Kesavan quits Congress: गैर गांधी अध्यक्ष भी नहीं रोक पा रहा पलायन
सी. राजगोपचारी के पड़पोते केसवन किस पार्टी में शामिल होंगे, यह अभी तय नहीं है, लेकिन खड़गे को लिखे पत्र में उन्होंने साफ लिखा है कि कांग्रेस मूल्यहीन पार्टी हो गई है। वह ऐसी मूल्यहीन पार्टी का प्रचार नहीं करना चाहते।

कांग्रेस में हर रोज कोई न कोई विकेट गिर रहा है। कांग्रेस समझती थी कि किसी गैर गांधी को अध्यक्ष बनाने से विकेट गिरने बंद हो जाएंगे| फिर राहुल गांधी की साढ़े तीन हजार किलोमीटर की यात्रा भी इसीलिए करवाई गई थी कि जितना नुकसान होना था, वह हो चुका, अब आगे रोका जाए| पर कांग्रेस के विकेट गिरने बंद नहीं हुए| राहुल गांधी की यात्रा में शामिल होने वाले भी कांग्रेस छोड़ रहे हैं| पहले उत्तर भारत के कांग्रेसी कांग्रेस छोड़ रहे थे, अब यह लहर दक्षिण भारत में चल पड़ी है| हैरानी यह है कि स्वतन्त्रता सेनानियों के परिवारों से लोग भी कांग्रेस छोड़ रहे हैं|
कुछ दिन पहले एके एंटनी के बेटे अनिल एंटनी ने कांग्रेस छोड़ दी थी, अब भारत के पहले भारतीय गवर्नर-जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी के पड़पोते सीआर केसवन ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया है| वैसे उनके ट्विटर हेंडिल को देख कर हैरानी भी हुई कि उन्होंने उस कांग्रेस पार्टी को जॉइन ही क्यों किया था, जिसे उनके पड़दादा चक्रवर्ती राजगोपालाचारी ने जवाहर लाल नेहरू के साथ टकराव के चलते छोड़ दिया था|

