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अगर महाभारत के अश्वत्थामा जिंदा हैं तो देख रहे होंगे नये भारत की राजनीति

नई दिल्ली, 31 जुलाई। मान्यता है कि महाभारत काल के योद्धा अश्वत्थामा आज भी जिंदा हैं। क्या कोई पांच हजार साल तक जिंदा रह सकता है ? कई लोगों ने उन्हें देखने का दावा भी किया है। अगर महाभारत के अश्वत्थामा जिंदा हैं तो वे नये भारत की राजनीतिक स्थिति भी देख रहे होंगे। नये हस्तिनापुर (दिल्ली) में राजनीतिक तनाव चरम पर है। सत्ता पक्ष और विपक्ष में घमासान मचा हुआ है।

If Mahabharata ashwathama is alive then they would watching politics of new India

शासन के लिए कानून बनाने वाली सभा (संसद) में अभूतपूर्व टकराव है। सभा के लिए निर्धारित समय के पहले दो सप्ताह हंगामे की भेंट चढ़ गये। पेगासस जासूसी कांड, महंगाई, किसान आंदोलन के मुद्दे पर गतिरोध बना हुआ है। सभा की मर्यादा भी भंग हुई। लोकसभा अध्यक्ष के आसन की तरफ कागज फाड़कर फेंके गये। राज्यसभा में विरोधी दल के सांसद ने मंत्री के हाथ से कागज छीन लिया। राज्यसभा में तब और विकट स्थिति पैदा हो गयी जब विरोधी दल (तृणमूल) की सांसद शांता क्षेत्री विरोध करते हुए सदन में ही बेहोश हो गयीं। अश्वत्थामा देख रहे होंगे कि सत्ता के लिए पक्ष और विपक्ष का विरोध अब उन्माद में बदल रहा है।

क्या अश्वत्थामा जिंदा हैं ?

क्या अश्वत्थामा जिंदा हैं ?

महाभारत के युद्ध में पांडवों ने जाल बिछा कर गुरु द्रोणाचार्य का वध किया किया था। द्रोपदी के भाई प्रदुम्न ने ध्यानमग्न द्रोणाचार्य का सिर तलवार से काट दिया था। इस घटना से द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा बदले की आग में जलने लगे। आश्वथामा ने पांडवों से बदला लेने की कसम खायी। महाभारत के युद्ध में पांडवों की जीत हुई। युद्ध के अंतिम दिन पांडव विजय के बाद अपने शिविर में रात्रि विश्राम कर रहे थे। तभी अश्वत्थामा ने कौरवों की बची हुई सेना के साथ सोये हुए पांडवों पर हमला कर दिया। अपने पिता के वध का बदला लेने के लिए उसने प्रदुम्न और उसके भाइयों की हत्या कर दी। पांडवों को मारने का वचन पूरा करने के लिए उसने द्रोपदी के पांच पुत्रों की हत्या कर दी। फिर अश्वत्थामा को बंदी बनाने के लिए अर्जुन का उससे ब्रह्मास्त्र युद्ध हुआ। अर्जुन ने अश्वत्थामा को रस्सियों में बांध कर द्रोपदी के सामने पेश किय। गुरुपुत्र को ऐसी दयनीय अवस्था में देख कर द्रोपदी और अर्जुन को दया आ गयी। तब भगवान श्रीकृष्ण के संकेत पर अर्जुन ने अश्वत्थामा की जान बख्शते हुए सिर्फ आंशिक दंड दिया। अर्जुन ने अश्वत्थामा के सिर के बाल काट लिये और ललाट पर धारण किये हुए मणि को निकाल लिया। तब श्रीकृष्ण ने अश्वत्थामा को शाप दिया कि वह अनेक रोगों से पीड़ित होगा। शरीर से रक्त की दुर्गंध आती रहेगी। समस्त पापों को ढोते हुए तीन हजार साल तक भटकेंगे।

क्या अश्वत्थामा आज भी दिखायी पड़ते हैं ?

क्या अश्वत्थामा आज भी दिखायी पड़ते हैं ?

एक मान्यता है कि महाभारत की घटना पांच हजार साल पुरानी है। चूंकि अश्वत्थामा को श्रीकृष्ण ने तीन हजार साल ही भटकने का शाप दिया था इसलिए वह दो हजार साल पहले ही शापमुक्त हो चुका है। अगर शाप मुक्त होने के बाद भी अश्वत्थामा अपनी इच्छा से जिंदा हों तो वे आज भी हो सकते हैं। भगवान शिव ने उन्हें चिरंजीवी होने का वरदान दिया था। लेकिन यकीन से कुछ नहीं कहा जा सकता। मध्यप्रदेश के एक डॉक्टर ने कुछ साल पहले कहा था , मेरी क्लीनिक में एक रोगी आया था। उसके ललाट पर पहुत बड़ा घाव था। मैंने उसे हर तरह की दवा दी। घाव की सिलाई की लेकिन टांके टिक नहीं रहे थे। इलाज के बाद भी घाव ठीक नहीं हो रह था। एक दिन मैंने उससे मजाक में कहा कि क्या तुम अश्वत्थामा जो तुम्हारे सिर का घाव नहीं भर रहा है ? इतना कहते ही वह रोगी वहां से अदृश्य हो गया। उसे मेरे केबिन से निकलते हुए किसी ने नहीं देखा। बिहार के सासाराम के रहने वाले और बीएचयू से पढ़ने वाले पायलट बाबा ने भी अश्वत्थामा को देखने का दावा किया था। मध्यप्रदेश के असीरगढ़ किले के आसपास के लोगों का कहना रहा है कि अश्वत्थामा किले में भगवान शिव की पूजा करने आज भी आते हैं। लेकिन उनको जिसने देखा वह जीवित नहीं बचा। अगर कोई बच भी गया तो वह पागल हो गया। कुछ लोगों ने जबलपुर के गौरी घाट के किनारे भी अश्वत्थामा को देखने का दावा किया है।

तब और अब की राजनीति

तब और अब की राजनीति

हस्तिनापुर के राजसिंहासन के लिए महाभारत की लड़ाई हुई थी। पांडवों ने युद्ध को टालने के लिए केवल पांच ग्राम मांगे थे। लेकिन कौरवों ने नहीं दिया। युद्ध में भयंकर रक्तपात हुआ। बड़े-बड़े शूरवीर मारे गये। जीत के लिए दोनो पक्षों ने छल और कपट का सहारा लिया। पांडव जीत कर भी राजसत्ता का उपभोग नहीं कर सके। भाई-बंधु और अपनों को गंवा कर जीत तो मिली लेकिन वह किसी काम की नहीं रही। कौरवों के अहंकार और दुराग्राह के कारण यह महायुद्ध हुआ था। सत्ता के लिए आंतरिक युद्ध महाविनाश का कारण बनता है। यह हर काल और समय के लिए सत्य है। पहले राजतंत्र था तो अहंकार की लड़ाई लड़ी गयी। लेकिन अब लोकतंत्र है तब भी ईर्ष्या, द्वेष और अहंकार के कारण मौजूदा भारत की राजनीति तनावपूर्ण हो गयी है। अब भारतीय संघ के दो राज्यों के बीच युद्ध की स्थिति है। असम और मिजोरम में तनातनी बढ़ती जा रही है। पश्चिम बंगाल केन्द्र की सत्ता को चुनौती दे रहा है। इस राजनीति का अंत क्या होगा ? क्या भारत फिर एक बड़े संकट की ओर बढ़ रहा है ?

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