Turkey Quake: भारत के रोमियो और जूली ने 6 साल की बच्ची को बचाया, जानें मलबे से कैसे खोजा मासूम को?
तुर्की और सीरिया में आए विनाशकारी भूकंर से अभी तक 34 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और तुर्की की मदद के लिए भारत ऑपरेशन दोस्त चला रहा है।

Turkey Earthquake: तुर्की और सीरिया में आए विनाशकरी भूकंप में मरने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 34 हजार के आंकड़े को पार कर गई है और दुनिया के कई देश मिलकर तुर्की में राहत और बचाव अभियान चला रहे हैं। इंडियन एयरफोर्स और भारत की रेस्क्यू टीमें भी तुर्की में लगातार काम कर रही हैं और लोगों को बचाने में जुटी हुई हैं। वहीं, भारतीय रेस्क्यू टीम के दो जांबांज ऐसे हैं, जिनकी पूरी दुनिया में तारीफ हो रही हैं और उनके नाम हैं रोमियो और जूली, जिन्होंने भूकंप पीड़ितों को बचाने में काफी अहम भूमिका निभाई है।

तुर्की-सीरिया में भूकंप से तबाही
तुर्की और सीरिया में शक्तिशाली भूकंपों की श्रृंखला के बाद मौत के आंकड़े में अभी और इजाफा होने की आशंका है, जबकि अभी तक 34 हजार मौतों की पुष्टि की जा चुकी है। तुर्की आपातकालीन समन्वय केंद्र SAKOM ने रविवार को कहा है, कि तुर्की में मरने वालों की संख्या 29,605 तक पहुंच गई है। वहीं, सीरिया में मरने वालों की संख्या 4,574 होने की पुष्टि की गई है। साल्वेशन गवर्नमेंट गवर्नेंस अथॉरिटी के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी सीरिया में, जहां विद्रोहियों का कब्जा है, वहां ज्यादा तबाही मची है और अभी तक 3,160 लोगों की मौत की पुष्टि की गई है। इन इलाकों पर नजर रखने वाले एक्सपर्ट्स का मानना है, कि इन इलाकों में बर्बादी और भी ज्यादा फैली हुई है, क्योंकि यहां मदद सही तरीके से पहुंच नहीं पा रही है, लिहाजा मौते के आंकड़ों में जबरदस्त इजाफा हो सकता है। सरकारी समाचार एजेंसी सना के अनुसार, सीरिया में मरने वालों की संख्या में सीरिया के सरकारी नियंत्रण वाले हिस्सों में हुई 1,414 मौतें भी शामिल हैं।

रोमियो और जूली ने बचाई जिंदगी
वहीं, तुर्की में भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे राहत और बचाव कार्य की पूरी दुनिया में सराहना की जा रही है और भारत की कई टीमें दिन-रात काम करते हुए मलबों के बीच में दबी जिंदगियों को बाहर निकालने की कोशिश कर रही हैं। और भारतीय रेस्क्यू टीम ने एक बार फिर से 7 दिनों से मलबे में दबी 6 साल की एक बच्ची को जिंदा बचाया है और यह मुमकिन हो पाया है, रोमियो और जूली नाम के दो भारतीय कुत्तों की मदद से। भारतीय टीम ने कहा है, कि इन्हीं कुत्तों ने मलबे में फंसी बच्ची के जिंदा होने का पता लगाया और उसके बाद उस बच्ची को मलबे से बाहर निकाला गया। रेस्क्यू टीम का कहना है, कि इन दोनों की मदद के बिना शायद बच्ची को जिंदा बाहर नहीं निकाला जा सकता था। रोमियो और जूली वहां सफल हुए, जहां मशीनें नाकाम हो गईं। सैकड़ों टन मलबे के नीचे छोटी बच्ची के ठिकाने का पता लगाने में डॉग स्क्वायड ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

कैसे जिंदा बच्ची का लगाया पता
भारत की एनडीआरएफ की टीम भूकंप से बुरी तरह प्रभावित नूरदगी में लगातार काम कर रही है और जिंदा लोगों को बचाने के मिशन में डटी हुई है। वहीं, डॉग हैंडलर कॉन्स्टेबल कुंदन ने बताया, कि कैसे जूली ने नूरदगी साइट पर सबसे पहले मलबे में जीवित छोटी लड़की, जिसकी पहचान बेरेन के रूप में हुई है, उसे खोजा। कुंदन ने कहा, कि "हमें हमारी सरकार द्वारा यहां नूरदगी में खोज और बचाव कार्यों को सुविधाजनक बनाने के लिए कहा गया है और हमारे पास मलबे में फंसे एक जीवित व्यक्ति के बारे में एक सुराग मिला था। हमने जूली को मलबे के अंदर जाने के लिए कहा। वह अंदर गई और फिर हमें उसके जिंदा होने का संकेत देने के लिए भौंकने लगी, जिसके बाद हमने मिलकर उस जिंदा बच्ची को मलबे के अंदर से बाहर निकाला।

कई घंटों तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन
एनडीआरएफ के एक अन्य डॉग अटेंडेंट ने एएनआई को बताया, कि "हमने बच्ची के जिंदा होने की पुष्टि करने के लिए दूसरी बार रोमियो को मलबे के अंदर भेजा और फिर उसने भी मलबे में बच्ची के जिंदा होने की पुष्टि कर दी।" हालांकि, उन्होंने कहा, कि उस समय जीवित आत्मा की स्थिति और उम्र के बारे में कोई नहीं जानता था। लेकिन, कई घंटों के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद एनडीआरएफ के जवान 6 साल की बेरेन की जान बचाने में सफल रहे। आपको बता दें, कि नूरदगी में एक छह मंजिला इमारत ढह गई और मलबे में तब्दील हो गई, जहां एनडीआरएफ खोज और बचाव अभियान चला रहा है। स्थानीय लोगों ने एनडीआरएफ को मलबे के अंदर जीवित पीड़ितों के बारे में सूचित किया था, जिसके बाद जूली और रोमियो को जीवित लोगों का पता लगाने का काम सौंपा गया था, जिसमें वो सफल हुए हैं।

भारत चला रहा है बचाव अभियान
आपको बता दें, कि भारत ने तुर्की में 7.8 तीव्रता के भूकंप के तुरंत बाद 'ऑपरेशन दोस्त' की घोषणा की थी और अपने इस मिशन का नाम ऑपरेशन 'दोस्त' रखा है। भारत ने तुर्की में राहत और मानवीय सहायता सहित खोज और बचाव कार्यों के लिए 60 बेड का पैरा फील्ड अस्पताल और एनडीआरएफ समेत इंडियन आर्मी की टीम को भेजा है। भारत सरकार के इस अभियान की तुर्की में काफी तारीफ की जा रही है।












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