Pakistan Crisis: संकट में फंसे पाकिस्तान के हाथ में परमाणु बम, कितनी सुरक्षित है दुनिया?
पाकिस्तान के चरमपंथी राजनेता, सैनिक अधिकारी और मौलाना लंबे समय से परमाणु हथियारों की धमकी देते रहे हैं। अब ये लोग कह रहे हैं कि अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए पाकिस्तान को परमाणु हथियारों का खुलेआम व्यापार करना चाहिए।

Pakistan Crisis: पाकिस्तान के कायद ए आजम मोहम्मद अली जिन्ना ने कभी कहा था कि पाकिस्तान देश और दुनिया के लिए शान्ति और समृद्धि का काम करेगा किन्तु अपने अस्तित्व के 75 वर्ष में ही यह देश पूरी दुनिया के लिए चिंता का सबब बन चुका है।
परमाणु संपन्न शक्ति पाकिस्तान में इस समय अराजक स्थिति है। आर्थिक रूप से पाकिस्तान टूट चुका है और आतंरिक चुनौतियों तथा अस्थिर राजनीतिक नेतृत्व ने पाकिस्तान के परमाणु भंडार को असुरक्षित कर दिया है। विश्व बिरादरी ऐसी आशंका जता रही है कि यदि पाकिस्तान में जनता विद्रोह कर देती है और स्थिति अराजक होती है तो आतंकी संगठन परमाणु हथियार प्राप्त कर सकते हैं। यह स्थिति विश्व के लिए भयावह होगी।
दिवालिया होने की कगार पर पाकिस्तान
इस्लामिक कट्टरवाद को अपनी मुख्य नीति बनाने और भारत में आतंकवाद को बढ़ावा देने के कारण पाकिस्तान आर्थिक रूप से इतना कमजोर हो गया है कि दिवालिया होने के कगार पर है। पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में महज 3 अरब डॉलर ही बचे हैं और इतने धन से वह 3 सप्ताह के आयात बिलों का ही भुगतान कर सकता है। महंगाई दर 25 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपये की कीमत 260 रुपये जा पहुंची है। जब पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी इमरान खान ने पाकिस्तान की सत्ता संभाली तो लोगों को उम्मीद थी कि पूरी दुनिया घूम चुका यह परिपक्व खिलाड़ी पाकिस्तान को एशिया ही नहीं, विश्व मानचित्र पर भी मजबूत करेगा किन्तु इमरान खान भारत विरोध में इतने अंधे हो गए कि महज 5 वर्षों में पाकिस्तान का सरकारी कर्ज जीडीपी का 78 प्रतिशत हो गया।
कश्मीर से धारा-370 हटाने के केंद्र सरकार के फैसले से गुस्साए इमरान खान ने भारत से व्यापारिक सम्बन्ध भी तोड़ लिए। उधर चीन पर बढ़ती निर्भरता और कर्ज के जाल ने पूरे देश को जकड़ लिया। सऊदी अरब और तुर्की जैसे पाकिस्तान के मित्र राष्ट्र भी अब उसकी मदद करने से पीछे हट रहे हैं। 23वीं बार आईएमएफ से कर्ज मांगने पहुंचे पाकिस्तान को संस्था ने कर्ज देने के लिए जो शर्तें रखी हैं यदि पाकिस्तान उन्हें मान लेता है तो जनता त्राहिमाम कर उठेगी और स्थित भयावह होगी। तब पाकिस्तानी अवाम और सेना के बीच गृहयुद्ध जैसी स्थिति बन जाएगी।
अराजकता से आतंकी संगठनों को फायदा
विश्व बिरादरी ने ऐसी आशंका व्यक्त की है कि यदि पाकिस्तान गृहयुद्ध जैसी किसी स्थिति का सामना करता है तो आतंकी संगठन परमाणु हथियार हासिल करने का प्रयास कर सकते हैं। यदि ऐसा हुआ तो पूरी दुनिया के लिए यह असमय मौत जैसा होगा। वर्तमान में पाकिस्तान के पास 165 परमाणु हथियार हैं जो भारत से अधिक हैं। 2022 में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने कहा था कि पाकिस्तान दुनिया का सबसे खतरनाक मुल्क है क्योंकि उसके पास बिना कंट्रोल के परमाणु हथियार हैं।
