Rajasthan Politics: गहलोत के फैलाए जाल से कैसे निपटेंगे मोदी और राहुल
अपनी सरकार बचाने का श्रेय वसुंधरा राजे को देकर गहलोत अमित शाह को यह संदेश देना चाहते हैं कि 2020 में उनकी योजना को वसुंधरा राजे ने पलीता लगाया था।

Rajasthan Politics: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिर साबित किया कि भारतीय जनता पार्टी बारह महीने चौबीस घंटे इलेक्शन मोड में ही रहती है| कर्नाटक के चुनाव प्रचार से फारिग हो कर नरेंद्र मोदी सीधे राजस्थान पहुंच गए| उन्होंने पहले से ही राजस्थान से चुनाव अभियान शुरू करने का शेड्यूल बना रखा था| आठ मई को कर्नाटक में चुनाव प्रचार बंद हुआ, दस मई को उधर वोटिंग हो रही थी, और इधर राजस्थान के प्रसिद्ध नाथद्वारा मन्दिर में पूजा अर्चना करके चुनाव प्रचार का श्रीगणेश कर दिया| फिर सिरोही जिले के आबू रोड में 5500 करोड़ की केन्द्रीय योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया| बाद में माऊंट आबू में ब्रह्मकुमारियों के मुख्यालय भी गए|

इस मामले में राहुल गांधी भी पीछे नहीं रहे| कर्नाटक में चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद उन्होंने प्रचार का नया तरीका निकाला| वह बेंगलूरू की लोकल बस पर चढ़ कर यात्रियों से बातचीत करने लगे, यूनिवर्सिटी में जाकर छात्रों से मिले और डिलीवरी ब्वायज के साथ बैठ कर लंच किया| उन्हें पता है कि कांग्रेस की जमीन उजड़ चुकी है, और जमीन पर उतर कर ही जमीन को फिर से सींचा जा सकता है| राजस्थान पहुंचने में वह नरेंद्र मोदी से भी आगे निकल गए, वह 9 मई को ही माउंट आबू पहुंच गए थे, जहां दस दिन से कांग्रेस का सर्वोदय संगम शिविर चल रहा था|
लेकिन नरेद्र मोदी और राहुल गांधी के राजस्थान पहुंचने से दो दिन पहले ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इतना रायता फैला दिया है कि दोनों को इस रायते को समेटने में कई दिन लग जाएंगे| अशोक गहलोत ने दोधारी तलवार म्यान से निकाल कर कांग्रेस और भाजपा दोनों पार्टियों पर चला दी है| वसुंधरा राजे के चुनाव क्षेत्र धौलपुर में उन्होंने ऐसा राजनीतिक बम फोड़ा है कि सचिन पायलट और वसुंधरा राजे लहूलुहान हुए पड़े हैं| ये दोनों अशोक गहलोत के राजनीतिक विरोधी हैं| दोनों की निगाह मुख्यमंत्री की कुर्सी पर है| एक कांग्रेस में है और दूसरा भाजपा में|
अशोक गहलोत ने ऐसा बम फोड़ा है कि दोनों के आशियाने में आग लग गई है| सचिन पायलट पांच साल से मुख्यमंत्री पद के लिए भागदौड़ कर रहे थे, लेकिन अशोक गहलोत ने उनकी दाल नहीं गलने दी| अशोक गहलोत ने कहा कि 2020 में जब सचिन पायलट समेत कांग्रेस के 19 विधायकों को भाजपा ने खरीद लिया था, तब वसुंधरा राजे, कैलाश मेघवाल और शोभा रानी कुशवाहा ने उनकी सरकार बचाई| इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सचिन पायलट के 19 विधायकों ने भाजपा से 10-10 करोड़ रुपया लिया था, वह भी अभी तक भाजपा को वापस नहीं लौटाया, उन्हें वह पैसा वापस लौटाना चाहिए था|
अब अशोक गहलोत के इस बयान के मतलब समझिए| इसका पहला मतलब यह है कि उन्होंने सचिन पायलट को पार्टी छोड़ कर चले जाने के लिए उकसाया है| दूसरा मतलब यह है कि 2020 में सचिन पायलट के साथ बगावत करने वाले 18 विधायकों का टिकट कटवाने की भूमिका तैयार कर ली है| वह टिकट वितरण कमेटी के सामने यह बात रखेंगे कि जिन कांग्रेसी विधायकों ने भाजपा से एडवांस लिया हुआ है, वे त्रिशंकु विधानसभा आने की सूरत में भाजपा की सरकार बनवा देंगे, इसलिए उन सभी का टिकट काटा जाए|
राजस्थान में पिछले 40 साल में कई बार किसी एक पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, सरकार बनाने के लिए पांच दस विधायकों का जुगाड़ करना ही पड़ता है| वह जिन 19 विधायकों की बात कर रहे हैं, उनमें से दो तो उनकी सरकार में अभी मंत्री है| सचिन पायलट गहलोत के इस बयान से तिलमिला उठे हैं। उन्होंने कहा है कि उन्हें बार बार अपमानित किया जा रहा है| कभी गद्दार कहा गया, कभी कोरोना कहा गया| अब अशोक गहलोत अपनी ही पार्टी के विधायकों को बदनाम कर रहे है| इतना ही नहीं उन्होंने अशोक गहलोत पर भष्टाचार के आरोप भी लगाए और यह भी कहा कि पैसों की राजनीति करते हैं, उन्हें पैसा ही दिखाई देता है|
