Modi in Rajasthan: पीएम मोदी खुद संभालेंगे राजस्थान की चुनावी कमान
Modi in Rajasthan: इस साल जिन तीन प्रमुख राज्यों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं उसमें मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की चुनावी कमान अमित शाह ने संभाल ली है, वहीं राजस्थान को लेकर यह तय हुआ है कि वहां पार्टी की चुनावी गतिविधियों को सीधे प्रधानमंत्री मोदी ही संभालेंगे। इसलिए प्रधानमंत्री मोदी अन्य चुनावी राज्यों से अधिक ध्यान राजस्थान पर दे रहे हैं। अभी तक मोदी राजस्थान में 7 सभाएं कर चुके हैं।
राजस्थान में भाजपा को चाक चौबंद करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने मानसून सत्र के दौरान ही 8 अगस्त को राजस्थान के 24 लोकसभा और 4 राज्यसभा सांसदों के साथ दिल्ली में बैठक की थी। इस बैठक में उन्होंने राजस्थान की जमीनी हकीकत के बारे में सांसदों से जानकारी ली थी। मोदी ने जमीनी स्तर से उनको मिल रहे फीड बैक से सांसदों को अवगत भी कराया था।

इस बैठक में सांसदों ने राजस्थान की राजनीति पर भाजपा की स्थिति और गहलोत की घोषणाओं से होनेवाले प्रभाव के बारे में मोदी को विस्तार से बताया था। प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में सांसदों से यह फीडबैक मांगने के लिए कहा था कि उनकी विधानसभा में कौन सी सीट सबसे मजबूत है और कौन सबसे कमजोर। इन्हें मजबूत करने के लिए क्या उपाय करना होगा इसकी जानकारी 20 अगस्त तक भेजने के लिए कहा था।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी पूछा कि विधानसभा चुनाव में ऐसी कौन सी घोषणाएं हो सकती हैं जिसका फायदा विधानसभा चुनाव के साथ-साथ लोकसभा चुनाव में भी मिले। प्रधानमंत्री मोदी ने सभी सांसदों को केन्द्र सरकार की 9 साल की उपलब्धियों को लेकर लोगों के बीच जाने और जनता से जीवंत संवाद बनाए रखने को भी कहा।
भाजपा झुंझुनूं, कोटपूतली जैसी करीब 19 सीटें पिछले तीन चुनाव से हार रही है। इसी तरह 58 सीटें ऐसी हैं, जहां तीन में से दो चुनावों में भाजपा को हार मिली है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि राजस्थान की उन 77 सीटों पर मोदी सबसे ज्यादा ध्यान दे रहे हैं जो पिछले चुनावों में उसके लिए हार का कारण बनती रही हैं। लक्ष्मणगढ़, फतेहपुर, खेतड़ी, नवलगढ़, बस्सी, बागीदोरा, वल्लभनगर, सांचौर, बाड़मेर, सरदारपुरा, लालसोट, सिकराय, सपोटरा, टोडाभीम, बाड़ी, राजगढ़-लक्ष्मणगढ़, कोटपूतली, दांतारामगढ़ और झुंझुनूं सीट पर पिछले परिसीमन के बाद हुए तीनों चुनाव भाजपा हारी है। भाजपा इन सीटों पर कुछ जगह सांसदों को लड़ाएगी, कुछ सीटों पर दूसरों दलों से नेताओं को लाकर लड़ाने और कुछ पर अपनी ही पार्टी में मजबूत नेताओं की खोज कर रही है।
राजस्थान में कांग्रेस सरकार को घेरने और जनसमर्थन जुटाने के लिए पहली बार प्रधानमंत्री मोदी के निर्देश पर चार दिशाओं से चार यात्राएं निकालने का निर्णय हुआ है। इसकी पूरी रूपरेखा मोदी के निर्देश पर भाजपा के केन्द्रीय टीम ने बनाई है। बीजेपी राजस्थान में एक साथ चारों दिशाओं से 2 सितंबर को परिवर्तन यात्राएं शुरू करेंगी। यह यात्राएं उत्तर में गोगामेड़ी मंदिर (हनुमानगढ़), दक्षिण में बेणेश्वरधाम (डूंगरपुर), पूर्व में त्रिनेत्र गणेश मंदिर (सवाईमाधोपुर) और पश्चिम में रामदेवरा (जैसलमेर) से निकाली जाएगी। इन चारों यात्राओं का समापन जयपुर के धानक्या में 25 सिंतबर को प्रधानमंत्री मोदी की सभा के साथ होगा।
23 दिन चलने वाली इस चार दिशाओं की यात्रा में राजस्थान की सभी 200 विधानसभाओं को कवर किया जाएगा। इन चारोें दिशाओं से निकलने वाली यात्राओं का नेतृत्व कौन से चार नेता करेंगे अभी तय नहीं है। इन नेताओं पर अंतिम फैसला भी मोदी ही लेंगे। जिन नामों की चर्चा है उनमें प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और उप नेता प्रतिपक्ष सतीश पूनिया हो सकते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी राजस्थान के मामले को लेकर कितनी रूचि ले रहे हैं, इसका इस बात से अंदाज लगाया जा सकता है कि जब राजस्थान भाजपा ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार के खिलाफ एक अगस्त को जयपुर में सचिवालय के घेराव का कार्यक्रम तय किया था तो ऐसा पहली बार हुआ कि प्रदेश भाजपा के किसी आंदोलन के लिए स्वयं प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया हो। मोदी के इस ट्वीट के बाद भाजपा के लगभग सभी छोटे-बड़े नेता और कार्यकर्ता इस घेराव में शामिल हुए। हालांकि वसुंधरा राजे स्वास्थ्य ठीक न होने से इसमें शामिल नहीं हो सकी थी।
