Bajrang Dal Ban: कर्नाटक के चुनाव में बजरंगबली की एंट्री
अब तक हुए चुनावी सर्वेक्षणों में आगे चल रही कांग्रेस ने बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने की बात कह कर भाजपा को बड़ा मुद्दा पकड़ा दिया है।

Bajrang Dal Ban: कर्नाटक में कांग्रेस का पलड़ा भारी है| अब तक आए सभी चुनाव सर्वेक्षणों में वह सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभर रही है| चुनावों में जीत रही पार्टी को ज्यादा ही एहतियात बरतनी चाहिए| कोई भी गलती कांग्रेस की संभावनाएं खत्म कर सकती है| ऐसे में बहुत सोच कर बोलना चाहिए और फूंक फूंक कर कदम रखना चाहिए| लेकिन कांग्रेस अपने पैरों पर कुल्हाड़ी दर कुल्हाड़ी मार रही है| इससे वह जीती हुई बाजी हार सकती है|

मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जहरीला सांप कह कर अपने ही गले में आफत डाल ली, जबकि नरेंद्र मोदी ने उसे भगवान शिव का सांप कह कर अपने गले में डाल लिया| कांग्रेस को कुछ भी बोलने से पहले यह अच्छी तरह एहसास होना चाहिए कि उसका मुकाबला किससे है| नरेंद्र मोदी को अरविन्द केजरीवाल द्वारा अनपढ़ कहने से वह अनपढ़ नहीं हो जाते| नरेंद्र मोदी को भारतीय समाज, संस्कृति और अध्यात्म का इतना ज्ञान है कि आज की पढ़ाई लिखाई उसके मुकाबले कहीं नहीं ठहरती| वह विरोधियों की गालियों पर गुगली घुमाना जानते हैं| इसीलिए लोकसभा में उन्होंने कहा था कि एक अकेला सब पर भारी है|
मोदी ने जो सांप उल्टा घुमाकर कांग्रेस के गले में डाला था, उससे तो कांग्रेस का पीछा छूटा नहीं और अब चुनाव घोषणापत्र में बजरंग दल को प्रतिबंधित करने का वादा कर दिया| बजरंग दल हिन्दू मान्यताओं की रक्षा करने और धर्म परिवर्तन को रोकने का काम करता है| इससे उसकी छवि एक उत्पाती संगठन की जरुर बनी है, लेकिन वह कोई आतंकवादी संगठन नहीं है कि उस पर प्रतिबन्ध लगाने की बात की जाए|
जब पीएफआई पर प्रतिबन्ध की बात उठती थी, तो कट्टरपंथी मुस्लिम जरुर बजरंग दल को प्रतिबंधित करने की मांग करते थे| पीएफआई एक राष्ट्रविरोधी आतंकी संगठन है, जिसके खिलाफ पूरे सबूत होने के बाद ही केंद्र सरकार ने प्रतिबंधित किया है| अब अगर कांग्रेस बजरंग दल को प्रतिबंधित करने की बात करेगी, तो इसे मुस्लिम तुष्टिकरण ही माना जाएगा, क्योंकि यह सिर्फ कट्टरपंथी मुसलमानों की ही मांग है| वह भी सिर्फ इसलिए, क्योंकि सरकार ने पीएफआई को बैन किया है, तो एक हिन्दू संगठन को भी बैन करो| कांग्रेस हमेशा भाजपा पर धार्मिक ध्रुवीकरण का आरोप लगाती रही है| लेकिन बजरंग दल पर प्रतिबन्ध की बात करके कांग्रेस ने खुद ध्रुवीकरण को बढ़ावा दिया है|
कांग्रेस का यह तर्क उसे होने वाले नुकसान की भरपाई नहीं कर सकता कि बजरंगबली की बजरंग दल से तुलना नहीं की जा सकती| यह सब जानते हैं कि बजरंग दल एक संगठन है, जो बजरंग बली के नाम पर ही बना है और हिन्दू मान्यताओं के लिए सड़कों पर उतरता है| केरल, कर्नाटक और राजस्थान में पीएफआई को फलने फूलने का मौक़ा देकर और आरएसएस, बजरंग दल और विश्व हिन्दू परिषद की आलोचना करके कांग्रेस खुद को धर्म निरपेक्ष नहीं कह सकती|
अपने यूपीए के शासनकाल में हिन्दुओं को आतंकवादी कहने का कांग्रेस ने नतीजा भुगत लिया है कि वह विपक्ष के नेता का दर्जा भी हासिल नहीं कर पा रही| कांग्रेस के नेता आचार्य प्रमोद कर्नाटक के कांग्रेस घोषणा पत्र में बजरंग दल को प्रतिबंधित किए जाने की मांग रखे जाने पर बेहद परेशान हैं| उन्होंने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस को हिन्दू विरोधी पार्टी साबित करना चाहती है, और कांग्रेस के भीतर ही कुछ तत्व हैं, जो हिन्दुओं के खिलाफ कुछ न कुछ कह कर कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने का काम करते हैं| आचार्य प्रमोद ने कहा कि बजरंग दल एक उत्पाती संगठन हो सकता है, लेकिन वह उसे आतंकी संगठन नहीं मानते| उनकी मान्यता है कि कांग्रेस को इस मुद्दे पर पुनर्विचार करना चाहिए| आचार्य प्रमोद सहित कांग्रेस में ऐसे हजारों कार्यकर्ता हैं, जो अपनी पार्टी के हिंदू विरोधी स्टैंड से परेशान हैं|