पत्रकारों के साथ बातचात करते समय उनके हाव भाव बता रहे थे कि इस बार वह आर पार के मूड में आ गए हैं| ठीक इसी तरह के तेवर उनके पिता राजेश पायलट भी सोनिया गांधी को दिखाया करते थे| राजेश पायलट कांग्रेस को परिवारवाद से मुक्त करवाना चाहते थे| वह शरद पवार के साथ कांग्रेस से बाहर तो नहीं गये, लेकिन उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में सोनिया गांधी को चुनौती दी थी| हालांकि वह खुद मैदान से हट गए थे, लेकिन उन्होंने जितेन्द्र प्रसाद को समर्थन दिया था, जिन्होंने सोनिया गांधी को टक्कर दी थी|
हालांकि जितेन्द्र प्रसाद चुनाव हारने के बाद भी कांग्रेस में बने रहे थे, लेकिन उनका बेटा जितिन प्रसाद कई साल राहुल गांधी के करीब रहने के बाद पिछले साल भाजपा में शामिल हो चुका है| जितेन्द्र प्रसाद की तरह राजेश पायलट ने भी कभी कांग्रेस नहीं छोडी थी, लेकिन उनके बेटे सचिन पायलट के सब्र का प्याला भर गया है| वह कांग्रेस छोड़कर नई पार्टी बना सकते हैं और उसके बाद अरविन्द केजरीवाल, मायावती और हनुमान बेनीवाल के साथ मिल कर तीसरा मोर्चा खड़ा कर सकते हैं|
अब वसुंधरा राजे की बात कर लेते हैं| यह गहलोत के बयान का तीसरा मकसद है| अगर भाजपा वसुंधरा राजे को मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट करके चुनाव लड़ती है, तो भाजपा की जीत पक्की मानी जा रही है| इसलिए वह भाजपा आलाकमान की नजरों में वसुंधरा की इमेज खराब करना चाहते हैं, ताकि भाजपा उन्हें प्रोजेक्ट न करे|
अशोक गहलोत 2020 में ही सोनिया गांधी, राहुल गांधी और केसी वेणुगोपाल को बता चुके थे कि अमित शाह, धर्मेन्द्र प्रधान और गजेन्द्र सिंह शेखावत ने सचिन पायलट के साथ मिल कर उनका तख्ता पलट करने की साजिश रची थी| यह बात उन्होंने सार्वजनिक तौर पर भी कई बार कही है| ये तीनों मोदी केबिनेट के सदस्य ही नहीं, बल्कि कर्नाटक, मध्यप्रदेश और गोवा में आपरेशन कमल के आर्किटेक्ट थे|
राजस्थान में भी वे वसुंधरा राजे का पत्ता काट कर गजेन्द्र सिंह शेखावत या सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनवाना चाहते थे, ताकि वसुंधरा राजे का पत्ता ही कट जाए| यह खबर सचिन पायलट की बगावत के समय भी राजस्थान के राजनीतिक गलियारों में चलाई गयी थी कि वसुंधरा राजे कैम्प के भाजपा विधायकों ने गहलोत की सरकार बचाने में मदद की| हालांकि सच यह है कि सचिन पायलट 19 से आगे नहीं बढ़ पाए थे और अशोक गहलोत के पास बहुमत बना हुआ था|
अब वसुंधरा राजे को सरकार बचाने का श्रेय देकर गहलोत अमित शाह को यह संदेश देना चाहते हैं कि 2020 में उनकी योजना को वसुंधरा राजे ने पलीता लगाया था| अब अगर मोदी और अमित शाह उनकी इस बात के बाद वसुंधरा राजे को मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट नहीं करते हैं, तो अशोक गहलोत का रास्ता काफी आसान हो जाएगा| इसलिए अशोक गहलोत ने अपनी दोधारी तलवार को चारों तरफ घुमाकर अपने दोनों विरोधियों को लहूलुहान कर दिया है|
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सचिन पायलट और वसुंधरा राजे दोनों ही इतने ज्यादा तिलमिलाए हुए हैं कि अशोक गहलोत को झूठा और बेईमान कह रहे हैं| वसुंधरा राजे गहलोत के बयान का मतलब समझती हैं, इसलिए उनकी पहली प्रतिक्रिया यह आई कि यह उनके खिलाफ साजिश है| गजेन्द्र सिंह शेखावत ने भी गहलोत को झूठा कहा है| अब महत्त्वपूर्ण सवाल यह है कि मोदी और शाह का पहला लक्ष्य चुनाव जीतना होगा या वसुंधरा राजे को ठिकाने लगाना|
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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