INDI Alliance: कांग्रेस कमजोर, लेकिन इंडी एलायंस ने हिम्मत नहीं हारी

INDI Alliance: एनडीए का नारा 400 पार का है, और हवा भी ऐसी बनाई जा रही है| कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल पहले की तरह अब कोई बड़ा दावा नहीं कर रहे| लेकिन वे भाजपा के 370 और 400 के दावे पर सवाल उठा रहे हैं|

रक्षात्मक मुद्रा में आने की यह शुरुआत भर है| इंडी एलायंस की तरफ से कोई यह दावा नहीं कर रहा कि भाजपा को सौ से कम सीटों पर निपटा देंगे| जब कभी अखिलेश यादव ने यह कहने की हिम्मत दिखाई, तो वह खुद भी अपने बयान पर हंसते हुए दिखाई दिए| ओपिनियन पोल भी भाजपा और मोदी की हवा बता रहे हैं|

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इस हवा का कोई एक कारण नहीं है, बल्कि कई कारण हैं, जिनमें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर का बनना और जम्मू कश्मीर से 370 का हटना है| मोदी का 2014 वाला फेक्टर भी काम कर रहा है| 2014 का चुनाव मोदी ने गुजरात के विकास माडल और हिन्दू एजेंडे पर लड़कर ही जीता था| इस बार भी इन दोनों एजेंडों का मिश्रण है|

मोदी सरकार ने केंद्र सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों के साथ साथ बिचौलियों को खत्म करके डायरेक्ट बेनीफिट पाने वालों का समर्थक वर्ग अपने साथ जोड़ लिया है| जिनमें महिला लाभार्थियों की संख्या बहुत ज्यादा है| इसके अलावा छह लाख नए वोटर, जिनमें युवक युवतियों का बड़ा वर्ग है, जो मोदी के नेतृत्व में भारत को नए उभरते स्वरूप में देख रहा है|

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हालांकि कोई भी ओपिनियन पोल एनडीए को 400 के पार या 400 को टच करता हुआ नहीं दिखा रहा, लेकिन लगभग सभी ओपिनियन पोल मौजूदा 351 सीटों के आसपास तो बता ही रहे हैं| पिछले दिनों सड़क परिवहन मंत्री और भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नीतिन गडकरी ने भी कहा कि भाजपा की अपनी सीटें 15-20 ज्यादा ही आएंगी, इसका मतलब है कि भाजपा के भीतर भी सोच कम से कम यथास्थिति बनाए रखने की तो है ही|

लेकिन ऐसा नहीं है कि टीवी चैनलों के ओपिनियन पोल देख कर कांग्रेस और इंडी एलायंस के क्षेत्रीय दल अपना मनोबल खो चुके हैं| हालांकि 21 मार्च को सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक साथ प्रेस कांफ्रेंस की, जिसमें तीनों ने कहा कि उनके पास चुनाव लड़ने के लिए पैसे ही नहीं है, मोदी सरकार ने उनके बैंक खाते सील कर दिए हैं| राहुल गांधी ने तो यहाँ तक कहा कि कांग्रेस के नेता चुनावों में प्रचार करने के लिए हवाई जहाज का इस्तेमाल तो दूर ट्रेन पर भी यात्राएं नहीं कर सकेंगे, क्योंकि कांग्रेस के पास ट्रेन का टिकट खरीदने के पैसे भी नहीं है|

अगले ही दिन दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर दायर कांग्रेस की याचिका अस्वीकार कर दी, क्योंकि कांग्रेस ने अपने आयकर रिटर्न में 520 करोड़ पर टेक्स नहीं दिया था, अलबत्ता 520 करोड़ रूपए का कांग्रेस के पास हिसाब किताब ही नहीं है कि वह पैसा कहाँ से आया था|

कांग्रेस के प्रवक्ता और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी की यह दलील ही कांग्रेस को कटघरे में खड़ा कर गई कि आयकर विभाग को पांच साल पुराने रिटर्न को खोलने का अधिकार नहीं है| तर्क यह कि कांग्रेस ने पांच साल पहले आयकर की चोरी की, तो उसे आयकर विभाग भूल जाए|

कांग्रेस ने मोदी सरकार पर हमला करने के लिए हाई प्रोफाईल प्रेस कांफ्रेंस बुलाई थी| वह इस मुद्दे को राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करके जनता की सहानुभूति हासिल करने की कोशिश करती तो ठीक रहता, लेकिन वह आयकर विभाग से लड़ने हाईकोर्ट चली गई, जहां वह खुद दागी ठहरा दी गई|

कांग्रेस की हाईप्रोफाईल प्रेस कांफ्रेंस से उसका मनोबल गिरा हुआ दिखाई दिया था| कांग्रेस को वैसे भी मौजूदा 55 सीटों से ज्यादा की उम्मीद कम ही है| वह यथास्थिति बनाए रखने के लिए भागदौड़ कर रही है| लेकिन इंडी एलायंस के क्षेत्रीय दलों ने हिम्मत नहीं हारी है| वे छह राज्यों के भरोसे बहुमत के करीब पहुंचने की उम्मीद बनाए हुए हैं| वे छह राज्य हैं, तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र, कर्नाटक, बिहार और उत्तर प्रदेश|

तमिलनाडु में इंडी एलायंस का अनुमान उनतालीस की उनतालीस सीटें जीतने का है, इसी तरह केरल में भले ही कांग्रेस और कम्युनिस्ट आमने सामने लड़ रहे हैं, लेकिन वे दोनों इंडी एलायंस का हिस्सा है। उन दोनों का सभी 20 सीटें जीतने का अनुमान है| इन दो राज्यों के बाद इंडी गठबंधन की सबसे ज्यादा उम्मीद महाराष्ट्र और कर्नाटक से है|

