Mahadev App: ब्रांड एम्बेसडर बनने के लालच में फंसते सितारे
Mahadev App: सौरभ चंद्राकर की भिलाई में जूस की दुकान थी और रवि उप्पल की टायर की दुकान। दोनों ने सोचा कि इंटरनेट और एप्प की दुनिया में कोई स्टार्ट अप शुरू किया जाए। महादेव के इन भक्तों ने उन्हीं के नाम पर एक एप बनवाया और 2017 में एक बिजनेस शुरू कर दिया लेकिन अगले तीन साल तक वो गड्ढे में ही पड़ा रहा। इतने में कोरोना ने दस्तक दी और अचानक से उनका बिजनेस दिन दोगुनी रात चौगुनी गति से भागने लगा। ऐसा भागा कि आज उनकी वजह से फिल्मी दुनिया के तमाम सितारे जिनमें रणवीर कपूर, श्रद्धा कपूर, कपिल शर्मा आदि ईडी से बचते बचाते भागते फिर रहे हैं। इस फेहरिश्त में टाइगर श्रॉफ, विशाल ददलानी और सनी लियोनी जैसे चेहरों के भी नाम हैं।
महादेव बेटिंग एप पर कोरोना के दिनों में घरों में बैठे उन लोगों ने अपनी किस्मत आजमाई, जो सट्टेबाजी के शौकीन है। घर बैठे ही सट्टा खेलना आसान लगा। एकदम से पैसा बरसा तो रवि और सौरभ ने और भी कई एप शुरू किए। कई फ्रेंचायजी बना दी। भारतीय कानूनों से बचने के लिए मुख्यालय यूएई में खोल दिया। इतना पैसा बरसा कि रणबीर कपूर को अपना ब्रांड अम्बेसडर बना दिया।

भांडा फूटता भी नहीं, अगर सौरभ चंद्राकर दुबई में शानदार शादी समारोह नहीं करता। 200 करोड़ रुपए की शादी और पूरा का पूरा पैसा नकद में खर्च किया गया। एक चार्टर्ड प्लेन के जरिए नागपुर से पूरा परिवार दुबई रवाना हुआ। रणवीर कपूर, श्रद्धा कपूर, टाइगर श्रॉफ, विशाल ददलानी, कपिल शर्मा और सनी लियोनी जैसे बीसियों सेलेब्रिटी चेहरे इस शादी में भाग लेने पहुंचे। फरफॉर्मेंस भी दीं। जाहिर है मोटा पैसा मिला होगा, लेकिन नंबर एक में ना मिला और ना ही इनकम टैक्स में जानकारी दी गई। सब हवाला के जरिए दिया गया।
अब ईडी ने रणवीर, श्रद्धा, कपिल समेत कुछ लोगों के पास सम्मन भेजा है। उससे पहले महादेव एप से जुड़ी कई कम्पनियों के दफ्तरों पर भोपाल, मुंबई, नागपुर आदि में रेड मारकर ईडी ने 417 करोड़ की सम्पत्तियों को जब्त कर लिया है। रणबीर कपूर ने व्यस्तता बताकर ईडी से 2 हफ्ते का समय मांगा है। सबसे ज्यादा निशाने पर वही हैं, क्योंकि लाखों लोगों ने उनको लेकर बनाये गये विज्ञापन में जो वाट्सएप्प नंबर बताया गया था, उसी पर करोड़ों का सट्टा खेला है।
अंदरखाने चर्चा है कि रणवीर कपूर की लीगल टीम अब महादेव एप के साथ हुए करार के एक एक बिंदु को खंगाल रही है कि क्या करार हुआ था और कहां उस कम्पनी ने उसका दुरुपयोग कर करोड़ों उगाहा। रणवीर कपूर उस आदमी को भी ढूंढ रहे हैं, जिसने महादेव एप के प्रमोटर्स से उन्हें मिलाया था। क्योंकि इस पूरे जंजाल में सितारों का कोई ना कोई बेहद करीबी ही ऐसे लोगों से सम्पर्क में लाता है। जैसा कि जैक्लीन फर्नांडीज के मामले में हुआ।
जब कई महीनों तक सुकेश चंद्रशेखर के फोन जैक्लीन ने नहीं उठाए तो सुकेश ने उसकी हेयर ड्रेसर पिंकी ईरानी को फंसाया। उसे महंगे तोहफों से लाद दिया ताकि वो सुकेश को जैक्लीन से सन टीवी का मालिक और जयललिता परिवार का व्यक्ति बताकर परिचय करवा सके। फिर तो जैक्लीन को एक से एक बेशकीमती तोहफा देकर फंसा लिया गया। वैसे भी फिल्मी हीरोईनों को सबसे ज्यादा चिंता जवानी के बाद के दिनों की होती है कि कैसे उन्हें कोई जीवनसाथी मिले जो उनका हीरोइन वाला स्टेटस सिम्बल बाद में भी बना कर रख सके।
