Newsclick Expose: न्यूजक्लिक खुलासे के बाद भाजपा हुई आक्रामक

सिर्फ एक दशक पहले की बात है, जब चीन की कई वेबसाईट्स बेरोजगार भारतीय पत्रकारों से भारत के खिलाफ लेख लिखवा कर उन्हें मोटी राशि दिया करती थी|

सिर्फ एक दशक पहले की बात है, जब चीन की कई वेबसाईट्स बेरोजगार भारतीय पत्रकारों से भारत के खिलाफ लेख लिखवा कर उन्हें मोटी राशि दिया करती थी| आजकल एक यूट्यूब चैनल चलाने वाले एक मोदी विरोधी पत्रकार के उस चीनी वेबसाईट पर खूब लेख छपे थे| कुछ तो मीडिया के नए संसाधन आने के बाद, और कुछ मोदी युग के बाद भारतीय पत्रकारों का बुरा दौर चल रहा है| आर्थिक तंगी के कारण वे इस बात का ध्यान नहीं रख पाते कि उनके हाथों से देश के खिलाफ भी कोई काम हो रहा है|

वर्ष 2020 में एक भारतीय पत्रकार को चीन के लिए काम करके मोटी कमाई करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था| कई महीनों बाद अदालत से जमानत मिली, तो भारतीय एजेंसियों ने उसे फिर से गिरफ्तार कर लिया| वह भारत की बड़ी अंगरेजी समाचार एजेंसी समेत प्रतिष्ठित अखबारों में काम कर चुका था, लेकिन मोदी के सत्ता में आने बाद फ्रीलांसिंग में आना पड़ा था| अब यह बात सारी दुनिया के सामने आ चुकी है कि भारत में अपने समर्थन में चीन पत्रकारों का ही नहीं, बल्कि राजनीतिज्ञों का भी इस्तेमाल करता आ रहा है|

Newsclick Expose: BJP turns aggressive over congress opposition after Newsclick row

अमरीकी अखबार न्यूयार्क टाइम्स वैसे तो मोदी विरोधी खबरें लिखवाता और छापता रहा है| कृषि कानूनों के खिलाफ भारत में हुए किसान आन्दोलन के समर्थन में न्यूयार्क टाइम्स में मोदी सरकार के खिलाफ एक पेज का विज्ञापन छपा था| विज्ञापन में जार्ज सोरोस से अनुदान लेने वाले कई मानवाधिकार संगठनों के नाम थे। विज्ञापन के माध्यम से दुनिया भर के नागरिकों से लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने की अपील की गई थी|

उसी न्यूयार्क टाइम्स ने दिल्ली सरकार के कामों की तारीफ़ करते हुए पहले पेज पर खबर छापी थी, जिसे अरविन्द केजरीवाल ने खूब प्रचारित किया था| अब उसी न्यूयार्क टाइम्स ने 5 अगस्त को भारत के डिजिटल समाचार पोर्टल न्यूज क्लिक के बारे में खुलासा करके भारतीय राजनीति में हलचल पैदा कर दी है| यह वेबसाईट भारत में मोदी विरोधी मानी जाती है।

Newsclick Expose: BJP turns aggressive over congress opposition after Newsclick row

किसान आन्दोलन के समय न्यूज क्लिक ने किसान आदोलन को विस्तार से कवर किया था। इसी आन्दोलन के दौरान ही ईडी ने न्यूज क्लिक के कार्यालय पर छापा मार कर उसके खातों की पड़ताल की थी| लेकिन हैरानी यह थी कि सरकारी एजेंसी ने संपादकों के घरों पर भी छापे मारे थे| न्यूजक्लिक के संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ ने उस समय कहा था कि मीडिया का एक वर्ग उनके खिलाफ भ्रामक खबरें छाप रहा है।

असल में मीडिया में चल रही उन खबरों में न्यूजक्लिक को वामपंथी प्रचार माध्यम कहा जा रहा था। वह इसलिए, क्योंकि प्रबीर पुरकायस्थ कोई पत्रकार नहीं थे, अपनी अधेड़ उम्र में उन्होंने न्यूज क्लिक को शुरू किया था| जब उनके यहाँ छापे पड़े थे, तो उन्होंने एक इंटरव्यू में कबूल किया था कि वामपंथ प्रचार के क्षेत्र में कमजोर था, इसलिए उन्होंने इसे बढ़ावा दिया|

अब न्यूयार्क टाइम्स ने खुलासा किया है कि भारत में मोदी विरोधी मुहिम चलाने वाली वेबसाइट न्यूजक्लिक का चीनी कनेक्शन है| उसे चीन से 10 करोड़ रूपए की फंडिंग हुई थी, इसके अलावा 20 करोड़ की एफडीआई भी हुई है| न्यूयॉर्क टाइम्स की 5 अगस्त 2023 की प्रकाशित रिपोर्ट में वामपंथ समर्थक अमेरिकी अरबपति नेविल रॉय सिंघम का नाम सामने आया है| खबरों में कहा गया है कि वह चीनी सरकार की मीडिया मशीनरी के साथ मिलकर काम करता है और दुनियाभर में चीनी प्रोपेगैंडा फैलाने के लिए धन मुहैया कराता है|

नेविल रॉय सिंघम जिन पत्रकारों एवं कार्यकर्ताओं को फंडिंग करता है, वे वेबसाईटों और यूट्यूब के माध्यम से चीन के पक्ष में अभियान चलाते हैं| इन प्रचार माध्यमों से वे स्थानीय राजनीति को प्रभावित करते हैं| नेविल रॉय सिंघम श्रीलंका मूल का अमेरिकन नागरिक है, लेकिन उसने शंघाई को अपना आपरेशन सेंटर बनाया हुआ है|

