महाराष्ट्र में शिंदे गुट पर निर्भरता खत्म करने में जुटी भाजपा
महाराष्ट्र में 22 जून को शिवसेना में हुई बगावत के बाद भाजपा के सहयोग से बनी एकनाथ शिंदे की सरकार को 2 महीने से ज्यादा का वक्त हो गया है। लेकिन सरकार की स्थिरता को लेकर भाजपा असहज है और अपने दम पर सरकार को स्थिर करने की रणनीति बनाने में जुटी हैं।

उल्लेखनीय हैं कि अभी तक महाराष्ट्र मंत्रिमंडल में शिंदे गुट से मात्र 9 विधायक ही मंत्री बने हैं। ऐसे में, अभी भी एकनाथ शिंदे के समर्थक 31 विधायक अपने लिए मंत्री पद या महत्वपूर्ण बोर्ड की जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद कर रहे हैं। शिंदे ने अपने साथ शिवसेना छोड़कर आए सभी विधायकों को महत्वपूर्ण पद देने का भरोसा दिया था, लेकिन शिंदे के मुख्यमंत्री पद पा लेने के बाद उनके लिए सभी विधायकों को एडजस्ट करना संभव नहीं है, क्योंकि भाजपा इसके लिए तैयार नहीं है।
महाराष्ट्र सरकार के पिछले मंत्रिमंडल विस्तार में मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को मिलाकर कुल 20 मंत्रियों का मंत्रिमंडल अब तक बन चुका है। इसके अलावा शिंदे सरकार ज्यादा से ज्यादा 23 अन्य विधायकों को मंत्री बना सकती है। जबकि अकेले शिंदे गुट के ही 31 विधायक मंत्री पद पाने की उम्मीद कर रहे हैं। भाजपा ने एकनाथ शिंदे से साफ कह दिया है कि आपको मुख्यमंत्री पद देने के बाद आपके सभी विधायकों को एडजस्ट करना संभव नहीं हैं।
एकनाथ इस बात को समझते है लेकिन विधायकों में इस बात को लेकर नाराजगी है। विधायकों का कहना है कि आगामी विधानसभा चुनाव में दो साल से भी कम का समय बचा है, ऐसे में उनको दी जाने वाली जिम्मेदारी में देरी होती है तो वह अपने क्षेत्र में कैसे काम कर पाएंगे और चुनाव कैसे जीतेंगे?
एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री जरूर बन गए है लेकिन उनके गुट के कई विधायकों का अभी भी भाजपा के साथ सामजस्य नहीं हो पाया है और अपने विधानसभा क्षेत्र में उन्हें भाजपा के विरोध का सामना करना पड़ रहा हैं। विधायक अपने क्षेत्र में अपने आप को अकेला पा रहे हैं और राकांपा, कांग्रेस, शिवसेना के साथ भाजपा के स्थानीय नेताओं के भी विरोध का सामना कर रहे हैं। इसकी वजह से शिंदे गुट के विधायकों के अंदर नाराजगी भी देखी जा रही है।
महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा शुरू हो गई है कि एकनाथ शिंदे के साथ आए कई विधायक अब वापस उद्धव ठाकरे के पास लौट सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो एकनाथ शिंदे की मुश्किलें बढ़ना तय है। शिंदे गुट का दावा है कि उसके पास शिवसेना के 40 विधायकों का समर्थन है। यदि 40 में से चार विधायक भी बगावत करके उद्धव ठाकरे के खेमे में चले जाते हैं तो एकनाथ शिंदे की मुश्किलें बढ़ जाएंगी और वह दलबदल कानून के शिकंजे में फंस सकते हैं। बता दें कि शिवसेना के कुल 54 विधायक हैं। ऐसे में दो तिहाई बहुमत रखना यानी 37 विधायकों का समर्थन बनाए रखना एकनाथ शिंदे के लिए बेहद जरूरी है। विधायकों की नारजगी की वजह से भी एकनाथ शिंदे कैबिनेट का दूसरा विस्तार नहीं कर पा रहे हैं।
