Urban Naxal Nexus: शहरी नक्सलियों के समर्थन में विदेशी ताकतों की फर्जी रिपोर्ट
नक्सलियों के समर्थन में लगातार मुखर रहने वाले शहरी एक्टिविस्टों के बचाव में अब उनके विदेशी रिंग मास्टर मैदान में उतर गए हैं। एक अमेरिकी कंपनी ने स्टेन स्वामी के कंप्यूटर को किसी के द्वारा हैक कर लेने का दावा किया है।

Urban Naxal Nexus: यह हैरान कर देने वाली खबर है कि कथित तौर पर एक अमेरिकी फोरेंसिक एजेंसी भारत के शहरी नक्सलियों के बचाव में आई है| यह हम अच्छी तरह जानते हैं कि अमेरिका एक पूंजीवादी देश है, जिसका कम्युनिस्ट रूस और चीन के साथ छत्तीस का आंकडा हमेशा से रहा है| फिर यह कैसे संभव है कि अमेरिका की कोई एजेंसी भारत में नक्सलियों का साथ दे रही हो| तो इसका सीधा सा कारण यह समझ में आता है कि वामपंथियों ने जन जागृति के नाम पर देश भर में जो सैंकड़ों एनजीओ खड़े किए थे, उनके माध्यम से शहरी नक्सलियों का अमेरिका से संबंध बना हुआ है| इन सभी एनजीओ को अमेरिका से बेशुमार धन मिलता रहा है, जिसका इन वामपंथी एनजीओ ने अपने राजनीतिक एजेंडा के लिए इस्तेमाल किया|

2002 के गोधरा दंगों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ जितना भी राजनीतिक अभियान चला, उस सब के पीछे इन्हीं एनजीओ का हाथ था| इन्हीं एनजीओ ने अमेरिका के अपने संपर्कों के प्रभाव का इस्तेमाल करके मोदी के अमेरिकी वीजा पर भी रोक लगाई थी| इसीलिए मोदी ने प्रधानमंत्री बनते ही विदेशी धन लेने के क़ानून इतने कड़े बना दिए कि अब लगभग सभी वामपंथी एनजीओ तंगहाली में आ गए हैं| इन विदेशी दानदाताओं का भारत में विकास परियोजनाओं के खिलाफ आन्दोलन चलवाने के पीछे भी स्वार्थ था, वे सब आन्दोलन भी अब रुक से गए हैं, तो वे भी छटपटा रहे हैं| इसलिए यह संभव है कि उन्होंने ही शहरी नक्सलियों के समर्थन में यह फोरेंसिक रिपोर्ट बनवाने में मदद की हो|
आप को याद होगा कि भीमा कोरेगांव हिंसा में वामपंथी विचारधारा के पांच एक्टिविस्ट गौतम नवलखा, वरवरा राव, सुधा भारद्वाज, अरुण फरेरा और वरनोन गोंजालवेस गिरफ्तार किए गए थे| इन्हें ही शहरी नक्सलियों का नाम दिया गया था, जो शहरों में सार्वजनिक जीवन में रहते हुए नक्सलियों के समर्थन में आवाज उठाते रहते हैं| इनमें से गौतम नवलखा पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से संबंध रखने का भी आरोप है|
नक्सलवादियों के समर्थन में बोलने और लिखने वाले इन पाँचों को गिरफ्तार करने पर वाम दलों और कांग्रेस ने मोदी सरकार की निंदा की थी| कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इन शहरी नक्सलियों का खुलेआम समर्थन करते हुए कहा था कि भारत में सिर्फ एक एनजीओ के लिए जगह है, जिसका नाम आरएसएस है| राहुल ने कहा कि सरकार चाहती है बाकी सारे एनजीओ को ताला लगा दो, सारे एक्टिविस्टों को जेल में डाल दो और जो इसके खिलाफ आवाज उठाते हैं उन्हें गोली मार दो| यह कह कर राहुल गांधी ने देश भर के नक्सलियों को प्राणवायु देने वाले शहरी नक्सलियों और वामपंथी एनजीओ के बीच के रिश्तों का भी खुलासा कर दिया था|
बाद में कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे पूर्व केन्द्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने भीमा-कोरेगांव हिंसा में गिरफ्तार शहरी नक्सलियों का सुप्रीमकोर्ट में बचाव किया था| कवि वरवर राव मेडिकल जमानत पर बाहर हैं और वकील सुधा भारद्वाज नियमित जमानत पर बाहर हैं| एक अन्य एक्टिविस्ट आनंद तेलतुंबडे की भी हाल ही में जमानत हुई है| फादर स्टेन स्वामी ने भीमा कोरेगांव की सभा में भडकाऊ भाषण दिया था, जिसके बाद दंगे हुए| कैद के दौरान ही उनकी पिछले साल अस्पताल में मौत हो गई थी|
