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Chatbot and Search: क्या सर्च इंजन को समाप्त कर देंगे चैटबॉट?

चैटबॉट की चर्चा के बीच सबसे बड़ा सवाल यही उभरकर आया है कि क्या भविष्य में सर्च इंजन का महत्व खत्म हो जाएगा? क्या चैटबॉट सर्च इंजन का विकल्प बन जाएंगे?

Next generation AI Chatbot challenge for google Search engine

Chatbot and Search: चैट जीपीटी ने एक प्रेमपत्र लिखा। साइबर सिक्योरिटी के क्षेत्र में काम करने वाली वैश्विक कंपनी मैकेफी कॉर्प ने इसका इस्तेमाल एक सर्वे में किया। नौ देशों के पांच हजार लोगों को यह पत्र दिखाया गया। इनमें से 69% लोग यह नहीं बता पाये कि वह पत्र मशीन ने लिखा था या किसी इंसान ने। चैट जीपीटी एमबीए और मेडिकल के एग्जाम 'क्लियर' कर चुका है। हाल ही में उसने एक यूनिवर्सिटी टेस्ट में बीस मिनट में दो हजार शब्दों का निबंध लिखकर सबको हैरान कर दिया था। क्या यह आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से युक्त चैटबॉट के बढ़ते परफेक्शन का प्रमाण है?

एक प्रसिद्ध कहावत है कि दुनिया में कुछ भी परफेक्ट नहीं होता। खुद चैट जीपीटी ओपन होते ही एक डिस्क्लेमर शो करता है। इसके अनुसार यह (1) कभी- कभी त्रुटिपूर्ण सूचनाएं दे सकता है, (2) कभी- कभी हानिकारक या पूर्वाग्रहयुक्त सामग्री भी दे सकता है और (3) इसके ज्ञान भंडार में वर्ष 2021 से पहले की सूचनाएं ही शामिल हैं।

एआई और चैटबॉट की सीमाओं का

ताजा उदाहरण गूगल का चैटबॉट 'बार्ड' है। चैट जीपीटी की चुनौती के जवाब में पिछले हफ्ते गूगल ने इसे लॉन्च किया। उसे यकीन था कि इससे वो ओपेन एआई (चैट जीपीटी लाने वाली कंपनी) को मात दे सकेगा। लेकिन बार्ड ने लॉन्च होते ही अपने प्रोमो में एक गलत जानकारी दे दी। गूगल को यह गलती बहुत भारी पड़ी। उसकी मार्केट वैल्यू घट गयी। उसे 120 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ।

इन बातों को देखते हुए, यकीन से नहीं कहा जा सकता कि चैटबॉट्स में परफेक्शन बढ़ रहा है या नहीं। लेकिन, इसमें कोई संदेह नहीं कि इनका इस्तेमाल और लोकप्रियता निस्संदेह लगातार बढ़ रही है।

दो महीने में सौ गुना बढ़े यूजर

महज ढाई महीने पहले ही लॉन्च चैट जीपीटी की एक्टिव यूजर संख्या बढ़कर दस करोड़ हो गयी है। दिसंबर 2022 में यह संख्या दस लाख थी और जनवरी 2023 में 5.7 करोड़। इन यूजर्स में अपना होमवर्क कराने वाले छात्र हैं, रेसिपी पूछने वाली महिलाएं हैं, रिसर्च पेपर, थीसिस लिख रहे स्कॉलर हैं, पत्रकार हैं, लेखक हैं, कवि हैं, अनुवादक है, स्टैंडअप कॉमेडियन हैं, व्यवासायी हैं, छोटी-छोटी सलाह से लेकर बड़े-बड़े गूढ़ विषयों पर बात करने के इच्छुक जिज्ञासु हैं। अब तो इसमें आशिकों का नाम भी जुड़ गया है।

मैकेफी के सर्वे में पता चला है कि 73 प्रतिशत लोग डेटिंग प्रोफाइल बनाने में चैट जीपीटी का इस्तेमाल कर रहे हैं। और 62 प्रतिशत भारतीय युवा वेलेंटाइन डे पर लवलेटर लिखने में एआई की मदद ले रहे हैं। सर्वे में यह भी पता चला कि हर चौथा व्यक्ति लव लेटर लिखने में एआई का इस्तेमाल कर रहा है।

