज को पकड़ते हुए सब फोर मीटर एसयूवी नेक्सॉन लॉन्च की थी। पहले साल तो यह गाड़ी सिर्फ 14 हजार बिकी लेकिन साल दर साल इसकी बिक्री रॉकेट की तरह बढ़ी। 2023 के फाईनेंशियल ईयर में टाटा ने रिकार्ड 1 लाख 70 हजार नेक्सॉन बेच दी। नेक्सॉन को मिली सफलता ने टाटा समूह को प्रेरित किया होगा कि वह इस मार्केट में और प्रयोग करे इसलिए 2021 में उसने नेक्सॉन से सस्ती और उससे छोटी माइक्रो एसयूटी टाटा पंच लॉन्च कर दी।
भारत सरकार द्वारा कारों पर कमरतोड़ टैक्स लगाया जाता है। चार पहिया गाड़ियों पर सर्वोच्च 28 प्रतिशत जीएसटी लगता है जिसके कारण कार की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हो जाती है। इसमें कुछ रियायत उन कंपनियों को मिलती है जो लंबाई में चार मीटर से कम या फिर 1500 सीसी से कम इंजन क्षमता वाली गाड़ी बनाते हैं। केन्द्र सरकार द्वारा ऐसा संभवत: इसलिए किया जाता है ताकि आम आदमी अगर गाड़ी खरीदना चाहे तो उससे उसी तरह टैक्स न वसूला जाए जैसा बड़ी गाड़ी खरीदनेवालों से वसूला जाता है।
इसका फायदा उठाने की कोशिश वॉक्सवैगन, शेवर्ले, रेनॉ, निसान, ह्युंडई आदि कई कंपनियों ने की लेकिन जैसी सफलता मारुति को मिली हुई है वैसी किसी को नहीं मिली। लेकिन टाटा समूह ने रणनीतिक तौर पर बहुत सोच समझकर ही संभवत: टाटा पंच को स्मॉल कार की बजाय माइक्रो एसयूवी के सेगमेन्ट के तहत लॉन्च किया जो भारतीय कार बाजार के लिए बिल्कुल नया था। माइक्रो एसयूवी को क्रॉसओवर सेगमेन्ट कहा जाता है जहां एंट्री लेवल हैचबैक सेगमेन्ट में ही आप एसयूवी जैसी ऊंची कार बनाते हैं। ह्यूंडई की कैस्पर भी इसी सेगमेन्ट की कार है जो फिलहाल भारतीय बाजार में नहीं बेची जाती।
लेकिन कार छोटी है इसका अर्थ यह नहीं कि वह नैनो जैसी बदसूरत और कमजोर है। क्रैश टेस्ट में उसे 5स्टार सेफ्टी रेटिंग मिली हुई है। 1200 सीसी का इंजन दिया ताकि ग्राहक पर टैक्स का बोझ अधिक न बैठे। इसके साथ ही एक छोटी कार में मनोरंजन, स्टेटस और टेक्नॉलाजी से जुड़े जितनी चीजें हैं उनको भी बहुत हद तक शामिल कर लिया है। इसके अलग अलग वर्जन हैं और सात लाख से 10 लाख के बजट के बीच अपनी सुविधा और जरूरत के हिसाब से ग्राहक खरीद सकता है।
टाटा की इसी रणनीति ने देखते ही देखते दो साल बाद ही पंच को भारतीय कार बाजार का सरपंच बना दिया। भारत का लोअर मिडिल क्लास या फिर उससे भी नीचे का तबका जो एक ऐसी गाड़ी लेना चाहता हो जो छोटी होकर भी छोटी न हो, उससे उसका स्टेटस बढे और सबसे बड़ी बात उसकी जेब पर भारी न पड़े। टाटा पंच ने उसकी ये सारी जरूरतें एक साथ पूरी कर दीं।
अक्टूबर 2021 में लांच होनेवाली टाटा पंच अगस्त 2022 तक यानी मात्र दस महीने में एक लाख बिक चुकी थी। अगले एक लाख की बिक्री का आंकड़ा उसने नौ महीने में पूरा किया। इसके बाद अगले एक लाख का आंकड़ा उसने 8 महीने में ही छू लिया। जनवरी 2024 तक टाटा की 3 लाख पंच बिक चुकी है। फरवरी और मार्च 2024 में इस गाड़ी की औसत बिक्री 17 हजार से ऊपर है इसका अर्थ हुआ कि अगले एक लाख का आंकड़ा संभवत: 6 महीने में ही छू लेगी। अगर ऐसा होता है तो भारतीय कार बाजार के लिए यह एक रिकार्ड ही कहा जाएगा।
2022 तक भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा कार उत्पादक देश बन चुका है। 2022 में भारत में 54 लाख चार पहिया गाड़ियों का उत्पादन हुआ। फिर भी यह आंकड़ा चीन के 1 करोड़ 70 लाख या फिर अमेरिका के 1 करोड़ 6 लाख से काफी पीछे है। इसका कारण संभवत: यही रहा है कि भारत में आज भी जिस वर्ग को सबसे अधिक गाड़ियां बेची जा सकती हैं उसकी सुविधा और सुरक्षा के नाम पर कंपनियां कोताही करती हैं। मारुति के अलावा बाकी कार कंपनियों का फोकस मंहगी कारों को बेचने पर रहता है जो जरूरत से अधिक स्टेटस सिंबल का प्रतीक होती है।
रतन टाटा ने एक लाख वाली नैनो कार का सपना देखा ही इसलिए था ताकि इस देश का आम आदमी भी अपने परिवार के साथ मोटरसाइकिल के बजाय कार पर सवारी कर सके। वह सपना कई वजहों से चकनाचूर हुआ। पहले तो सिंगूर का प्लांट ही विवादों में फंस गया बाद में गुजरात से उत्पादन शुरु भी हुआ तो सस्ती होने के बावजूद बाजार में किसी ने उसे लेने में रुचि नहीं दिखाई।
लेकिन टाटा पंच ने अब रतन टाटा के उस सपने को पूरा कर दिया है। यह भी हो सकता है कि जिस तरह से इस माइक्रो एसयूवी की मांग बढ़ रही है और टाटा के मैनेजमेन्ट ने कोई बड़ा ब्लंडर नहीं किया तो यह गाड़ी भविष्य में भारत की सबसे अधिक बिकनेवाली गाड़ी बन जाए।
जिस तरह से टाटा ने इसे सीएनजी में भी उतार दिया है उससे यह आम आदमी की जेब को और अधिक राहत देगी। 'कितना देती है' की मानसिकता वाले भारतीय कार बाजार में यह सीएनजी वर्जन माइलेज चार रुपये प्रति किलोमीटर के खर्चे में चलती है।
इसलिए अभी तो टाटा पंच ने भारतीय कार बाजार में सफलता के झंडे गाड़ने शुरु किये हैं। कोई बहुत आश्चर्य नहीं कि भविष्य में मारुति 800 की तरह यह भारतीय कार बाजार का चेहरा ही बन जाए।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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