Operation Dost: भारत संकट में उनकी भी मदद करता है जो उसके लिए संकट पैदा करते हैं

वैश्विक मंचों पर कश्मीर के बारे में भड़काऊ बातें करने वाले तुर्की की मदद के लिए भारत का हाथ बढ़ाना वसुधैव कुटुंबकम के दर्शन को प्रस्तुत करता है। भारत संकट में उनकी भी मदद करता है जो उसके लिए संकट पैदा करते हैं।

Operation Dost by India help to turkey devastated by the earthquake

Operation Dost: तुर्की और सीरिया के कई इलाकों में 7.9 की तीव्रता वाले भूकंप की ख़बरों के आने के थोड़ी ही देर बाद भारत से भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में मदद भेजे जाने की ख़बरें आने लगीं। "ऑपरेशन दोस्त" नाम के इस अभियान में भारत की वायुसेना का सी17 ग्लोबमास्टर जहाज राहत सामग्री, राशन, दवाओं इत्यादि के साथ उड़ान भर चुका था। विदेशी मामलों के केन्द्रीय राज्य मंत्री वी मुरलीधरन का बयान भी फौरन आ गया जिसमें उन्होंने कहा कि हम संकट की इस घड़ी में तुर्की की हर संभव मदद करेंगे। ऐसा भी नहीं था कि ये सिर्फ जबानी जमा-खर्ची चल रही थी।

फ़िलहाल तुर्की में चार टीमें काम कर रही हैं जिसमें दो बचाव दल हैं, खोजी कुत्तों के दल हैं और दो मेडिकल टीम भी हैं। भारत ने तुर्की में एक फील्ड हॉस्पिटल भी बनाकर तैयार कर दिया है। ख़बरों और तस्वीरों में लगातार पीड़ित महिलाओं और बच्चों की मदद के वीडियो-चित्र भी आने शुरू हो गए हैं।

एनडीआरएफ के तीन बचाव दल और मेडिकल सहायता की टीमें अपना काम कर रही हैं। ये टीमें भी दवाओं, खोजी कुत्तों के दलों, कम्बल इत्यादि जरूरी चीजों और चार पहिया वाहनों से लैस हैं। तुर्की के राजदूत भारत द्वारा फ़ौरन दी गयी मदद के लिए आभार जता चुके हैं। इसी बीच इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान ने राहत सामग्री और मदद लेकर तुर्की की ओर जा रहे हवाई जहाजों को अपनी वायुसीमा से होकर जाने की इजाजत नहीं दी। घूमकर, लम्बी दूरी तय करके भारतीय जहाज तुर्की पहुंचे। गौर करने लायक ये भी है कि तुर्की नाटो (एनएटीओ) का सदस्य देश है, इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय कहलाने वाले संगठनों से वहां इतनी जल्दी मदद नहीं पहुंच पायी थी।

भारत के पक्ष से सोचकर देखें तो "वसुधैव कुटुम्बकम्" की अवधारणा के कारण संकट आते ही मदद के लिए निकल पड़ना भारतीय लोगों के लिए उतना विचित्र नहीं है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए ये घटना अवश्य विचित्र होगी। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तुर्की अक्सर भारत के विरुद्ध पाकिस्तान का समर्थन करता दिखा है। जैसा कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में दावा किया था - राष्ट्रों को बिना बदले में कोई अपेक्षा रखे चुनौतियों और आपदाओं के समय एक दूसरे से सहयोग एवं समन्वय के माध्यम से कोई हल ढूंढना चाहिए, बिलकुल वैसा ही किया गया।

लेकिन तुर्की के इस्लामिक नजरिए से सोचा जाए, तो ये आपदा भी अल्लाह का ही अजाब समझा जाएगा। इस्लामिक किताबों (कुरान और हदीस) में लिखा है कि जहां सूदखोरी बढ जाती है वहां जलजला आता है। संभवत: इस्लाम की इसी शिक्षा से प्रेरित होकर एर्दोगॉन ने तुर्की में ब्याज दरें घटा दीं क्योंकि वो भी सरकार की सूदखोरी को हराम मानते हैं। वहां सरकार ने ब्याज की दरें 19 फीसदी से घटाकर सीधे 9 प्रतिशत कर दी। इससे जलजला तो रुका नहीं लेकिन तुर्की की मुद्रा धड़ाम से नीचे गिर गयी।

