Haryana Politics: आम आदमी पार्टी से अब भाजपा को खतरा
Haryana Politics: आम आदमी पार्टी का जन्म भ्रष्टाचार के खिलाफ और शासन में पारदर्शिता के लिए हुआ था| लेकिन इन दोनों मुद्दों पर पार्टी बैकफुट पर है| इसके बावजूद आम आदमी पार्टी ने चार पांच राज्यों में अपने पैर पसार लिए| कांग्रेस और भाजपा दोनों को सोचना चाहिए कि ऐसा क्यों हुआ, और क्यों हो रहा है| जो लोग यह सोचते हैं कि आम आदमी पार्टी का रथ अब रूक जाएगा, वे गलती कर रहे हैं| आम आदमी पार्टी दो कारणों से आगे बढ़ रही है, एक कारण तो यह है कि वह अत्यंत गरीबों और निम्न मध्यवर्ग को राहत पहुंचाने पर फोकस करती है| प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा भले ही इसे स्वीकार न करें, पिछले एक दशक में इन दोनों वर्गों की दुश्वारियां बढ़ी हैं| दूसरा कारण यह है कि केजरीवाल ने शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में पब्लिक में परसेप्शन बनाने में सफलता हासिल की| यह पब्लिक परसेप्शन दिल्ली से बाहर सारे देश में काम कर रहा है| कांग्रेस और भाजपा केजरीवाल के बनाए परसेप्शन की काट खोजने में विफल रही हैं|
आम आदमी पार्टी ने दिल्ली और पंजाब दोनों ही जगह कांग्रेस को बुरी तरह हरा कर सत्ता हासिल की है। गोवा और गुजरात में कांग्रेस को नुकसान पहुंचा कर राष्ट्रीय पार्टी बनी है| भारतीय जनता पार्टी यह समझती है कि आम आदमी पार्टी उसे गोवा, गुजरात और उत्तराखंड में कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकी, इसलिए वह भाजपा के लिए खतरा कम है, कांग्रेस के लिए ज्यादा है, लेकिन तथ्य इसके विपरीत है|

आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में कांग्रेस को हरा कर सत्ता नहीं छीनी, भाजपा को हराकर सत्ता छीनी है, क्योंकि 2013 में दिल्ली में सत्ता पर दावेदारी भाजपा की थी| कॉमनवेल्थ गेम्स के भ्रष्टाचार के बाद हुए 2013 के चुनावों में भाजपा को 70 की विधानसभा में 31 सीटें मिलीं थी, एक सीट जेडीयू को भी मिली थी| जबकि आम आदमी पार्टी को 28 और कांग्रेस को 8 सीटें मिली थीं|
इसी तरह पंजाब में भी कांग्रेस की सरकार के बाद बारी भाजपा और अकाली दल की थी, लेकिन आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में 2015 और 2020 का चुनाव जीत कर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और सब्सिडी का पब्लिक परसेप्शन बना लिया था, जिसका उसे पंजाब में फायदा हुआ| यह धारणा अभी भी बना हुई है, इसी परसेप्शन पर सवार हो कर आम आदमी पार्टी अब मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में प्रवेश करेगी|

आम आदमी पार्टी इंडी गठबंधन का पूरा फायदा उठाना चाहती है| वह कांग्रेस से सिर्फ दिल्ली और पंजाब में ही 70 से 80 फीसदी सीटें नहीं मांग रही है, बल्कि हरियाणा में भी 10 में से चार सीटें मांग रही है| जबकि दिल्ली और पंजाब प्रदेश कांग्रेस की तरह हरियाणा प्रदेश कांग्रेस भी आम आदमी पार्टी से किसी तरह का गठबंधन करने से इंकार कर रही है| अगर कांग्रेस ने पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में उसकी शर्तों पर लोकसभा सीटों पर गठबंधन नहीं किया, तो वह मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में सभी विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ कर कांग्रेस को नुकसान पहुंचाएगी|
कांग्रेस हरियाणा में अपनी खोई हुई जमीन हासिल करने के लिए कुछ भी करने को तैयार है, इसलिए पर्दे के पीछे उसकी ओम प्रकाश चौटाला की पार्टी इनलोद और आम आदमी पार्टी से बात चल रही है| लेकिन दोनों ही पार्टियां बराबरी का समझौता चाहती हैं, कांग्रेस हाईकमान पर दबाव बनाने के लिए आम आदमी पार्टी के सांसद संदीप पाठक ने एलान कर दिया है कि आम आदमी पार्टी हरियाणा विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी, क्योंकि गठबंधन तो लोकसभा चुनावों के लिए बना है|
