केजरीवाल की रिहाई से पंजाब में कांग्रेस को नुकसान

Kejriwal Bail: दिल्ली और पंजाब में लोकसभा चुनावों से पहले अरविन्द केजरीवाल की 20 दिन की अंतरिम जमानत से आम आदमी पार्टी के साथ साथ इंडी एलायंस में भी उत्साह का संचार हुआ है| आम आदमी पार्टी दिल्ली में चार सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि कांग्रेस उसके साथ गठबंधन में बाकी की तीन सीटों पर चुनाव लड़ रही है|

सत्रहवीं लोकसभा में दिल्ली की सातों सीटें भाजपा जीती थी| अगर दिल्ली में भाजपा एक भी सीट हारती है, तो वह भाजपा की बड़ी हार होगी और अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में अरविन्द केजरीवाल का सिक्का जमाने में सहायक भी होगी| दिल्ली में आम आदमी पार्टी पिछले दोनों लोकसभा चुनावों में अपना खाता नहीं खोल सकी है|

Kejriwal Bail

लेकिन पंजाब में आम आदमी पार्टी सभी 13 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जहां उसका मुकाबला कांग्रेस, भाजपा और अकाली दल से है| जहां दिल्ली में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी मिल कर लड़ रहे हैं और अरविन्द केजरीवाल की गिरफ्तारी के खिलाफ हुई रैली में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका ने हिस्सा भी लिया| वहीं पंजाब में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस आमने सामने लड़ रहे हैं|

सुप्रीमकोर्ट ने दिल्ली के साथ पंजाब के चुनाव की तारीख को भी ध्यान में रख कर केजरीवाल को पहली जून तक अंतरिम जमानत मिली है, इसलिए यह तो तय है कि केजरीवाल इन दोनों राज्यों में अपना ज्यादा समय देंगे| पंजाब में केजरीवाल का चुनाव प्रचार भारतीय जनता पार्टी को कम, लेकिन कांग्रेस के लिए ज्यादा नुकसानदायक साबित होगा|

पंजाब में पिछली बार कांग्रेस लोकसभा की आठ सीटें जीती थी, वहीं आम आदमी पार्टी के सिर्फ एक उम्मीदवार संगरूर से भगवंत मान जीते थे, वह सीट भी उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद आम आदमी पार्टी उपचुनाव में हार गई थी| भले ही विधानसभा चुनावों में कांग्रेस बुरी तरह हारी है, लेकिन लोकसभा चनावों में अभी भी कांग्रेस बड़ी ताकत है, इसलिए वह कम सीटों पर चुनाव लड़ने को तैयार नहीं हुई और दोनों दलों का गठबंधन नहीं हो सका|

केजरीवाल का यह भी मानना था कि अगर पंजाब में दोनों पार्टियों ने मिल कर चुनाव लड़ा तो भारतीय जनता पार्टी और अकाली दल को फायदा हो जाएगा, क्योंकि दोनों पार्टियों के विरोधी वोट उसे मिल जाएंगे| पंजाब में भारतीय जनता पार्टी वैसे भी कोई बड़ी ताकत नहीं है| पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा और अकाली दल का गठबंधन था और दोनों ही पार्टियां दो-दो लोकसभा सीटें जीती थीं| भारतीय जनता पार्टी पिछले चार-पांच लोकसभा चुनावों में दो से तीन सीटें जीतती रही है| पिछले दोनों चुनावों में भाजपा ने दो सीटें जीती, जबकि आम आदमी पार्टी पिछली बार एक और 2014 में चार सीटें जीती थीं|

इस बार भाजपा पहली बार अकाली दल से अलग हो कर सभी 13 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, अब तक उसने 12 सीटों पर उम्मीदवार उतार दिए हैं| पंजाब के चौकोने मुकाबले में फंसी आम आदमी पार्टी के लिए केजरीवाल की रिहाई बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है| जो भाजपा को कम, जबकि कांग्रेस के लिए ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है| अलबत्ता जहां कांग्रेस और आम आदमी पार्टी कड़ी टक्कर में होंगे, वहां भाजपा को फायदा हो सकता है|

सवाल यह है कि केजरीवाल का देश के बाकी हिस्सों में इंडी गठबंधन के पक्ष में प्रचार क्या कोई अहम भूमिका निभा सकता है| केजरीवाल को मिली अंतरिम जमानत से झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी अंतरिम जमानत मिलने का रास्ता खुल गया है| झारखंड में अभी सिर्फ चार सीटों पर चुनाव हुआ है, दस सीटों पर चुनाव अभी बाकी है| दोनों के जेल जाने के बाद दोनों की पत्नियां चुनाव प्रचार में अहम भूमिका निभा रही हैं|

केजरीवाल की पत्नी ने झारखंड में जा कर इंडी एलायंस के उम्मीदवारों के समर्थन में चुनाव प्रचार किया है, तो हेमंत सोरेन की पत्नी ने दिली में हुई इंडी एलायंस की रैली में भाषण दिया था| अब अगर केजरीवाल के बाद हेमंत सोरेन को भी जमानत मिल जाती है, तो दोनों देश भर में चुनावी रैलियों को संबोधित करके इंडी एलायंस के पक्ष में हवा बना सकते हैं|

केजरीवाल ने यह सोच कर ही अंतरिम जमानत की याचिका दाखिल की थी कि अगर उन्हें जमानत मिल जाती है, तो वह देश भर में मोदी पर उन्हें झूठे केस में फंसा कर जेल में डालने का आरोप लगाएंगे, जिससे दिल्ली में उन्हें राजनीतिक तौर पर लाभ होगा ही, इंडी एलायंस को भी मोदी के खिलाफ माहौल बनाने में मदद मिलेगी|

शुरू में केजरीवाल ने अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी थी| उन्हें उम्मीद थी कि चुनावों के दौरान ही अगर सुप्रीमकोर्ट गिरफ्तारी को अवैध ठहरा देती है तो भारतीय जनता पार्टी को कम से कम दिल्ली में भारी नुकसान उठाना पड़ेगा| लेकिन जब उन्हें लगा कि गिरफ्तारी को चुनौती वाली याचिका पर फैसले में लंबा समय लग सकता है, तो उनके वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीमकोर्ट में सुनवाई के दौरान रणनीति बदल कर अंतरिम जमानत की अपील कर दी, जिसे सुप्रीमकोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ मंजूर कर लिया, और उन्हें पंजाब के चुनाव तक जमानत पर रिहा करने का आदेश दे दिया|

सवाल यह है कि केजरीवाल की यह रणनीति भारतीय जनता पार्टी के लिए फायदेमंद होगी या नुकसानदायक होगी| अंतरिम जमानत से उनका यह प्रचार तो ढह गया है कि उनकी गिरफ्तारी अवैध थी, क्योंकि आज की तारीख में दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला ही कायम है कि उनकी गिरफ्तारी ठोस सबूतों के आधार पर की गई वैध गिरफ्तारी है| इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के अन्य नेताओं को यह कहने का मौक़ा तो मिल जाएगा कि वह भी राहुल गांधी, लालू यादव और तेजस्वी यादव की तरह भ्रष्टाचार के आरोपों में जमानत पर रिहा हैं| इसलिए यह नरेंद्र मोदी और भाजपा के अन्य नेताओं के तेवरों पर निर्भर रहेगा कि वह केजरीवाल की ओर से होने वाले तीव्र राजनीतिक हमलों का किस तरह जवाब देते हैं|

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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