चैट जीपीटी को लेकर इस बढ़ते क्रेज ने बड़ी-बड़ी कंपनियों को इस दिशा में सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। माइक्रोसॉफ्ट ने ओपेन एआई से हाथ मिला लिया है। चैट जीपीटी में एक बिलियन डॉलर के निवेश के अलावा उसने इसे अपने सर्च इंजन बिंग के साथ जोड़ दिया है। गूगल अपना एआई चैटबॉट बार्ड लॉन्च कर चुका है। फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा, चीन की बाइदू जैसी कई बड़ी टेक कंपनियों ने अपना सारा ध्यान उनके एआई प्रयासों के व्यवसायीकरण पर लगा दिया है। इस क्षेत्र में कितनी ज्यादा व्यावसायिक संभावनाएं हैं, इसका पता चैट जीपीटी लाने वाली ओपेन एआई के प्रोजेक्शन को देखकर चलता है। 2022 में दस मिलियन डॉलर से भी कम कमाने वाली यह कंपनी 2023 में 200 मिलियन डॉलर और 2024 तक एक बिलियन डॉलर का रेवेन्यू हासिल करने की उम्मीद जता रही है। दो महीने पहले, इसका मार्केट वैल्यूएशन 20 बिलियन डॉलर था, जो अब 29 बिलियन डॉलर हो चुका है।

चैटबोट से बात करने की बढ़ रही है होड़

इन्हीं संभावनाओं को देखते हुए, बड़ी कंपनियां ही नहीं, इस दौड़ में कई टेक स्टार्टअप्स और युवा व्यवसायी भी शामिल हो रहे हैं। जैसे बंगलौर के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने एआई चैटबॉट गीता डेवलप किया है। गीता, यूजर्स की सभी जिज्ञासाओं, शंकाओं और समस्याओं का समाधान 'भगवद गीता' से पूछ कर देता है।

चैटबॉट को लेकर यह दीवानगी बेशक अभूतपूर्व हो, लेकिन यह कोई नई चीज नहीं है। सालों से बहुत सारी कंपनियां अपने कस्टमर्स से डील करने के लिए वर्चुअल असिस्टेंट का इस्तेमाल कर रही हैं। बहुत सारी एप और वेबसाइट आपको वर्चुअल फ्रेंड या काउंसलर से चैट करने का मौका देती हैं। लेकिन उनके पास गिने चुने सवालों के नपे- तुले जवाब देने से ज्यादा की काबिलियत नहीं होती। चैटबॉट ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता का साथ पाकर अपनी सोच और अप्रोच को बहुत ज्यादा विस्तृत कर लिया है।

बन रहे हैं विकल्प

अभी तक जानकारियों के लिए सर्च इंजनों पर निर्भर रहते आ रहे इंटरनेट यूजर्स के लिए, चैटबॉट ज्यादा रोचक, विशेषीकृत और इंटरेक्टिव अनुभव देने वाला विकल्प बन रहे हैं। इससे ऑनलाइन ज्ञान की दुनिया पर वर्षों से राज करते आ रहे गूगल का सिंहासन हिल गया है।

वैसे तो साइबर दुनिया में दर्जनों की तादाद में सर्च इंजन मौजूद है। लेकिन इनमें टॉप पर गूगल, बिंग, याहू, यान्डेक्स, डक डक गो, बायड, आस्क, नेवर, इकोसिया, एओएल व इंटरनेट आर्काइव जैसे इंजन हैं। इनमें 92 फीसदी, करीब 3.5 बिलियन यूजर, अकेले गूगल के पास हैं। इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए, ऐसा लग सकता है कि इसके मुकाबले चैट जीपीटी के दस करोड़ यूजर तो कुछ भी नहीं हैं। तीन प्रतिशत से भी कम। भला इनसे सर्च इंजन को क्या चुनौती मिल सकती है?