कई बार ब्रांड्स का नाम भी ऐसा होता है कि सितारे समझ नहीं पाते कि उनके विज्ञापन का क्या असर होगा। पिछले दिनों अमिताभ बच्चन के मामले में भी ऐसा ही हुआ। फ्लिपकार्ट जैसे मशहूर ब्रांड के मामले में जब अमिताभ बच्चन ने उनकी फेस्टीवल सेल का विज्ञापन करते हुए कहा कि इससे बेहतर स्मार्ट फोन्स के ऑफर्स और सस्ती डील्स आपको ऑफलाइन कहीं नहीं मिलेंगी। इससे व्यापारियों का संगठन CAIT नाराज हो गया और मांग कर रहा है कि ऐसे झूठे विज्ञापन पर तो फौरन रोक लगे ही, अमिताभ बच्चन पर भी 10 लाख का जुर्माना लगाया जाए, ताकि आगे से वो इस तरह के विज्ञापन न करें।
हालांकि अमिताभ इस मामले में काफी सावधानी बरतते हैं। जब अजय देवगन, शाहरुख खान और अक्षय कुमार जैसे सितारे एक गुटखा कम्पनी के पान मसाला एड में एक साथ नजर आए तो अमिताभ बच्चन ने भी एक एड कर लिया। लोगों ने उन पर सवाल उठाए तो अमिताभ ने फौरन माफी मांगकर उस कम्पनी को पैसा वापस कर दिया। अक्षय ने भी विमल इलायची के सरोगेट ऐड भविष्य में ना करने का वायदा किया।
कार, साबुन, फेयरनेस क्रीम, हेयर ऑयल, सर्फ, पाउडर आदि के जब विज्ञापन आते थे तो लोगों को इतनी परेशानी नहीं होती थी, क्योंकि कार जैसी महंगी चीजें वो जांच परख कर लेते थे और सौंदर्य प्रसाधन आदि इतने मंहगे नहीं थे कि एक बार की गलत खरीद से लाखों का नुकसान हो जाए। लेकिन समय बदलने के साथ ही ऐसी कंपनियां अपने ब्रांड के प्रमोशन में सितारों को जोड़ने लगी, जो ईजी मनी कमाना चाहती थीं और सितारों को पहले से ज्यादा पैसे देने के लिए तैयार थीं। जैसे चिट फंड कम्पनियां, बिल्डर्स कम्पनियां, गुटखा कम्पनियां आदि।
सितारों से जुड़ते ही इन कम्पनियों की आय चौगुनी हो जाती थी और इसका नुकसान यह हुआ कि धोनी जैसे मशहूर खिलाड़ी के ब्रांड अम्बेसडर बनते ही आम्रपाली बिल्डर अनिल शर्मा ने 40 हजार फ्लैट खरीदारों को मूर्ख बना दिया और वो अब तक सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे हैं। जबकि जिन धोनी के कारण लोग धोखा खाए, उन पर अभी तक कोई एक्शन नहीं हुआ है।
अब ऐसे कई मामले लगातार सामने आए तो केन्द्र सरकार पर भी दवाब पड़ा और नतीजा ये हुआ कि महीनों की कसरत के बाद इसी साल मार्च में डिपार्टमेंट ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स ने ब्रांड अम्बेसडर्स के लिए एक गाइडलाइंड जारी की है, 'एंडोर्समेंट नो-हाउज' (Endorsement Know-Hows)।
इन गाइडलाइंस में लिखा है कि करार बड़ा ही सरल और स्पष्ट होना चाहिए। कोई भी ऐसा उत्पाद या सेवा सेलेब्रिटी या इन्फ्लुएंशर्स प्रचारित नहीं करेंगे, जिसका वो खुद इस्तेमाल नहीं करते हों। किसी भी धोखेबाजी के लिए सेलेब्रिटी का प्रचार जिम्मेदार हुआ तो उन्हें भी जवाबदेह ठहराया जाएगा। उनको खुद भी कम्पनी का ध्यान रखना होगा। साथ ही मीडिया में भी विज्ञापनों को भ्रामक तरीके से ना प्रस्तुत किया जाए। इस गाइडलाइन की लम्बी फेहरिश्त है।
लेकिन दिक्कत ये है कि जब सेलेब्रिटी लालच में जानबूझकर ऐसा काम करें जो किसी भी दृष्टि से कानून सम्मत नहीं है तो कोई क्या कर सकता है? 200 करोड़ की शादी में अगर कोई सेलेब्रिटी शामिल होने के नाम पर नकद में पैसा लेता है और उसे इनकम टैक्स विभाग से छुपाता है तो फिर उसे कौन बचा सकता है? ऐसे में ये मान कर चलिए भले ही कल अमिताभ बच्चन और जैक्लीन फर्नांडीज अपने खिलाफ कार्यवाही से बच जाएं, लेकिन महादेव एप के मामले से इन सभी बड़े सितारों को अब महादेव ही बचा सकते हैं। अगर इन सभी के खिलाफ एक्शन हुआ तो सोचिए कितनी ही फिल्में फंस जाएंगी और नुकसान उनका भी होगा, जो इस मामले में सीधे जुड़े नहीं हैं।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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