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South Cinema: साउथ सिनेमा के डायरेक्टर करेंगे बॉलीवुड का बेड़ा पार?

South Cinema: दिसंबर का महीना फिर दो ऐसी खबरें लेकर आया है, जो इस तरफ इशारा कर रही हैं कि अब बॉलीवुड कही जाने वाली हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को कोई बचा सकता है तो वो है साउथ का सिनेमा। ये दो खबरें जुड़ी हैं बुधवार तक 757.6 करोड़ की बंपर कमाई करने वाली साउथ के डायरेक्टर संदीप रेड्डी वांगा की मूवी 'एनिमल' की और दूसरी है नेटफ्लिक्स की पहली छमाही की रिपोर्ट में इस साल सबसे ज्यादा देखे जाने वाली वेबसीरीज 'राणा नायडू' के सीजन वन की। इसके स्टार भी साउथ के दो बड़े चेहरे हैं, 'बाहुबली' के भल्लालदेव राणा डुग्गुबत्ती और 'प्रेम कैदी' फेम व्यंकटेश। जबकि 'एनिमल' से ठीक पहले बॉक्स ऑफिस पर सितम्बर में धमाका करने वाली मूवी 'जवान' भी साउथ के ही डायरेक्टर एटली की मेहनत थी।

जिस तरह बाहुबली को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल पूछे जा रहे थे कि कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा? उसी तरह के सवाल इन दिनों एनिमल को लेकर सोशल मीडिया वॉल्स पर घूम रहे हैं कि मुस्लिम विलेन बनाने की जरूरत क्या थी? बॉबी के पिता ने धर्मपरिवर्तन क्यों किया? पूरी मूवी में इतने कत्ल ए आम के बावजूद पुलिस क्यों नहीं नजर आती? मीडिया भी सवाल क्यों नहीं उठाती आदि। वो सवाल भी उठ रहे हैं, जो 'बाहुबली' के समय भी नहीं उठे थे, और वो हैं नैतिक सवाल कि आखिर रणवीर के किरदार को इतना वीभत्स रखने की जरूरत क्या थी? महिलाओं के लिए इतने शर्मनाक डायलॉग्स वाले सीन क्यों रखे गए, बाप बेटे के रिश्ते को इतना विवादित क्यों बना दिया गया?

South Cinema directors of South Cinema push bollywood Cinema

तमाम सवालों के बावजूद एनिमल दो हफ्ते तक बॉक्स ऑफिस पर धड़ाधड़ कमाई करती रही और अब भी जमी हुई है। भारत के बॉक्स ऑफिस में ही 'एनिमल' की कमाई 467 करोड़ होने का दावा फिल्म निर्माताओं की तरफ से किया जा रहा है। आप भले ही इन आंकड़ों पर सवाल उठाएं, लेकिन आम आदमी के बीच इस मूवी की काफी चर्चा है। संदीप रेड्डी वांगा की कबीर सिंह के बाद ये दूसरी फिल्म बॉलीवुड पर भारी पड़ी है और इन दोनों ही फिल्मों में हीरो के किरदार को एक खास किस्म का एटीट्यूड दिया गया है, जिसे अल्फा मेल कहा गया है। जो अपने मन की करने के लिए किसी भी हद तक चला जाता है, नैतिक नियम कानून और संवैधानिक नियम कानून उसके लिए कोई मायने नहीं रखते। हां इमोशन मायने रखते हैं, लेकिन उसके इमोशंस को व्यक्त करने का तरीका एकदम अनोखा और लाउड होता है।

एनिमल के एक एक सीन, एक एक डायलॉग की आप नैतिक आधार पर बुराई कर सकते हैं लेकिन उसको देखकर आपको डायरेक्टर की हिम्मत की तो दाद देनी होगी कि इतनी कमियों के बावूजद उसने फिल्म को बनाया और लगभग सारे प्रयोग किए। प्रयोग करने की हद तक संदीप गुजर जाने वाले थे आखिर में बॉबी देओल और रणवीर कपूर का लिप किस दिखाकर, लेकिन आखिरी समय में उन्होंने वो सीन हटा लिया।

लेकिन जिस तरह से आखिर में उन्होंने रणवीर कपूर का डबल रोल, अमिताभ बच्चन की लैंडिंग दिखाई और बॉबी देयोल के पिता के धर्मपरिवर्तन और आग में जलकर मरने की कहानी छुपाई, उससे साफ लगता है कि संदीप रेड्डी वांगा पहले से ही सीक्वल की योजना बना चुके थे। तभी तो केवल इशारा नहीं किया बल्कि स्क्रीन पर साफ लिख दिया कि अब 'एनिमल पार्क' (सीक्वल का टाइटल) में मिलेंगे।