लेकिन, गूगल या बाइदु जैसे सर्च इंजन ऐसा नहीं सोचते। वे जानते हैं कि कैसे एक नन्हीं सी चींटी , हाथी के लिए बहुत बड़ी समस्या बन सकती है। इसलिए वे प्रतिस्पर्द्धा की तैयारियों में जुट गए हैं। जितने यूजर्स चैट जीपीटी ने दो महीने में हासिल कर लिए, उस संख्या तक पहुंचने में गूगल प्लस को डेढ़ साल लग गए थे। गूगल ने तो इस चुनौती को शुरुआती दौर में ही समझ लिया था। इसलिए चैट जीपीटी की लॉन्च के दो हफ्ते बाद ही उसने कंपनी में कोड रेड जारी कर दिया। इसका मतलब है कि कंपनी को अगर अपनी बढ़त बनाए रखनी है तो उसे जल्दी ही यूजर्स को चैट जीपीटी से बेहतर विकल्प देना होगा।

सर्च इंजन या चैटबॉट?

अब सवाल यह है कि सर्च इंजनों की तुलना में यूजर्स चैटबॉट को क्यों ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इसे इस तरह से समझिए कि आप काम से लौटकर घर आते हैं। एक तरफ, फ्रिज में आपके लिए खाने का सामान रखा है। आपको जो चाहिए, निकाल लीजिए और अपने हिसाब से गर्म करके, या जैसा है वैसे ही, खा लीजिए। दूसरी तरफ, घर में आपका इंतजार हो रहा है। आप बताते हैं कि आपका क्या खाने का मन है। आपको वही बनाकर खिलाया जाता है। इसमें कुछ कम या ज्यादा लगे तो आप बताकर उसे सही करवा लेते हैं। अब आप किसे प्राथमिकता देंगे? जो उपलब्ध है, उसी से काम चलाने की मजबूरी को या अपनी पसंद से चीजें पाने की सुविधा को?

चैटबॉट यूजर्स को दूसरा विकल्प दे रहे हैं। सर्च इंजन पर आपको वही मिलता है, जो पहले से वहां मौजूद है। वहीं चैटबॉट आपको, आपकी जरूरत के हिसाब से सामग्री उपलब्ध कराते हैं।

सर्च इंजन पर आपको अपनी इच्छित सामग्री के लिए बहुत सारे विकल्पों के बीच भटकना पड़ सकता है। जबकि चैटबॉट आपको वही देगा, जो आपको चाहिए। चैटबॉट आपके साथ सीधी बात करता है और उसी के अनुसार प्रतिक्रिया देता है। यह रोचकता आपको सर्च इंजनों के एकतरफा संवाद में नहीं मिलेगी।

इसीलिए चैटबॉट्स सूचनाओं की तलाश के लिए सर्च इंजनों पर पारंपरिक निर्भरता को धीरे-धीरे कम कर रहे हैं। अभी तो यह शुरूआती अवस्था ही है, आगे इसमें और कितने क्रान्तिकारी बदलाव आएंगे, अनुमान नहीं लगाया जा सकता। बार्ड की लॉन्चिंग के दौरान खुद गूगल के सीईओ सुंदर पिचई ने कहा था कि एआई अपनी कम्प्यूटेशन पॉवर को हर छह महीने में दोगुनी रफ्तार से बढ़ा रहा है। इस लिहाज से भविष्य में सर्च इंजनों और चैटबॉट्स के बीच मुकाबला बहुत दिलचस्प रहने वाला है।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि क्या भविष्य में चैटबॉट सूचनाएं पाने के लिए सर्च इंजनों पर हमारी निर्भरता को खत्म कर देंगे ? इसका जवाब है 'शायद हाँ, लेकिन यह पूरा इस बात पर निर्भर करेगा कि भविष्य में तकनीकी उन्नति कैसी होगी। अगले कुछ सालों में, चैटबॉट टेक्नोलॉजी काफी विस्तृत और विकसित होने जा रही है, जिससे लोगों में इसकी समझ बढ़ेगी और उनमें जानकारी की मांग बढ़ेगी। हालांकि, सर्च इंजन भविष्य में भी बहुत महत्वपूर्ण रहेंगे जो उपयोगकर्ताओं को जानकारी देने के लिए चैटबॉट का भी प्रयोग करेंगे।

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    इस बात की संभावना कम है कि चैटबॉट सर्च इंजन की आवश्यकता खत्म कर देंगे, बल्कि इस बात की संभावना अधिक है कि चैटबॉट तो रहेंगे लेकिन सर्च इंजन का एक हिस्सा बनकर।

    यह भी पढ़ें: ChatGPT and AI: क्या है ChatGPT, जिसके लिए गूगल समेत अन्य टेक कंपनियों के बीच लगी है रेस?

    (इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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