2019 के लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद ए.के. एंटनी कमेटी ने कांग्रेस अध्यक्ष को सौंपी रिपोर्ट में कहा था कि कांग्रेस ने खुद की छवि मुस्लिम समर्थक पार्टी की बना ली है, इस कारण हिन्दू उससे दूर चले गए हैं, कांग्रेस को अपनी छवि बदलनी चाहिए| लगभग यही बात आचार्य प्रमोद ने कही है, लेकिन कांग्रेस चुनावों में सब भूल जाती है| जैसे इंदिरा गांधी के जमाने में कांग्रेस की नीतियां बनाने का ठेका कम्युनिस्टों को मिला हुआ था, वैसे ही अब कांग्रेस का एजेंडा तय करने की जिम्मेदारी हिन्दू विरोधियों को दे दी गई है|
प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार को भी विवाद खड़ा हो जाने के बाद पता चला कि कांग्रेस के घोषणापत्र में बजरंग दल को प्रतिबंधित किए जाने का मुद्दा है| जबकि सिद्धारमैया और मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ उन्होंने खुद चुनाव घोषणापत्र जारी किया था| तो वह कौन था, जिसने चुनाव घोषणा पत्र में यह मुद्दा शामिल करवाया| कांग्रेस ने बैठे ठाले भाजपा के हाथ में मुद्दा थमा दिया|
पिछले लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस ने इसी तरह की दो गलतियाँ की थीं, एक मल्लिकार्जुन खड़गे की गलती थी, जिसका वीडियो अभी भी वायरल हो रहा है। जिसमें एक सभा में वे कह रहे हैं कि अगर भाजपा जीत गई तो सनातन धर्म का राज फिर से कायम हो जाएगा| दूसरी गलती लिंगायतों को हिन्दुओं से अलग धर्म की मान्यता देने की थी, जिस कारण उसे सत्ता से बाहर होना पड़ा था| भाजपा पहले नंबर की पार्टी बन कर उभरी थी| कांग्रेस नंबर दो पर आई थी|
इस बार उसने हिन्दू संगठन बजरंग दल की तुलना मुस्लिम आतंकी सगठन पीएफआई से करके अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है| अब यह कुल्हाड़ी कितना बड़ा घाव करती है, यह तो चुनाव नतीजे ही बताएंगे, लेकिन कांग्रेस ने हिन्दुओं में कांग्रेस के खिलाफ आक्रोश पैदा करने के लिए पूरा एक हफ्ता दे दिया है| अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हर भाषण बजरंग बली की जय से शुरू होता है और बजरंग बली की जय पर समाप्त होता है| प्रधानमंत्री ही नहीं भाजपा का हर नेता बजरंग बली के नाम पर वोट मांग रहा है| अब अगर बजरंग बली की कृपा से भाजपा का पलड़ा भारी हो गया तो उसके लिए कांग्रेस खुद ही जिम्मेदार होगी|
जो बजरंग दल कहीं भी चुनावों में कोई भूमिका नहीं निभाता था, वह सड़कों पर उतर आया है| भगवा पटका पहने इन हिन्दुओं को कोई चुनाव आयोग नहीं रोक सकता| धर्म के नाम पर प्रचार करने का मौक़ा खुद कांग्रेस ने दिया है| कर्नाटक में हनुमानजी का ख़ास महत्व है। ऐसी मान्यता है कि कर्नाटक की किष्किन्धा की पहाड़ियों में हनुमानजी का जन्म हुआ था|
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ ने पिछले हफ्ते जब कर्नाटक में चुनाव प्रचार की शुरुआत की थी, तो उन्होंने कर्नाटक को हनुमान जी जन्मस्थली बता कर कहा था कि उतर प्रदेश और कर्नाटक का सांस्कृतिक सम्बन्ध त्रेता युग से है, क्योंकि भगवान राम जब अयोध्या से बनवास के लिए निकले थे, तो उन्हें अपना साथी हनुमान के रूप में कर्नाटक से ही मिला था| बेल्लारी के हम्पी को सदियों से किष्किन्धा क्षेत्र या वानर साम्राज्य क्षेत्र माना जाता रहा है|
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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