केसवन के ट्विटर हेंडिल पर जो फोटो लगी है, उसमें सरदार पटेल, सुभाष चन्द्र बोस और राजगोपालाचारी खड़े दिखाई दे रहे हैं| इस फोटो में गांधी और नेहरू दोनों नहीं हैं, क्योंकि इन दोनों के साथ राजगोपालाचारी की कभी पटरी नहीं बैठी थी| समाजवाद और आर्थिक नीतियों पर तो दोनों के मतभेद थे ही, तिब्बत और कश्मीर के मुद्दे पर भी गहरे मतभेद थे|
राजगोपालाचारी ने नेहरू से कहा था कि तिब्बत को चीन का अंग मानने की गलती नहीं करनी चाहिए| चीन पर विश्वास नहीं किया जा सकता। इसी तरह कश्मीर के मसले को राष्ट्रसंघ में ले जाने का उन्होंने डटकर विरोध किया था| नेहरू ने दोनों बातें नहीं मानीं| अगर राजाजी की यह सलाह मानी जाती तो ये दोनों मसले आज शायद इतने नासूर न बनते| राजगोपालाचारी ने कांग्रेस छोड़कर कांग्रेस विरोधी स्वतंत्र पार्टी बना ली थी|
अब कांग्रेस के अधिवेशन से ठीक पहले राजगोपालाचारी के पड़पोते का कांग्रेस छोड़ना कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है। वह चाहते तो कांग्रेस में बने रह सकते थे, उन्हें पद की पेशकश भी की गई थी, लेकिन वैचारिक मंथन के बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ने का फैसला किया| हैरानी यह कि वैचारिक मंथन इतना लंबा कैसे चला, क्योंकि उन्होंने जो कारण गिनाए हैं, उनमें एक कारण सर्जिकल स्ट्राईक का प्रूफ मांगना भी है| सर्जिकल स्ट्राईक को अब चार साल हो चुके हैं, कांग्रेस ने चार साल पहले ही सर्जिकल स्ट्राईक का प्रूफ मांग लिया था, इस बीच भी कई बार प्रूफ माँगा| अगर यही कारण है, तो उन्हें चार साल पहले ही इस्तीफा दे देना चाहिए था|
खैर इससे पहले अनिल एंटनी ने भी वैचारिक मतभेदों के चलते कांग्रेस छोड़ दी थी| कांग्रेस बीबीसी की उस डाक्यूमेंट्री का समर्थन कर रही थी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर झूठे आरोपों लगाए गए थे| जबकि अनिल एंटनी ने बीबीसी की डाक्यूमेंट्री का विरोध किया था| दोनों के मुद्दे अंतत: नरेंद्र मोदी से जुड़े हैं, लेकिन एक और बात दोनों में समान रही, जो बात इस्तीफा देते समय अनिल एंटनी ने कही थी, वही बात अब केसवन ने भी कही है|
मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजे इस्तीफे में सी आर केसवन ने लिखा है कि 2001 में वह अच्छा भला सफल कैरियर छोड़कर कांग्रेस के माध्यम से देश सेवा करने के लिए भारत वापस आए थे| यही बात अनिल एंटनी ने भी कही थी, लेकिन दोनों ने कांग्रेस की मूल्यहीन राजनीति के कारण कांग्रेस छोड़ने का निर्णय किया है|
विदेश से अपना अच्छा भला प्रोफेशनल कैरियर छोड़कर जब केसवन भारत आए थे, तब कांग्रेस सत्ता में नहीं थी, बाद में 2004 में जब कांग्रेस सत्ता में आई तो उसने उन्हें श्रीपेरंबुदूर में राजीव गांधी राष्ट्रीय युवा विकास संस्थान का उपाध्यक्ष बना कर राज्य मंत्री का दर्जा दिया, प्रसार भारती बोर्ड का सदस्य और पार्टी का प्रवक्ता भी बनाया था|
अभी हाल ही में जब मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस अध्यक्ष बने तो केसवन को संगठन में पद की पेशकश भी की गई थी, लेकिन उन्होंने वह पद ठुकरा दिया था| वह इसलिए क्योंकि पिछले कुछ महीनों से वह कांग्रेस छोड़ने का मन बना रहे थे, इसलिए वह राहुल गांधी की पद यात्रा में भी शामिल नहीं हुए थे| केसवन तमिलनाडु के हैं, इसलिए जब उन्होंने अपने इस्तीफे की चिठ्ठी ट्विटर पर शेयर की, तो सबसे पहले पी. चिदंबरम के बेटे और कांग्रेस सांसद कार्ती चिदंबरम ने अपनी प्रतिक्रिया दी, उन्होंने ट्विट पर लिखा कि जब जब कोई कांग्रेस छोड़ता है तो उन्हें दुःख होता है|
लेकिन कांग्रेस की मीडिया टीम में उनके साथ काम कर चुकी प्रियंका चतुर्वेदी ने उन्हें बधाई दी है। प्रियंका चतुर्वेदी ने दो साल पहले ही कांग्रेस छोड़कर शिवसेना जॉइन कर ली थी, और अब वह शिवसेना के उद्धव ठाकरे कैंप की राज्यसभा सांसद हैं| अब केसवन किस पार्टी में शामिल होंगे, यह उन्होंने भले ही अभी तय नहीं किया है, लेकिन मल्लिकार्जुन खड़गे को लिखी चिठ्ठी में एक बात उन्होंने स्पष्ट लिखी है कि कांग्रेस मूल्यहीन पार्टी हो गई है| वह ऐसी मूल्यहीन पार्टी का प्रचार नहीं करना चाहते|
लेकिन यह तो तय है कि केसवन किसी न किसी पार्टी को जॉइन जरुर करेंगे। यह उन्होंने मल्लिकार्जुन खड़गे को लिखी चिठ्ठी के आखिर में लिखा भी है कि किसी उचित राजनीतिक मंच से देश की सेवा करेंगे, जिसके माध्यम से वह स्वतन्त्रता सेनानियों के सपनों को पूरा कर सकें| देखना यह है वह पार्टी तमिलनाडु की अन्ना द्रमुक है या भारतीय जनता पार्टी|












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