महाराष्ट्र से इंडी एलायंस 48 सीटों में से 35 जीतने का अनुमान लगा कर चल रहा है| हालांकि कांग्रेस पिछली बार एक और एनसीपी चार सीटें जीती थीं, एक निर्दलीय जीता था| बाकी सारी 42 सीटें एनडीए जीता था, जिसमें से भाजपा 24 और शिवसेना 18 सीटें जीती थीं|

शिवसेना और एनसीपी का तीन चौथाई से ज्यादा हिस्सा टूट कर एनडीए में आ चुका है| बची खुची 25 फीसदी शिवसेना, 25 फीसदी एनसीपी और बेहद कमजोर बची खुची महाराष्ट्र की कांग्रेस के भरोसे इंडी एलायंस कैसे एनडीए को मात दे देगा, यह समझ से बाहर है| तमिलनाडु और केरल का आकलन फिर भी सही हो सकता है| लेकिन महाराष्ट्र के आकलन पर कोई सहमत नहीं हो सकता|

इसके बाद कर्नाटक आता है, जहां भाजपा पिछली बार 28 में से 25 सीटें जीती थी| विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के पक्ष में मुस्लिम दलित का गठबंधन बना था| उसके चलते वहां कम से कम आधी सीटों पर कांटेदार टक्कर की संभावना बनती है| लेकिन विधानसभा चुनावों की लोकसभा चुनावों से कभी तुलना नहीं की जा सकती|

विधानसभा चुनावों के नतीजों की नजर से कांग्रेस यह मान कर चल रही है कि वह 28 में से 15 सीटें निकाल लेगी| जो वास्तविकता से काफी दूर लगता है, वह पिछली बार सिर्फ एक सीट जीती थी, इस बार उसकी अपनी सरकार के चलते और मुस्लिम दलित गठबंधन के चलते वह अपनी सीटों में बढ़ोतरी जरुर कर सकती है, लेकिन इतनी भी नहीं जितनी खाम ख्याली है|

इसके बाद आता है बिहार और यूपी| इन दोनों ही राज्यों में इंडी एलायंस के आकलन का आंकड़ा चौंकाने वाला है| अगर इंडी एलायंस अपने आकलन का आधा भी जमीन पर उतार पाया, यानी इन दोनों राज्यों में जितनी सीटें वे सोच कर चल रहे हैं, उनमें से आधी भी जीत जाएं, तो मोदी को बहुमत के लाले पड़ जाएंगे|

बिहार और यूपी दोनों ही राज्यों में इंडी एलायंस का आंकड़ा 27-27 सीटें जीतने का है| बिहार में लगभग वही गठबंधन है, जो पिछली बार था, पिछली बार एनडीए 40 में से 39 सीटें जीता था| कांग्रेस एक और आरजेडी एक भी सीट नहीं जीती थी| बिहार में अभी हर रोज दलबदल हो रहा है, उम्मीदवार भी बदले जा रहे हैं, इसलिए जातीय समीकरणों को देखते हुए लड़ाई तो कांटेदार हो सकती है, लेकिन जातीय समीकरणों में एनडीए मजबूत स्थिति में है|

2019 में उत्तर प्रदेश में सपा बसपा गठबंधन 80 में से 15 सीटें जीता था और कांग्रेस एक सीट जीती थी| इस बार सपा कांग्रेस का गठबंधन है, बसपा गठबंधन में शामिल नहीं है| इसलिए यूपी में तो इंडी एलायंस की सीटें बढ़ने की बजाए घटनी चाहिए, क्योंकि कांग्रेस से ज्यादा तो बसपा मजबूत थी, फिर भी गठबंधन सिर्फ 15 सीटें जीता था|

पंजाब और बंगाल में इंडी एलायंस के घटक दल मिलकर चुनाव नहीं लड़ रहे, लेकिन इंडी एलायंस को पंजाब में 13 में से 12 सीटें जीतने का अनुमान है| इनमें से कुछ सीटें आम आदमी पार्टी और कुछ कांग्रेस की मान रहे हैं| केजरीवाल पहले से मान कर चल रहे थे कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के मुकाबले में भाजपा और अकाली दल तीसरे और चौथे नंबर पर चले जाएंगे| लेकिन केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद पंजाब और दिल्ली की राजनीति में बहुत बड़ा बदलाव आएगा|

बंगाल का इंडी एलायंस का आकलन हकीकत के ज्यादा करीब लगता है, लेकिन इस आकलन में ममता से नफरत की गंध आती है, क्योंकि आकलनकर्ता यह मानकर चल रहे हैं कि वहां भाजपा जीत रही है| तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस और कम्युनिस्ट अलग अलग चुनाव लड़ रहे हैं, और तीनों छह से ज्यादा सीटें नहीं जीत सकते|

कांग्रेस को आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से बहुत बड़ी उम्मीद है, हालांकि आंध्र प्रदेश में टीडीपी और भाजपा में सीट शेयरिंग के बाद वहां वाईएसआर कांग्रेस और एनडीए मुख्य मुकाबले में है, लेकिन कांग्रेस आंध्र प्रदेश की 20 और तेलंगाना की 12 सीटें अपने पाले में मान कर चल रही है|

इंडी एलायंस मानकर चलता है कि क्योंकि टीडीपी एनडीए में शामिल हो गई है, इसलिए वाईएसआर कांग्रेस चुनाव बाद उनके साथ आ जाएगी| इंडी एलायंस इन दोनों ही राज्यों की 42 में सीटों में से 32 अपने खाते में जोड़कर चल रही है| इंडी एलायंस ने जो अनुमान लगाया है, उसके मुताबिक़ वह 248 सीटें जीत सकता है|

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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