Amritpal Singh Hunt: कैसे शुरु हुआ 'ऑपरेशन अमृतपाल?'
आखिर ऐसा क्या हुआ कि 23 फरवरी को अमृतपाल के सामने घुटने टेक चुकी पंजाब पुलिस ने 23 दिन बाद 18 मार्च को उसे भगोड़ा घोषित करके उसे पकड़ने की जोरदार मुहिम शुरु कर दी?

Amritpal Singh Hunt: 23 फरवरी को अमृतसर के अजनाला पुलिस थाने पर हमला कर अपने साथी को छुड़ाने वाला 'वारिस पंजाब दे' संगठन का प्रमुख अमृतपाल सिंह इस घटना के 24 दिन बाद पुलिस से बचने के लिए भागता फिर रहा है। पंजाब पुलिस ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया है और पंजाब की सीमा को सील कर उसको पकड़ने के लिए जगह जगह छापे मार रही है।
दरअसल 23 फरवरी की घटना के बाद जहां पंजाब पुलिस मामले को रफा दफा मान कर इसे भूलने का प्रयास कर रही थी, वहीं 24 फरवरी को देर रात दिल्ली में एनएसए अजीत डोभाल और गृहमंत्री अमित शाह के बीच एक बैठक हुई। इस बैठक के बाद 25 फरवरी की सुबह 7 बजे गृह मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों के साथ एनएसए अजीत डोभाल ने एक खास मीटिंग की। इसी बैठक में अजीत डोभाल द्वारा पंजाब सरकार से मामले की जानकारी लेने और इस मामले पर आगे कार्यवाही करने की रणनीति बनाने का निर्देश दिया गया।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मिले निर्देश के बाद केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने पंजाब पुलिस को खालिस्तान समर्थक अमृतपाल को पकड़ने के लिए 'ऑपरेशन अमृतपाल' तैयार करने को कहा। अमृतपाल को पकड़ने पर पंजाब में कानून व्यवस्था बिगड़ने की शंका जाहिर कर रही पंजाब पुलिस को केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने भरोसा दिलाया कि केन्द्र सरकार उनके साथ है और सभी आवश्यक सहयोग पंजाब सरकार के मांगने पर तत्काल उपलब्ध कराया जाएगा।
केन्द्र से मिले आश्वासन के बाद पंजाब पुलिस ने 12 दिन अमृतपाल को गिरफ्तार करने की प्लानिंग में लगाए। पंजाब पुलिस के सीनियर अफसरों और केन्द्रीय गृह मंत्रालय के बीच लगातार संवाद और संपर्क बना रहा। पंजाब पुलिस की तैयारी पुख्ता होने के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर पूरी जानकारी दी। इस बैठक के बाद केंद्रीय सुरक्षा बलों की 10 कंपनियों को पंजाब भेजने का फैसला हुआ।
इसके बाद पंजाब के आला अधिकारियों जिसमें चीफ सेक्रेटरी, होम सेक्रेटरी, लॉ एंड ऑर्डर, इंटेलिजेंस चीफ, काउंटर इंटेलिजेंस के एडीजीपी ने जॉइंट मीटिंग की। इनके बीच करीब 8 मीटिंग्स हुई, जिसके बाद 'ऑपरेशन अमृतपाल' को अंतिम रूप देकर 18 मार्च को अमृतपाल पर हाथ डालने की तारीख तय हुई। लेकिन पुलिस उसे गिरफ्तार करती इससे पहले वह भाग निकला।
ऑपरेशन अमृतपाल 18 मार्च को ही क्योंं?
केन्द्रीय गृह मंत्रालय द्वारा पंजाब पुलिस से ऑपरेशन अमृतपाल को अंजाम देने के लिए 18 मार्च की तारीख तय करने के पीछे दो कारण थे। पहला कारण, अमृतपाल का खालसा वहीर प्रोग्राम जिसे मुक्तसर में रोका गया था उसे वह 19 मार्च से फिर शुरु करने जा रहा था। पुलिस अगर इससे पहले एक्शन न लेती तो फिर वहां बड़ी संख्या में समर्थक जमा होने से हालात बिगड़ सकते थे। इसलिए पुलिस के लिए 19 मार्च से पहले अमृतपाल पर कार्रवाई करना जरूरी था।
दूसरा कारण यह था कि पंजाब में जी20 की बैठक चल रही थी। इसकी मुख्य मीटिंग अमृतसर में 17 मार्च को होनी थी। केन्द्रीय गृह मंत्रालय नहीं चाहता था कि इस बैठक के दौरान पंजाब में कोई उपद्रव हो। इस कारण 17 मार्च को जी20 की बैठक के खत्म होने का इंतजार किया गया और उसके अगले ही दिन 18 मार्च को पुलिस ने अमृतपाल को गिरफतार करने के लिए अपना आपरेशन शुरू कर दिया।
कौन है यह अमृतपाल और कैसे उसने इतना असर पैदा किया?