अब अमेरिका की एक प्राईवेट फोरेंसिक फर्म ने रिपोर्ट दी है कि फादर स्टेन स्वामी के कम्प्यूटर से माओवादियों के साथ उनके संबंधों की जो आपत्तिजनक सामग्री पाई गई थी, उसे उनके कम्प्यूटर में प्लांट किया गया था| यानि भारतीय एजेंसी एनआईए के आरोपों पर सवालिया निशान लगाने के लिए अमेरिकी फर्म का इस्तेमाल किया गया है| एनआईए ने उनके कम्प्यूटर में मिले दस्तावेजों के आधार पर ही फादर स्टेन स्वामी और माओवादी नेताओं के बीच इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन के गंभीर आरोप लगाए थे|
फादर स्टेन स्वामी के भारतीय वामपंथी वकीलों ने यह साबित करने के लिए बोस्टन की एक फोरेंसिक फर्म आर्सेनल कंसल्टिंग को हायर किया| इस फर्म की तथाकथित रिपोर्ट के हवाले से भारत के नक्सल समर्थक इस खबर को फैला रहे हैं कि फादर स्टेन स्वामी के कम्प्यूटर में लगभग 44 दस्तावेज साइबर हैकर ने प्लांट किए थे| हैरानी है कि बेसिरपैर की इस खबर को भारतीय मीडिया भी प्रसारित कर रहा है|
यह खबर कई सवाल खड़े करती है, पहला सवाल तो यह है कि तथाकथित फोरेंसिक जांच करने वाली किसी अमेरिकी फर्म को भारत में जब्त किया गया कम्प्यूटर मिला ही कैसे| दूसरा सवाल यह है कि किसी विदेशी फोरेंसिक फर्म को किसी तरह का कोई सर्टिफिकेट देने का क्या अधिकार है| इस खबर के हवाले से नक्सल समर्थक एनआईए पर आरोप लगा रहे हैं कि उसी ने फादर स्टेन स्वामी के कम्प्यूटर में वे सारे आपत्तिजनक दस्तावेज डाले थे|
शुरुआती दिनों में स्टेन स्वामी ने पादरी का काम किया लेकिन बाद में उन संगठनों के साथ जुड़ गए, जो सरकार के खिलाफ कोई न कोई आन्दोलन चलाते रहते हैं। इस तरह उनके संबंध एक ख़ास विचारधारा के सगठनों के साथ बनते गए| इस विचारधारा के लोग दिखावे के लिए किसी एक एजेंडे को पकड़ कर उसी पर काम करते हैं| स्टेन स्वामी ने आदिवासी अधिकारों और दलितों की लड़ाई का एजेंडा पकड़ लिया| आदिवासियों और दलितों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए उन्होंने झारखंड में विस्थापन विरोधी जनविकास आंदोलन की स्थापना की| फादर स्टेन स्वामी झारखंड आर्गेनाइजेशन अगेंस्ट यूरेनियम रेडियेशन से भी जुड़े रहे, जिसने 1996 में यूरेनियम कॉरपोरेशन के खिलाफ आंदोलन चलाया था, जिसके बाद चाईबासा में बांध बनाने का काम रोक दिया गया|
धीरे धीरे उनके संबंध नक्सलियों से बनते चले गए| 2010 में उन्होंने नक्सलवादियों के समर्थन में एक किताब लिखी, जो जेल में बंद नक्सलियों के बारे में थी| 'जेल में बंद कैदियों का सच' नामक इस किताब में उन्होंने लिखा कि आदिवासी नौजवानों को नक्सली होने के झूठे आरोपों में जेल में डाला गया है| 2014 में उन्होंने एक रिपोर्ट तैयार की, जिसमें उन्होंने कहा कि नक्सली होने के नाम पर हुई तीन हजार गिरफ्तारियों में से 97 प्रतिशत मामलों में आरोपी का नक्सल आंदोलन से कोई संबंध नहीं था| इस तरह वह नक्सलियों की प्रोपेगंडा मशीन के तौर पर काम कर रहे थे| नक्सलियों के समर्थन में काम करने का स्टेन स्वामी का लंबा इतिहास रहा लेकिन अब एक अमरीकी कंपनी यह दावा कर रही है कि नक्सलियों से उनके संबंधों के बारे में झूठ फैलाया गया।
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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