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Action against Corrupt: भ्रष्टाचारियों को जेल भेजने के वादे को पूरा करके चुनाव जीतना चाहते हैं मोदी

Action against Corrupt, मोदी ने 22 नवंबर को सीबीआई को भ्रष्टाचार के विरोध में तेजी लाने का इशारा किया।

Modi wants to win the election by fulfilling the promise of sending the corrupt to jail

समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव और उनके भाई प्रतीक यादव की आय से अधिक सम्पत्ति की जांच बंद कर दी गई है। यह बात 2013 की है, जब अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी में गलबहियां चल रही थीं। मामला सुप्रीम कोर्ट में गया तो कोर्ट ने जांच बंद करने की इजाजत नहीं दी थी। 2019 में जब मामला फिर कोर्ट में गया, तब भी कोर्ट ने इजाजत नहीं दी, लेकिन सीबीआई ने अपना स्टैंड नहीं बदला। अंतत: 13 मार्च को केस बंद करने की इजाजत मिल गई।

वैसे रिकार्ड यह कहता है कि अखिलेश यादव जब 2012 से 2017 तक मुख्यमंत्री थे तो उनकी सम्पत्ति में चार गुना इजाफा हुआ था। सीबीआई ने दुबारा जांच क्यों शुरू नहीं की, यह एक रहस्य है। लेकिन दूसरी तरफ विपक्ष की चार पार्टियों आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, राजद और भारत राष्ट्र समिति के खिलाफ ताबड़ तोड़ छापेमारी, पूछ्ताछ और गिरफ्तारियां चल रही हैं। आम आदमी पार्टी और भारत राष्ट्र समिति का कांग्रेस व भाजपा विरोधी मोर्चा है। दोनों दलों के नेता दिल्ली के शराब घोटाले की जांच में फंसे हुए हैं। इनमें मुख्य तौर पर अभी आम आदमी पार्टी के मनीष सिसोदिया और भारत राष्ट्र समिति की के. कविता हैं, जो तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चन्द्रशेखर राव की बेटी हैं।

Modi wants to win the election by fulfilling the promise of sending the corrupt to jail

दिल्ली के उप मुख्यमंत्री सिसोदिया गिरफ्तार हो चुके हैं और बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव कभी भी गिरफ्तार किए जा सकते हैं। नौकरी के बदले जमीन मामले में तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल है और वे जमानत पर रिहा हैं। यह मामला उस समय का है जब लालू यादव यूपीए सरकार में रेल मंत्री हुआ करते थे।

सवाल यह है कि क्या यह सब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इशारे पर हो रहा है। दूसरा सवाल यह है अगर नरेंद्र मोदी के इशारे पर ही हो रहा है, तो नरेंद्र मोदी चुनावों से पहले विपक्ष के सब नेताओं को इकट्ठा होने का मौक़ा क्यों दे रहे हैं। तीसरा सवाल यह है कि क्या भारतीय जनता पार्टी को इसका चुनावी फायदा नहीं होगा।

पहले सवाल का जवाब यह है कि हाँ, यह सब नरेंद्र मोदी के इशारे पर हो रहा है। याद करिए तीन महीने पहले 22 नवंबर को नरेंद्र मोदी ने सीवीसी और सीबीआई के अफसरों की कांफ्रेंस में क्या कहा था। उन्होंने कहा था कि वे बेधड़क हो कर कार्रवाई शुरू करें। नरेंद्र मोदी ने नवंबर में ही इशारा कर दिया था कि टूट पड़ो, और वे टूट पड़े हैं।

दूसरा सवाल यह है कि अब जब लोकसभा चुनाव में सिर्फ एक साल बचा है, तो एक साथ कई विपक्षी दलों पर कार्रवाई शुरू करवा कर वह विपक्ष को एकजुट होने का मौक़ा जानबूझकर क्यों दे रहे हैं। याद करिए 2014 का चुनाव, जब उन्होंने देश से वायदा किया था कि वह भ्रष्टाचारियों को बख्शेंगे नहीं और भ्रष्टाचार मुक्त शासन देंगे। चुनाव जीतने के बाद उन्होंने वादा किया था कि वह न खाएंगे, न खाने देंगे।

2019 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी ने राफेल को लेकर मोदी पर आरोप लगाने की कोशिश की, अंबानी को फायदा पहुँचाने का आरोप लगाया गया था, चौकीदार चोर का नारा भी लगाया। लेकिन जनता ने राहुल के आरोपों पर भरोसा नहीं किया। राहुल गांधी अब मोदी पर अडानी को फायदा पहुँचाने के आरोप लगा रहे हैं, तो मोदी खुद पर बने उसी भरोसे को बनाए रखने के लिए भ्रष्टाचारियों की सारी फाईलें खुलवा रहे हैं।

मोदी ने 22 नवंबर को सीबीआई को भ्रष्टाचार के विरोध में तेजी लाने का इशारा किया। सब पर एक साथ कार्रवाई शुरू करवा कर वह जनता में संदेश देना चाहते हैं कि उसे भ्रष्टाचारियों को चुनना है, या भ्रष्टाचार मुक्त शासन देने वालों का साथ देना है। चुनावों से पहले भ्रष्ट नेताओं को कटघरे में खड़ा कर के वे अपने कोर वोट बैंक को याद दिला रहे हैं कि वह भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई का वायदा भूले नहीं हैं।

इसके साथ ही समूचे विपक्ष को वह चुनौती भी दे रहे हैं कि सारे मिल कर आ जाओ, जनता तय करेगी कि वह किसके साथ है। संसद के इसी सत्र में उन्होंने चुनौती देते हुए कहा भी था कि वह अकेले ही सब पर भारी हैं, और विपक्षी एकता की खबरों के बीच वह इसे चुनाव के मैदान में भी साबित करना चाहते हैं। सीवीसी और सीबीआई अधिकारियों के इसी सम्मेलन में मोदी ने अरविन्द केजरीवाल का नाम लिए बिना याद करवाया था, कि जो सब को भ्रष्ट बताता था, वह बेशर्मी के साथ उन्हीं के साथ खड़े हो कर हाथ से हाथ मिलाकर फोटो खिंचवा रहा है।

तीसरा सवाल यह था कि भाजपा को इसका चुनावी फायदा होगा या नहीं। तो इसका जवाब यह है कि 2014 में मोदी के जीतने की जो प्रमुख वजहें थीं, उनमें से सबसे बड़ी वजह भ्रष्टाचार ही थी। वे अब भष्टाचारियों को जेल भेजने के वायदे को निभा रहे हैं, जिसका चुनावी फायदा उन्हें मिल सकता है।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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