Opposition Allegations: 2019 वाली गलती दोहरा रहे हैं राहुल और केजरीवाल
राहुल गांधी और केजरीवाल को एक बात समझ लेनी चाहिए कि सिर्फ आरोप लगाने से राजनीति नहीं चलती। बेबुनियाद आरोपों से विपक्ष के वोटों में कोई बढ़ोतरी नहीं होती है, यह बात 2019 के चुनावों ने साबित कर दी थी।

Opposition Allegations: अब अरविन्द केजरीवाल और राहुल गांधी दोनों ने आरोप लगाया है कि अडानी की कंपनियों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पैसा लगा हुआ है| हालांकि दोनों तय नहीं कर पा रहे कि वे कितना पैसा कहें। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह आजकल कांग्रेस की मीटिंगों में जा रहे हैं। उन्हें चाहिए था कि वह राहुल गांधी के साथ बैठ कर तय कर लेते कि कितना पैसा कहना है| संसद से अपनी बर्खास्तगी के बाद बुलाई प्रेस कांफ्रेंस में राहुल गांधी ने कहा था कि मोदी का 20 हजार करोड़ रुपया अडानी की कंपनी में लगा है| लेकिन संजय सिंह ने अपनी प्रेस कांफ्रेंस में यह राशि 42 हजार करोड़ रूपए बताई है|

हो सकता है कि नरेंद्र मोदी अदालत में राहुल गांधी और संजय सिंह पर मानहानि का केस दायर करें| अरविन्द केजरीवाल ने इसी तरह के आरोप दिल्ली विधानसभा में लगाए हैं| अदालतों में लगातार मार खाने वाले अरविन्द केजरीवाल अब थोड़ा सा सयाने हुए हैं। वह बाहर जुबान खोलते समय जरा डरते हैं, इसलिए उन्हें जो भी आरोप लगाना होता है, वह विधानसभा बुला लेते हैं, और वहां राजनीतिक आरोप लगा देते हैं, क्योंकि विधानसभा में लगाए गए आरोप को किसी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती| विधानसभा का जितना राजनीतिक इस्तेमाल केजरीवाल ने किया है, उतना कभी किसी मुख्यमंत्री ने नहीं किया होगा| यही फार्मूला इस बार राहुल गांधी ने भी लोकसभा में अडानी का नाम लेकर मोदी पर आरोप लगाने के लिए अपनाया था|
अरविन्द केजरीवाल ने शायद ही किसी पार्टी का कोई बड़ा नेता छोड़ा हो, जिस पर उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोप नहीं लगाए हों| और शायद ही ऐसा कोई बड़ा नेता बचा हो, जिससे कोर्ट में उन्होंने माफी नहीं मांगी हो| वह आजतक मानहानि का एक भी केस नहीं जीते, यहाँ तक कि नरेंद्र मोदी की डिग्री मांगने वाला केस भी हार गए| हाईकोर्ट ने मोदी की डिग्री पर बिना वजह का बखेड़ा करने वाले अरविन्द केजरीवाल पर 25 हजार रूपए का जुर्माना ठोक दिया है| इस पर आम आदमी पार्टी के नेताओं ने हाईकोर्ट के फैसले पर आपत्तिजनक टिप्पणी की है| अरविन्द केजरीवाल ने खुद पहले ट्विट लिख कर हाईकोर्ट पर आपत्तिजनक टिप्पणी की है, बाद में प्रेस कांफ्रेंस करके उनके कई भाषणों का जिक्र करते हुए उन्हें फिर से अनपढ़ कहा|
अपनी प्रेस कांफ्रेंस में अरविन्द केजरीवाल ने ऐसी ऐसी बातें कहीं हैं कि उनका यहां उल्लेख करना भी शोभा नहीं देता| संजय सिंह ने बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अदालत पर आरोप लगाया कि केजरीवाल तो केस में पार्टी ही नहीं थे, हाईकोर्ट ने उन पर जुर्माना कैसे कर दिया| लेकिन यह कहानी शुरू होती है सात साल पहले, जब अरविन्द केजरीवाल ने खुद मोदी की डिग्री को लेकर आरटीआई लगाई थी| केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने दिल्ली विश्वविद्यालय और गुजरात विश्वविद्यालय को आदेश जारी करके मांगी गई जानकारी केजरीवाल को देने को कहा था|
इसके जवाब में गुजरात यूनिवर्सिटी ने बताया था कि मोदी ने डिस्टेंस एजूकेशन से एमए की डिग्री ली है| इस पर केजरीवाल ने डिग्री की कॉपी मांगी| जबकि कोई भी विश्वविद्यालय किसी अन्य की डिग्री नहीं देता है| इसलिए गुजरात विश्वविद्यालय ने सीआईसी के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी| हालांकि यह मामला यहीं पर खत्म नहीं हुआ है, मोदी की बीए की डिग्री को लेकर भी दिल्ली हाईकोर्ट में मामला लंबित है, 3 मई को उस पर सुनवाई होने वाली है| अपनी प्रेस कांफ्रेंस में अरविन्द केजरीवाल ने फिर से दिल्ली विश्वविद्यालय पर भी सवाल उठाया है|