पिछले वर्ष 2022 में तुर्की की मुद्रा में गिरावट जारी रही और यह डॉलर के मुकाबले 30 प्रतिशत कमजोर हुई। मुद्रास्फीति यानी महंगाई के बढ़ने की दर पहले ही वहां 85 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। इसकी वजह से तेल, भोजन सामग्री और दूसरी जरूरी चीजों के मूल्य भी आसमान छू रहे हैं। तुर्की की नीतियां सिर्फ आर्थिक मामलों में ही विफल नहीं रही हैं। मजहबी कट्टरपंथ की ओर अग्रसर देश की विदेश नीति भी असफल रही है। एर्दोगान ने पड़ोसी देश सीरिया में असद की सरकार को गिराने की भी कोशिश की थी। सीरिया में गृहयुद्ध जैसे हालात हुए तो लगभग 25 करोड़ (3.5 मिलियन) सीरियाई शरणार्थियों को भी एर्दोगान ने तुर्की में शरण दी हुई थी जिससे तुर्की के आर्थिक स्रोतों पर असर पड़ा और तुर्की की जनता में भारी असंतोष फैला।

हाल के दौर में स्वीडन, फिनलैंड आदि देशों में कुरान को जलाए जाने की वजह से विवाद भड़का और तुर्की में भी फिनलैंड-स्वीडन इत्यादि के खिलाफ प्रदर्शन शुरु हो गये। ऐसे में नाटो की मदद में देरी होना आश्चर्यजनक नहीं। यूरोपीय देश भी इस भीषण आपदा में जिसमें 28 हजार से अधिक लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है, मदद के लिए ठिठक गये।

भारत के तुर्की से संबंधों की बात की जाए तो मध्यकाल से ही तुर्क भारत के लिए हमलावर रहे हैं। भारत में तुर्क हमले 1001 ई. में महमूद गजनवी के जिहाद से ही शुरू हो गये थे। गजनवी ने भारत पर 1000 ई. से 1027 ई. के बीच कई बार हमले किये। मंदिरों को तोड़ने का जो गजनवी का इतिहास था, उसी से प्रेरित होकर बाद में तालिबान ने बामियान में बुद्ध की मूर्तियां तोड़ी थीं। गजनवी के बाद उसके भांजे सलार मसूद ने भारत पर असफल आक्रमण किया और बहराइच की जंग में राजा सुहेलदेव राजभर के हाथों मारा गया। उसकी मजार बनाकर आज भी उस पर बहराइच में मेला लगता है। इस करारी हार के बाद कुछ समय तक तुर्क रुके मगर फिर मुहम्मद घोरी का दौर आया, और दिल्ली से हिन्दुओं के शासन का अंत हो गया।

यहां यह ध्यान देने लायक है कि एक समुदाय विशेष जहां ऐसी हार-जीत को सदियों याद रखता है, वहीं हिन्दुओं में बुरी बातों को भुला देने की परंपरा है। संभवतः यही कारण है कि जब "क्लैश ऑफ सिविलाइज़ेशन्स" जैसी पुस्तकों में सभ्यताओं के आपसी संघर्ष के बारे में लिखा जाता है, तो उसमें हिन्दुओं को संघर्षरत नहीं दिखाया जाता। इस विषय में ली कुआन यू का एक संस्मरण था जिसमें वो पीढ़ियों तक एक समुदाय के संघर्षरत रहने की बात करते हैं। साथ ही वो कहते हैं कि जो कौम अपनी अगली पीढ़ी को झगड़े-फसाद देकर जाती हो, वो भला सुखी कैसे हो सकती है?

Recommended Video

    Turkey Earthquake में 7 दिन से दबी थी बच्ची, Julie-Romeo ने खोज लिया | वनइंडिया हिंदी #Shorts

    श्री 'संगम' का लिखा हुआ 'सोमनाथ पर चढ़ाई' शीर्षक का एक लेख है जो 'समाज' (साप्ताहिक, काशी) में दिसम्बर 1947 में निकला था। इस व्यंग के अनेकों अंश बहुत ही सुन्दर थे इसलिए आचार्य रामचंद्र वर्मा ने लोकभारती प्रकाशन से आने वाली पुस्तक 'अच्छी हिन्दी' में इसका उदाहरण की तरह प्रयोग किया था। 'बनाइए नए सिरे से सोमनाथ का मंदिर! महमूद गजनवी की आंखों का कांटा बनिए।' 'गजनवी और गोरी को तैयारी करने दीजिए। आप पृथ्वीराज की भांति क्षमताशील बने रहिए।' और सबसे आखिर में सोमनाथ की चढाई में लिखे इस व्यंग को जरूर समझिए कि 'अपनी नीयत के पैमाने पर शत्रु की नीयत नापने की पुरानी परिपाटी न छोड़िए।' श्री संगम ने जो व्यंग किया है उसे समझकर अब नीयत में बदलाव लाने की जरूरत है। अब नयी परिपाटी भी शुरु होना जरूरी है जब संकट में मदद करने के बाद, दुश्मन को दोस्त कहते हुए भी उसकी नीयत पर नजर बनाकर रखना होगा।

    यह भी पढ़ें: Turkey Quake: भारत के रोमियो और जूली ने 6 साल की बच्ची को बचाया, जानें मलबे से कैसे खोजा मासूम को?

    (इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+