पंजाब के पंथिक दायरे में अमृतपाल का उभार किसी धूमकेतु की तरह हुआ। उसकी पैदाइश अमृतसर के बाबा बकाला तहसील के गांव जल्लुपुर-खेड़ा की है। पंजाब के मांझा इलाके में पड़ने वाला यह गांव '80 और 90 के दशक की खाड़कू लहर में काफी चर्चित था। कपूरथला के लॉर्ड कृष्णा कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा हासिल करने के बाद अमृतपाल दुबई चला गया। लेकिन 26 जनवरी, 2021 को किसान आंदोलन के दौरान लाल किले पर निशान साहेब फहराने की घटना के बाद दीप सिद्धू पर चौतरफा हमले हो रहे थे। उस समय अमृतपाल ने फेसबुक पर लाइव वीडियो करके दीप सिद्धू का बचाव किया।
इस बीच, फरवरी 2022 में दीप सिद्धू की एक कार दुर्घटना में मौत हो गई। दीप सिद्धू के मौत के बाद संगठन का प्रमुख चुनने के लिए एक बैठक हुई। इस बैठक में अमृतपाल सहित 15 लोग शामिल थे। इस बैठक में दीप के साथी रहे गुरसेवक सिंह भाना, अवतार सिंह खंडा, बसंत सिंह, दलजीत कलसी, हुस्नदीप सिंह और जगदीप सरपंच जैसे लोगों ने अमृतपाल को इस संगठन की कमान लेने की पेशकश की।
29 सितंबर, 2022 को खालिस्तानी आंदोलन के केंद्र में रहे जरनैल सिंह भिंडरांवाले के पैतृक गांव रोडे में भिंडरावाले की याद में बने 'गुरुद्वारा संत खालसा' में 'वारिस पंजाब दे' के नए जत्थेदार के तौर पर उसकी दस्तारबंदी हुई। उस वक्त भिंडरावाले के भतीजे जसबीर सिंह रोडे ने कहा, "यह 'वारिस पंजाब दे' जत्थेबंदी के नए जत्थेदार भाई अमृतपाल सिंह की दस्तारबंदी है।" जसबीर सिंह रोडे को यह स्पष्टीकरण देने की जरूरत क्यों आन पड़ी?
दरअसल, पूरे कार्यक्रम को कुछ इस तरह से डिजाइन किया गया था कि अमृतपाल सिंह को नए भिंडरांवाले के तौर पर पेश किया जा सके। इस जत्थेबंदी का रोडे गांव से कोई सीधा संबंध नहीं था। फिर भी रोडे गांव में दस्तारबंदी का कुछ खास मतलब था। हालांकि उसी कार्यक्रम में अमृतपाल सिंह ने साफ किया कि, "मैं संतों (भिंडरांवाले) के पैरों की धूल के बराबर भी नहीं हूं। मैं उनके दिखाए रास्ते पर चलने की कोशिश करूंगा।"
असल में पंजाब को लेकर केन्द्र सरकार के कान उस समय ही खड़े हो गए थे जब पिछले साल जून में खालिस्तान समर्थक सिमरनजीत मान ने संगरूर संसदीय सीट पर उपचुनाव जीतकर सबको चौका दिया था। उसी महीने एक अन्य खलिस्तान समर्थक समूह ने विवादास्पद आपरेशन ब्लू स्टार की 38 वीं बरसी मनाने के लिए अमृतसर में 'आजादी मार्च' निकाला।
इसके बाद पंजाब में लगातार खालिस्तान समर्थन को लेकर भीतर ही भीतर आग सुलगाने की कोशिश की जा रही थी। इस पर केन्द्र सरकार की पूरी नजर थी। इसके बाद 23 फरवरीे को खलिस्तान समर्थक और 'वारिस पंजाब दे' संगठन के प्रमुख अमृतपाल सिंह संधू और उसके समर्थकों ने पाकिस्तान सीमा से सटे अजनाला कस्बे में एक पुलिस थाने का घेराव कर अपने सहयोगी लवप्रीत सिंह तूफान को छुड़वा लिया था।
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पंजाब पुलिस का कहना है कि अभी तक की जांच से पता चला है कि अमृतपाल का संपर्क अवतार सिंह खंडा के साथ भी है। अवतार सिंह खंडा पाकिस्तान में छिपकर बैठे बब्बर खालसा के प्रमुख परमजीत सिंह पम्पा का खास है और बब्बर खालसा (UK) को संचालित करता है। केन्द्रीय एजेसियों को मिले इनपुट के अनुसार अमृतपाल 'प्रोजेक्ट के2' पर काम कर रहा है, जिसके तहत पंजाब में फिर से खालिस्तान मूवमेंट खड़ा करने की योजना है।
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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