Pakistani Journalists: पत्रकारों के लिए कसाईखाना बना पाकिस्तान

Pakistani Journalists: पाकिस्तान के एक पत्रकार और यू ट्यूबर इमरान रियाज को इसी साल 16 मई को अगवा किया गया था। किसने अपहरण किया, कहां रखा, उनके साथ क्या किया किसी को चार महीने तक कुछ नहीं पता चला। यहां तक कि प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और रक्षा मंत्री को भी जानकारी नहीं मिल रही थी। कोर्ट पुलिस को चेतावनी पर चेतावनी देती रही, पर पुलिस हर बार पता करने की हामी भर कर घर लौट जाती थी। आखिरकार 25 सितंबर को इमरान रियाज बरामद हुए। किसी ने उन्हें सियालकोट के सरकारी अस्पताल में फेंक दिया था।

शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह से टूट चुके इमरान रियाज का दोष सिर्फ इतना है कि वह इमरान खान की मोहब्बत में जज्बाती हैं और उनके समर्थन में वह फौज और बाकी जमातों के लिए कुछ भी कहने से गुरेज नहीं करते थे। इमरान रियाज गायब होने या मार दिए जाने वाले पत्रकारों की सूची में अकेले नाम नहीं हैं, पाकिस्तान में ऐसा होना आम बात है।

Pakistani Journalists: Pakistan became a slaughterhouse for journalists

यह सुनने में कम हास्यास्पद नहीं है कि मीडिया एवं प्रेस की स्वतंत्रता के पाकिस्तान की रैंकिंग भारत से बेहतर है। रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर नाम की संस्था ने इसी साल मई में पाकिस्तान की रैंकिग में 7 अंकों का सुधार करते हुए 180 देशों की सूची में उसे 150वीं रैंकिग दी थी, जबकि इसी संस्था ने भारत को तब 161वीं रैंकिंग दी थी। भारत और पाकिस्तान के मीडिया की तुलना करने वाली रैंकिंग संस्था को पता नहीं क्यों भारत से भी अच्छा पाकिस्तान के हालात दिखे। कुछ उदाहरण और भी हैं जो यह आकलन करने के लिए काफी हैं कि पाकिस्तान में मीडिया की क्या स्थिति है।

पाकिस्तान के टीवी पत्रकार और विश्लेषक शमी इब्रहिम को कुछ नकाबपोशों ने 26 मई को अगवा कर लिया था। वह बोल टीवी के स्टूडियो से अपने घर जा रहे थे। शमी भी इमरान के समर्थक और सेना के आलोचक पत्रकार रहे हैं। हालांकि शमी को दो दिन बाद ही घर जाने दिया गया, लेकिन उनकी रिहाई में उनका अमेरिकी ग्रीनकार्ड होल्डर होना भी कारण रहा। शमी को भी शारीरिक और मानसिक यातना देने के बाद ही छोड़ा गया और छूटने के बाद उन्हें भी अस्पताल में अपना इलाज कराना पड़ा।

अरशद शरीफ पाकिस्तान के उन पत्रकारों में थे, जिनकी अपनी बहुत बड़ी फैन फाॅलोइंग थी। अप्रैल 2022 में इमरान खान की सरकार गिरने के बाद अरशद फौज के खिलाफ बोलने और लिखने वाले पत्रकारों में सबसे आगे थे। पहले तो उन पर कई फर्जी मुकदमे लादे गए। उन्हें चारों ओर से परेशान किया जाने लगा। फिर उन्हें इस तरह से डराया गया कि वह मुल्क छोड़ दें। उनके पाकिस्तान छोड़ने में मदद करने वाले भी फौज के ही लोग थे।

अपनी जान बचाने के लिए अरशद शरीफ पाकिस्तान से दुबई और दुबई से केन्या भाग गये। पर अक्टूबर 2022 में केन्या में ही उनका कत्ल हो गया। कहा गया कि केन्या पुलिस ने गलत पहचान के कारण उन पर गोली चला दी थी। पाकिस्तान में कहने को इस हत्याकांड की जांच हो रही है, पर केन्या जाकर इसकी जांच करने वाली पाकिस्तान की एजेंसी का ही कहना है कि अरशद की हत्या सोची समझी साजिश के तहत की गई।

जुलाई 2020 में एक और मशहूर पत्रकार मतीउल्ला जान को इस्लामाबाद में उनके घर के पास एक स्कूल के सामने से उठा लिया गया था। मतीउल्ला भी फौज के राजनीति में हस्तक्षेप के आलोचक रहे हैं। तब पाकिस्तान में इमरान खान की ही सरकार थी। बहरहाल उन्हें दो दिन बाद चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। लेकिन उनके अपहरण की खबर पूरी दुनिया तक पहुंच गई।

बलोचिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ता और पत्रकार आबिद मीर को इसी साल 8 मार्च को इस्लामाबाद के एक एटीएम के बाहर से अगवा कर लिया गया। जब पाकिस्तान के पत्रकारों के फोरम ने उनके अपहरण का मामला उठाया तो अगले दिन आबिद मीर को रात में छोड़ दिया गया। मजे की बात है कि इस्लामाबाद पुलिस ने उनके अपहरण से साफ इंकार कर दिया और कहा कि चूंकि मीर का अपने परिवार से संपर्क नहीं हो रहा था, इसलिए यह धारणा बनी कि उनका अपहरण हो गया है।

पाकिस्तान में पत्रकारों का अपहरण करना, मारना पीटना और उन्हें नौकरी से निकलवा देना आये दिन की बात होती है। आकाओं के खिलाफ जाने वाले पत्रकारों को तो मौत की नींद सुला दिया जाता है। ग्लोबल प्रेस फ्रीडम की रिपोर्ट के अनुसार 1992 से लेकर 2023 तक पाकिस्तान में 97 पत्रकारों या मीडिया के लोगों की हत्या कर दी गई। अधिकतर मामलों में यह पता ही नहीं चलता कि आखिरकार हत्या की किसने?

सबसे ताजा घटना इसी साल 14 अगस्त की है, जब केटीएन न्यूज के ब्यूरो चीफ जान मोहम्मद महर को दक्षिण सिंध में सुकुर में दिन दहाड़े चार गोलियां मार कर हत्या कर दी गई। महर की हत्या से एक सप्ताह पहले ही सिंध के एक और पत्रकार गुलाम असगर को सिंध के अहमदपुर में गोली मार दी गई।

पातिस्तान में पत्रकारों के खिलाफ ज्यादती और दमन की घटनाएं पिछले एक साल में ज्यादा बढ़ गई हैं। फ्रीडम नेटवर्क ऑफ पाकिस्तान का कहना है कि मई 2022 से लेकर मार्च 2023 के दौरान ही पत्रकारों को धमकाने, उन पर हमला करने और उन्हें अगवा करने की 140 घटनाएं हो चुकी हैं। इसके विपरीत भारत में एक भी ऐसा मामला नहीं है, जिसमें किसी पत्रकार की हत्या, अपहरण या शारीरिक यातना में किसी सरकारी महकमे या अधिकारी की संलिप्तता हो।

2022 में 'राइट एंड रिस्क एनालिसिस ग्रुप' की रिपोर्ट के हवाले से 'द वायर' ने लिखा था कि '2022 में पूरे देश में 91 पत्रकारों के साथ आपराधिक किस्म की वारदातें हुईं, जिनमें सबसे अधिक पांच-पांच घटनाएं ओडिसा और उत्तर प्रदेश में हुईं। लेकिन सभी घटनाओं में गैर सरकारी लोग ही संलिप्त रहें। सात पत्रकार मारे भी गए।" रिपोर्ट में जो जानकारी दी गयी उसके अनुसार बिहार के पत्रकार सुभाष कुमार महतो की बालू माफियाओं ने हत्या कर दी। बाकी सभी की हत्या व्यक्तिगत रंजिश या दुश्मनी के कारण हुई। 41 पत्रकारों के खिलाफ दमनकारी वारदात जम्मू कश्मीर के आतंकवादियों, नक्सलवादियों और गैर सामाजिक एवं अपराधिक संगठनों ने की। 113 पत्रकारों के खिलाफ राज्य प्रशासन ने भी कार्रवाई की। 70 पत्रकारों को हिरासत में लिया गया। 14 के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।

इस अवधि के दौरान केवल चार पत्रकारों के खिलाफ पुलिस या ईडी ने सम्मन जारी किया। 15 पत्रकारों को सरकारी अधिकारी या पुलिस द्वारा शारीरिक हानि पहुंचाई गई। सबसे ज्यादा तेलंगाना सरकार ने 40 पत्रकारों को हिरासत में लिया या गिरफ्तार किया। उसके बाद उत्तर प्रदेश में छह पत्रकार हिरासत में लिए गए और 14 पत्रकारों के खिलाफ 124 ए के तहत देशद्रोह का मुकदमा दायर किया गया।

इस तरह देखें तो मीडिया के क्षेत्र में तुलनात्मक रूप से भारतीय प्रशासन अभिव्यक्ति की आजादी का पूरा सम्मान करता है। इस समय देश में सैकड़ों यूट्यूबर्स सरकार के खिलाफ बोलने और रिपोर्ट दिखाने में लगे हैं। कुछ तो पुराने वरिष्ठ पत्रकार भी हैं। सभी निर्बाध और निडर तरीके से न सिर्फ अपनी बात रखते हैं, बल्कि सरकार को कार्रवाई करने की चुनौती भी दे डालते हैं। जनता का एक वर्ग इन्हे पसंद भी करता है। लोकतंत्र का यही तकाजा है जो भारत में तो दिख रहा है लेकिन पाकिस्तान में कठिन दौर से गुजर रहा है। इसके बाद भी अगर कोई विदेशी एजेंसी पाकिस्तान में पत्रकारों की स्थिति भारत से बेहतर बतायेगी तो ऐसी रिपोर्ट पर भला कौन विश्वास करेगा?

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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