अरविन्द केजरीवाल बार बार खुद को पढ़ा लिखा बताने के लिए मोदी को डिग्री दिखाने के लिए कह रहे हैं, वह यह भी कहते हैं कि अनपढ़ होने के कारण मोदी गलत फैसले ले रहे हैं, जिस कारण देश का विकास रूक गया है| उनकी यही दलील उनके खिलाफ जा रही है, क्योंकि पिछले नौ साल में भारत ने विभिन्न क्षेत्रों में प्रभावी विकास किया है, और दुनिया भर में भारत की प्रतिष्ठा में वृद्धि हुई है। इसलिए उनकी इन बातों का जनता पर कोई असर नहीं हो रहा, बल्कि वह खुद हंसी का पात्र बन रहे हैं|
वैसे सांसद और विधायक बनने के लिए भी न्यूनतम शिक्षा का कोई प्रावाधान नहीं है, क्योंकि कोई भी समाज सेवा के लिए आगे आ सकता है और समाज में अपने कामों से हासिल लोकप्रियता से चुनाव जीत सकता है| सांसद, विधायक और प्रधानमंत्री का चुनाव जनता करती है, कोई विश्वविद्यालय नहीं करता| विश्वविद्यालय कार्यपालिका और न्यायपालिका तैयार करती है| खुद को ज्यादा पढ़ा लिखा बताने वाले केजरीवाल को शायद पता होगा कि जिन अन्ना हजारे के कंधों पर सवार हो कर वह मुख्यमंत्री बन बैठे हैं, वह सिर्फ छठी क्लास पास हैं। 17 साल तक देश की प्रधानमंत्री रही इंदिरा गांधी बारहवीं पास थी।
चूंकि राहुल गांधी के सलाहकार भी वामपंथी बुद्धिजीवी ही हैं तो उन्होंने भी झूठे आरोप लगाना ही राजनीति में सफलता का मार्ग समझ लिया है| लेकिन राहुल गांधी की गलती यह है कि उन्होंने केजरीवाल से आरोप लगाना तो सीख लिया, माफी मांगना नहीं सीखा| खुद को गांधी और माफी मांगने वालों को सावरकर कहने वाले राहुल गांधी ने अब वीर सावरकर पर ट्विटर में की गई सारी टिप्पणियाँ हटा ली हैं| जैसे ही उद्धव ठाकरे और शरद पवार ने आँख दिखाई, उन्होंने सावरकर का नाम लेने से तौबा कर ली|
अरविन्द केजरीवाल आज तक मानहानि का एक भी केस नहीं जीते, यही हाल राहुल गांधी का होने वाला है। मानहानि के एक केस में वह सजायाफ्ता हो चुके हैं, अभी उन पर कम से कम दस केस और चल रहे हैं| एक केस तो सुशील मोदी का बिहार में चल रहा है, जिसकी सुनवाई करीब करीब पूरी हो चुकी है, फैसला आना बाकी है| दो और बड़े केस दाखिल होने वाले हैं, दोनों केस "मोदी चोर" वाले केसों से ज्यादा मजबूत होंगे|
एक केस वीर सावरकर के पोते रंजीत सावरकर दाखिल कर रहे हैं, तो दूसरा केस ललित मोदी लन्दन में दाखिल कर रहे हैं| ललित मोदी का केस बहुत मजबूत होने वाला है, क्योंकि जिस बयान पर राहुल गांधी को दो साल की सजा हुई है, उसी भाषण में राहुल गांधी ने बाकायदा उनका नाम लिया था| ललित मोदी की धमकी भी बहुत बड़ी है, उन्होंने कहा है कि वह खुलासा करेंगे कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने देश से बाहर कहां कहां संपत्ति बना रखी है|
राहुल गांधी और केजरीवाल को एक बात समझ लेनी चाहिए कि सिर्फ आरोप लगाने से राजनीति नहीं चलती। देश में हर क्षेत्र में झूठ फैलाने वाले वामपंथी आज हाशिए पर पड़े हैं। अब उन्होंने राहुल को नचाना शुरू कर दिया है। लेकिन जब तक देश का जनमत मोदी के साथ है, तब तक झूठे आरोप लगा देने से राहुल की राजनीति नहीं चमकने वाली। इसमें न तो अमेरिका राहुल की कुछ मदद कर सकता है, न जर्मनी, न कांग्रेस को फंडिंग करने वाला जार्ज सोरोस, न केजरीवाल को फंडिंग करने वाली फोर्ड फाउंडेशन। बेबुनियाद आरोपों से विपक्ष के वोटों में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी, यह बात 2019 के चुनावों ने साबित कर दी थी| पता नहीं राहुल गांधी और केजरीवाल 2019 वाली गलती ही दुबारा क्यों दोहरा रहे हैं?
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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