प्रधानमंत्री मोदी विधानसभा चुनावों में पार्टी की ओर से स्टार प्रचारक तो होते ही हैं, लेकिन पहली बार ऐसा हो रहा है कि मोदी की सीधी निगरानी में राजस्थान की चुनावी रणनीति बन रही है। इस बार भाजपा हाईकमान ने तय किया है कि राजस्थान चुनाव में मुख्यमंत्री का चेहरा कोई नहीं होगा और भाजपा मोदी के चेहरे और मोदी के काम पर ही चुनाव लड़ेगी।
राजस्थान में पिछले दो दशक के सभी चुनावों में भाजपा मुख्यमंत्री का चेहरा आगे कर लड़ती रही है लेकिन इस बार मोदी के चेहरे और मोदी की योजनाओं के नाम पर ही सिर्फ चुनाव नहीं लड़ेगी बल्कि राजस्थान विधानसभा चुनाव की जिम्मेदारी भी मोदी संभालेगे। मोदी ने सांसदों और पार्टी नेताओं के साथ बैठक में साफ संदेश दिया है कि परिवार के लोगों के टिकट के लिए नेता कोशिश न करेें। मोदी चाहते हैं कि 'परिवारवाद क्विट इंडिया' का जो नारा उन्होेने दिया है उसका पालन पार्टी के भीतर कड़ाई से हो। हालांकि उम्र की पांबदी को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष परिस्थितियों में राहत देने की बात कही है।
दरअसल राजस्थान में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के अलावा दर्जन भर अन्य नेता भी मुख्यमंत्री बनने के ख्वाब देख रहे हैं। इनमें नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, उप नेता प्रतिपक्ष सतीश पूनिया, प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी, केन्द्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, गजेन्द्र सिंह शेखावत और अश्विनी वैष्णव को मुख्यमंत्री की दौड़ में शामिल माना जा रहा है। इनके अलावा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, वरिष्ठ भाजपा नेता ओम प्रकाश माथुर, पार्टी महासचिव सुनील बंसल, प्रदेश भाजपा के पूर्व संगठन मंत्री प्रकाश चंद्र गुप्ता इत्यादि के नाम भी मुख्यमंत्री के संभावित दावेदारों के रूप में भाजपा और संघ में चल रहे हैं। ऐसे में पार्टी के ये सभी नेता एक दूसरे के समर्थक उम्मीदवारों को हराने में न लग जाएं और पार्टी की संभावनाओं पर कोई असर न पड़े इसलिए मोदी ने खुद कमान संभाली है।
मोदी इस बात को भली भांति जानते हैं कि अशोक गहलोत और सचिन पायलट की खींचतान और प्रदेश में अपराध और भ्रष्टाचार चरम पर होने के बाद भी अशोक गहलोत को हल्के में नहीं लिया जा सकता। ऐसे में मोदी ने भाजपा की वापसी सुनिश्चित करने के लिए अपने भरोसेमंद केन्द्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी को राजस्थान का चुनाव प्रभारी बनवाया। प्रदेश अध्यक्ष पद पर सांसद सीपी जोशी को नियुक्त करने की सलाह राष्ट्रीय अध्यक्ष को दी थी।
अभी कुछ दिन पहले ही घोषित प्रदेश चुनाव प्रबंधन समिति का संयोजक पूर्व सांसद नारायण पंचारिया को और मेनिफेस्टों कमेटी का संयोजक केन्द्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल को बनाया गया है। वसुंधरा राजे को दोनों कमेटियों से दूर रखा गया है। अभी पार्टी ने प्रचार अभियान समिति की घोषणा नहीं की है। ऐसे में हो सकता है वसुंधरा को प्रचार अभियान समिति की कमान दी जाए या यहां भी वसुंधरा को दरकिनार कर किसी और नेता को यह जिम्मेदारी दी जा सकती है, इसका भी अंतिम फैसला पीएम मोदी ही करेंगे।
मोदी के सीधे दखल और उनके दिशा निर्देश में बन रही रणनीति में वसुंधरा कहां फिट होती है यह देखना बाकी है लेकिन सीधे मोदी के कमान संभालने के बाद राजस्थान के अन्य नेता जीत तय मानकर चल रहे हैं। लेकिन यह भी सच है कि कर्नाटक में भी प्रचार अभियान की कमान मोदी ने ही संभाल रखी थी, फिर भी भाजपा को कांग्रेस के हाथों बेहद शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे में प्रदेश के नेताओं को दरकिनार करके सीधे मोदी की देख-रेख में प्रदेश में चुनाव की रणनीति बनाने का प्रयोग सफल होता है या नहीं, यह तो आने वाला समय ही बताएगा।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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