इस दबाव की राजनीति का खुलासा तब हुआ, जब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस लोकसभा की सभी दस सीटों पर चुनाव लड़ेगी| न सिर्फ यह, बल्कि उन्होंने विधानसभा चुनाव भी अकेले ही लड़ने का एलान कर दिया| वह यह एलान वक्त से पहले क्यों कर रहे हैं, इसका खुलासा भी इस बात से हो गया, जब उन्होंने कहा कि गठबंधन में सीटों का बंटवारा राजनीतिक दलों के पास मौजूद वोट बैंक के आधार पर होता है| कांग्रेस की आम आदमी पार्टी के अलावा इनलोद के साथ भी बातचीत चल रही थी| हुड्डा का बयान इसीलिए आया है क्योंकि आम आदमी पार्टी और इनलोद अपनी हैसियत से ज्यादा सीटें मांग रही हैं| इसलिए हुड्डा ने लोकसभा की सभी दस सीटों पर लड़ने और विधानसभा चुनाव भी अकेले लड़ने का एलान किया है|
केजरीवाल हरियाणा में कांग्रेस के सहारे लोकसभा चुनावों से ही आम आदमी पार्टी की जमीन तैयार करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं| विधानसभा चुनाव तो वह अकेले लड़ेंगे ही| देवीलाल, बंसीलाल और भजनलाल की राजनीतिक विरासत को आगे ले जाने के लिए हरियाणा में इस समय कोई मजबूत क्षेत्रीय दल नहीं है| अरविंद केजरीवाल ने हरियाणा के दौरे बढ़ा दिए हैं और खुद को हरियाणा का बेटा बताना शुरू कर दिया है|
आम आदमी पार्टी का अगला राज्य हरियाणा हो सकता है| हालांकि 2019 में आम आदमी पार्टी ने 46 सीटों पर चुनाव लड़ा था और सब जगह पर जमानत जब्त हुई थी, लेकिन पंजाब में जीत के बाद आम आदमी पार्टी के हौंसले ज्यादा बुलंद हुए हैं| हरियाणा के एक तरफ दिल्ली है, तो दूसरी ओर पंजाब है, दोनों राज्यों में आम आदमी पार्टी की सरकार है| पंजाबी सूबा बनने से पहले हरियाणा पंजाब का ही हिस्सा था|
याद रखना चाहिए कि 2014 में भारतीय जनता पार्टी ने पंजाबियों को एकजुट करके कांग्रेस और इनलोद से हरियाणा की सत्ता हथियाई थी। ये दोनों ही पार्टियां जाटों की राजनीति कर रही थीं, जिस कारण पंजाबी हिन्दू और अन्य गैर जाट राजनीति में अछूत माने जाते थे| नतीजा यह निकला कि हरियाणा में पहली बार पंजाबी हिन्दू मुख्यमंत्री बना| जाट आधारित कांग्रेस सिर्फ 15 सीटों पर रुक गई थी, जबकि ओम प्रकाश चौटाला की जाट आधारित दूसरी पार्टी इनलोद को 19 सीटें मिलीं थीं| भाजपा ने 90 में से 48 सीटें जीत कर पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया था|
2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा सभी दस सीटें जीत गई थी, लेकिन विधानसभा में सिर्फ 40 सीटें जीती पाई, जो बहुमत से छह सीटें कम थीं, जबकि कांग्रेस पिछली बार की 15 सीटों के मुकाबले 31 सीटें जीतने में कामयाब रही| तीसरे नंबर पर चौटाला के पोते दुष्यंत चौटाला की नई पार्टी जेजेपी रही, जिसने 10 विधानसभा सीटें जीतीं थी| अगर कांग्रेस और जेजेपी को मिल कर बहुमत मिल जाता तो दोनों जाट आधारित पार्टियों का गठबंधन हो कर सरकार बन सकती थी, लेकिन भाजपा के बहुमत के नजदीक होने के कारण दुष्यंत चौटाला ने भाजपा को समर्थन देकर सरकार बनवाई और उसमें उप मुख्यमंत्री बने| जिससे जाट वोटर दुष्यंत चौटाला से नाराज बताए जा रहे है, इसका फायदा कांग्रेस और इनलोद उठा सकती हैं| कांग्रेस पिछले नौ साल से सत्ता से बाहर है, या यों कहिए कि जाट पिछले नौ साल से सत्ता से बाहर हैं, इसलिए कांग्रेस और इनलोद में गठबंधन की बातचीत चल रही है| जबकि केजरीवाल भाजपा का वोट बैंक हथियाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं, जिसमें पंजाबी, बनिया और अन्य जातियां आती हैं|
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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