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को ये झटका इस साल केवल एनिमल ने नहीं दिया बल्कि राणा डुग्गूबत्ती व व्यंकटेश की वेबसीरीज 'राणा नायडू' ने भी दिया है। जहां इतनी सारी वेबसीरीज हिंदी पट्टी के हीरोज की बनी हों, यहां तक कि शाहिद कपूर, अभिषेक बच्चन, पंकज त्रिपाठी जैसे कलाकारों की वेबसीरीज व फिल्में नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई हों, वहां राणा नायडू जैसे साउथ के दो सितारों से सजी सीरीज का बाजी मार जाना हैरत की बात है और ये बताता है कि साउथ के सितारों का जादू अब हिंदी के सितारों पर भी सर चढ़कर बोल रहा है। ये भी कि साउथ वाले अब ओटीटी पर भी हिंदी पट्टी के सितारों को मात दे रहे हैं।

नेटफ्लिक्स साल में दो बार व्यूअरशिप रिपोर्ट (व्हाट वी वॉच्ड: ए नेटफ्लिक्स एंगेजमेंट रिपोर्ट) देता है। इस साल जनवरी से जून तक की रिपोर्ट जारी करते हुए नेटफ्लिक्स ने बताया कि राणा नायडू सीरीज भारत में सबसे ज्यादा देखी जाने वाली सीरीज या फिल्म है। पूरी दुनिया में उसका नंबर 330वां है। राणा नायडू के सीजन वन को इस दौरान 463 लाख घंटे देखा गया। ये वाकई में चौंकाने वाला आंकड़ा है।

दिलचस्प बात है कि राणा नायडू को मिर्जापुर सीरीज के लेखक करण अंशुमान और द फैमिली मेन सीरीज के निर्देशक सुपर्ण वर्मा ने निर्देशित किया है। लेकिन आप इस सीरीज में राणा डुग्गूबत्ती और व्यंकटेश को हटाकर इस सीरीज की कल्पना ही नहीं कर सकते। बिलकुल वैसे ही जैसे वेबसीरीज 'फर्जी' में विजय सेतुपति।

देखा जाए तो साउथ के फिल्मकार, कलाकार ही अब डूबते बॉलीवुड की नैया पार करने में लगे हैं। चूंकि दर्शक की नब्ज साउथ वालों के पास है और हिंदी पट्टी में बेचने के लिए अपील हिंदी के स्टार्स के पास है, सो उनको जोड़ने का काम चल रहा है। दोनों मिलकर दोनों तरफ के दर्शकों को भरपूर मनोरंजन भरी फिल्में दे रहे हैं। साउथ के निर्देशक एटली ने भी यही फॉर्मूला अपनाया और शाहरुख के साथ साथ विजय सेतुपति, नयनतारा, प्रियामणि जैसे चेहरों को आजमाया।

साउथ के फिल्मकारों ने नौजवानों की पसंद को ठीक से समझा है। युवा लीक से अलग हटकर देखना पंसद करते हैं। उन्हें एटीट्यूड पसंद आता है। कुछ बोल्डनेस भी चाहिए होती है। बगावती तेवर भी। ऐसे में साउथ के फिल्मकार ऐसी फिल्मों या बेवसीरीज के जरिए इस नब्ज को पकड़ रहे हैं।

इसके अलावा नए प्रयोग भी नई पीढ़ी को काफी भाते हैं। बाहुबली, पुष्पा, केजीएफ, कांतारा, लियो, पीएस वन जैसी तमाम ऐसी फिल्में एक के बाद एक सामने आ रही हैं कि हिंदी पट्टी के फिल्मकार भी चकित रह गए हैं। ऐसे में गजनी, वांटेड, चेन्नई एक्सप्रेस और सिंघम जैसी फिल्मों के जरिए हिंदी के सितारों ने भी साउथ के इस ट्रेंड का समय समय पर फायदा लिया है। अब भी ये हो रहा है कि 'एनिमल' का फायदा रणवीर कपूर ने भरपूर लिया है तो 'जवान' का शाहरुख खान ने। वहीं साउथ के सितारों का फायदा राणा नायडू के निर्देशकों ने लिया है।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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