न्यूयार्क टाइम्स के मुताबिक़ 69 साल का सिंघम शंघाई से खुद भी एक नेटवर्क चलाता है, जिसके लिए शंघाई का प्रोपेगैंडा विभाग उन्हें फंड देता है| हालांकि सिंघम का कहना है कि वह चीनी सरकार के निर्देश पर काम नहीं करता है, वह स्वतंत्र रूप से काम करता है| लेकिन न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक नेविल रॉय सिंघम के साथ मैसाचुसेट्स में एक थिंक टैंक, मैनहटन की एक संस्था, दक्षिण अफ्रीका में एक राजनीतिक दल, भारत और ब्राजील में समाचार संगठन सहित कई ग्रुप जुड़े हैं, जो कि चीन की सरकार के इशारे पर काम करते हैं|

भारत में अधिकारियों ने जब समाचार संगठन न्यूजक्लिक पर चीनी सरकार से संबंध रखने का आरोप लगाते हुए छापा मारा था, तो न्यूजक्लिक के दफ्तर की कॉरपोरेट फाइलिंग से पता लगा था कि सिंघम के नेटवर्क ने वेबसाइट न्यूजक्लिक को फाइनेंस किया है| सिंघम ने न्यूज क्लिक वेबसाइट को 3 सालों में 38 करोड़ रुपये दिए थे|

अब न्यूयार्क टाइम्स ने भारतीय एजेंसी ईडी के आरोपों की पुष्टि की है, तो भारतीय जनता पार्टी को जोरदार मुद्दा मिल गया है| वह इस मुद्दे को कांग्रेस के खिलाफ भी इस्तेमाल कर रही है, और कम्युनिस्ट पार्टियों के खिलाफ भी| लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान भाजपा के सांसद निशिकांत दूबे ने कहा कि उनके पास ऐसे अनेक ईमेल के सबूत हैं कि नेविल रॉय सिंघम माकपा के पूर्व महासचिव प्रकाश कारत के साथ सम्पर्क में थे| उन्होंने सदन में ईमेल ट्रेल रखने की पेशकश भी की है| राज्यसभा में भी केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने चीन के प्रोपेगेंडा का समर्थन करने पर पूरे विपक्ष पर हमला बोला है।

असल में जब न्यूज क्लिक पर ईडी का छापा पड़ा था तो कम्यूनिस्ट पार्टी और कांग्रेस ने छापे को अभिव्यक्ति की आज़ादी से जोड़ते हुए मोदी सरकार पर अभिव्यक्ति की आज़ादी को कुचलने का आरोप लगाया था| भारत में पत्रकारों, मीडिया घरानों, यूट्यूबरों और राजनीतिज्ञों को फंडिंग का खुलासा ठीक उस समय हुआ है, जब राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता बहाल हुई है| भारतीय जनता पार्टी ने इस खबर को राहुल गांधी के खिलाफ इस्तेमाल करने का मौक़ा भी नहीं चुका|

यूपीए शासनकाल के समय राहुल गांधी ने कांग्रेस की तरफ से चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के साथ एक एमओयू पर दस्तखत भी किए थे। एमओयू में क्या था, इसे लेकर भाजपा हमेशा से कांग्रेस पर हमलावर रही है, क्योंकि एमओयू की शर्तों का आज तक खुलासा नहीं हुआ| इस सबकी पृष्ठभूमि में भाजपा के नेता और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कहा कि कांग्रेस, चीन और न्यूज़क्लिक एक ही नाड़ी के हिस्से हैं| इतना ही नहीं उन्होंने राहुल गांधी पर चीन से गुपचुप संबंध रखने तक का आरोप लगा दिया, जब उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की 'नकली मोहब्बत की दुकान' में चीनी सामान साफ़ देखा जा सकता है|

भारत के लोकसभा चुनावों में इस बार अमेरिका और चीन की दो लॉबी खुलकर काम करती दिखाई दे रही हैं| एक तरफ चीन और चीन समर्थक अमेरिकी लेफ्टिस्ट हैं, जो मोदी सरकार को सत्ता से हटाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहते। वे राजनीतिज्ञों, न्यूजक्लिक जैसे मीडिया घरानों, और मोदी विरोधी यूट्यूबरों को फंडिंग करके भाजपा और मोदी के खिलाफ हवा बनाने का काम कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ अमेरिका में भारतीयों और उनके प्रभाव के लोगों की एक लॉबी है, जो हर हाल में मोदी को तीसरी बार प्रधानमंत्री पद देखना चाहते हैं, ताकि चीन पर नकेल लगाई जा सके|

कई अमेरिकी विश्लेषकों का मानना है कि अगर मोदी हारते हैं, तो नई सरकार चीन समर्थक बन जाएगी, जो अमेरिका को किसी भी हालत में सूट नहीं करेगी| इसलिए भाजपा ने राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता बहाल होते ही उन पर चीन समर्थक होने का आरोप लगा दिया है, क्योंकि राहुल गांधी के कन्विक्शन पर स्टे के बाद उनके विपक्षी एकता की धुरी बनने की संभावना बढ़ गई है|

मोदी सरकार के मंत्रियों ने एक साथ राहुल गांधी पर हमला किया है। जहां अनुराग ठाकुर ने कहा कि राहुल गांधी का चीन के प्रति प्रेम जगजाहिर है, वही दूसरे केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने भी राहुल पर हमला बोला| राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि न्यूज़क्लिक जैसे मंचों और संयुक्त रूप से संचालित होने वाले अन्य मंचों की तरफ से पेश नैरेटिव लगभग वैसे ही हैं, जिस तरह से राहुल गांधी व्यक्त करते हैं|

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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