हाल ही में इंटरनेशनल एटॉमिक रिसर्च एजेंसी के मुखिया राफेल मारियानो ने भी पाकिस्तान का दौरा किया था ताकि वहां के परमाणु हथियारों की सुरक्षा पर स्थिति स्पष्ट हो। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं व राजनीतिज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान अपने आर्थिक संकट से निपटने के लिए अंतिम विकल्प के रूप में परमाणु हथियारों को बेचने का निर्णय भी ले सकता है। ऐसी स्थिति में जो देश अमेरिका के डर से अपने परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगा चुके हैं उनके सामने पाकिस्तान एक बड़ा विकल्प बन जाएगा और दुनिया में एक बार फिर से परमाणु हथियारों की होड़ बढ़ जाएगी।
चीन बना सबसे बड़ा खलनायक
1960 के दशक में अयूब खान सरकार में मंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने कहा था कि यदि भारत परमाणु बम बना लेता है तो हम घास या पत्ते खा लेंगे, भूखे सो लेंगे लेकिन अपना बम जरूर बनाएंगे। भारत ने परमाणु बम बनाया तो भुट्टो की जिद ने पाकिस्तान को चीन का नजदीकी बना दिया और 1983 की यूएस स्टेट डिपार्टमेंट की एक रिपोर्ट से दुनिया ने जाना कि चीन ने पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम में मदद की और परमाणु बम के लिए पूरा ब्लूप्रिंट पाकिस्तान को दिया है।
यहां तक कि पाकिस्तान के माध्यम से चीन ने और देशों को भी परमाणु तकनीक बेची। इसका प्रमाण था पाकिस्तान के परमाणु बम के जनक डॉ. अब्दुल कादिर खान, जिन पर उत्तर कोरिया, ईरान, ईराक और लीबिया को न्यूक्लियर डिजाइन्स और सामग्री बेचने और चोरी का आरोप लगा।
अभी हाल ही में पाकिस्तान के बुद्धिजीवी परवेज हूदभॉय ने भी कहा कि पाकिस्तान के पास जो परमाणु बम हैं उनका डिजाइन चीन ने दिया था। स्पष्ट है कि पूरी दुनिया आज जिस अंदेशे का सामना कर डर रही है उसका वजीर चीन है और प्यादा है पाकिस्तान।
पाकिस्तान के पास क्या हैं विकल्प?
ऐसा नहीं है कि पाकिस्तान एकमात्र देश है जो दिवालिया होने की कगार पर है। इससे पूर्व 1998 में रूस और यूक्रेन, 2001 में अर्जेंटीना, 2008 में इक्वाडोर, 2012 में ग्रीस, 2017 में वेनेजुएला, 2020 में लेबनान, 2022 में श्रीलंका जैसे देश भी या तो डिफाल्टर हो गए थे या दिवालिया हुए थे। 1991 में खाड़ी युद्ध के चलते भारत भी कुछ ऐसे ही आर्थिक संकटों से घिर गया था किन्तु तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने बाजार को नियंत्रण मुक्त करते हुए इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खोल दिया था और आर्थिक संकट से मुक्ति पाते हुए भारत विश्व की सर्वश्रेष्ठ तेज बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था बन गया था। पाकिस्तान चाहे तो भारत से सबक ले सकता है।
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दूसरा, चीन के साथ भी भारत का गंभीर सीमा विवाद है किन्तु दोनों देशों ने कभी आपसी व्यापार को इसके आड़े नहीं आने दिया। पाकिस्तान के लिए भारत एक बड़ा बाजार था जिसे उसने स्वयं खत्म कर दिया। एक विकल्प यह भी है कि पाकिस्तान विश्व समुदाय को न सिर्फ यह विश्वास दिलाए बल्कि कार्रवाई भी करे कि वह अपने यहां लोकतंत्र को मजबूत करेगा और जिस आशंका से विश्व भयभीत है उसे कम करेगा। इसका सीधा सा उपाय है कि पाकिस्तान अपने परमाणु कार्यक्रम की गोपनीयता को सार्वजनिक करे और परमाणु हथियारों के जखीरे को कम करे। तभी पाकिस्तान पर विश्व विश्वास कर पाएगा अन्यथा तो दुनिया की नजर में पाकिस्तान आग के ढेर पर है और एक छोटी सी चिंगारी उसे और दुनिया को बर्बाद कर सकती है।
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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