शिंदे गुट के विधायकों में पनप रहे असंतोष को भाजपा भांप रही है, इसलिए भाजपा ने सरकार बचाने के लिए शिंदे पर निर्भरता कम करने की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। खबर है कि भाजपा ने कांग्रेस के 10 से ज्यादा विधायकों को अपने साथ आने के लिए मना लिया है और कांग्रेस के ये विधायक जल्द ही भाजपा का दामन थाम सकते हैं और सरकार को स्थिरता प्रदान कर सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि जून में हुए विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस के 7 विधायकों ने भाजपा के उम्मीदवार को वोट दिया था और शिंदे और फड़नवीस सरकार के बहुमत परीक्षण के समय भी कांग्रेस के 10 विधायकों ने गैर हाजिर रहकर भाजपा को राहत पहुचाई थी।
एकनाथ शिंदे के दम पर महाराष्ट्र सरकार में वापसी कर चुकी भाजपा अब किसी भी कीमत पर सरकार को गंवाना नहीं चाहती। इसलिए भाजपा महाराष्ट्र में अपनी सरकार के लिए शिंदे पर निर्भरता कम करने और अपने दम पर सरकार बनाने की रणनीति पर काम कर रही हैं। बिहार में नीतीश के पलटने से सत्ता से बाहर हो चुकी भाजपा महाराष्ट्र में कांग्रेस और राकांपा में सेंध लगाकर अपनी सरकार सुरक्षित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे इस वक्त दोहरी चुनौती का सामना कर रहे है। एक तरफ अपने विधायकों को बचाकर रखने की चुनौती है तो दूसरी तरफ भाजपा की शिंदे पर कम हो रही निर्भरता से भी निपटने की चुनौती है। एकनाथ शिंदे इस बात को अच्छे से जानते हैं कि भाजपा उन्हें तभी तक कंधों पर बिठाएगी जब तक उनके दम पर सरकार है। शिंदे के विधायक कम होने और भाजपा के अपने दम पर पूर्ण बहुमत के दरवाजे पर पहुंचने की स्थिति में शिंदे के लिए शिवसेना के अलग गुट के रूप में बने रहना मुश्किल होगा।
ऐसी स्थिति में एकनाथ शिंदे को भाजपा में विलय करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। शिवसेना पर दावेदारी को लेकर मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में है। अगर शिवसेना उद्धव ठाकरे के पास रहती है तो ऐसे में भी शिंदे के पास भाजपा में अपने गुट के विलय के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा। भाजपा भी यही चाहती है और ऐसी परिस्थितियां निर्माण कर रही है जिससे एकनाथ शिंदे के पास भाजपा में विलय के अलावा कोई विकल्प न बचे।
यह भी पढ़ेंः योगी सरकार क्यों करा रही है मदरसों का सर्वे?
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
-
Parliament Budget Session: 'आप अबोध बालक हो', संसद में हंगामे पर भड़के गिरिराज सिंह -
Uttarakhand Budget सीएम धामी ने पेश किया ₹1,11,703.21 करोड़ का बजट, इतिहास के सबसे बड़े बजट की खास बातें -
Budget Session LIVE: लोकसभा कल सुबह 11:00 बजे तक के लिए स्थगित -
क्या जिंदा है खामेनेई? दुनिया को दिया गया धोखा? पूर्व जासूस का दावा- 2-3 लोगों को पता है सुप्रीम लीडर कहां हैं -
T20 World Cup फाइनल से पहले न्यूजीलैंड के खिलाड़ी ने लिया संन्यास, क्रिकेट जगत में मची खलबली, फैंस हैरान -
IND vs NZ Final: फाइनल से पहले सन्नाटे में क्रिकेट फैंस! आज अपना आखिरी मैच खेलेंगे कप्तान सूर्यकुमार यादव? -
IAS IPS Love Story: 'ट्रेनिंग के दौरान कर बैठे इश्क',कौन हैं ये IAS जिसने देश सेवा के लिए छोड़ी 30 लाख की Job? -
Aaj Ke Match Ka Toss Kon Jeeta 8 March: आज के मैच का टॉस कौन जीता- भारत vs न्यूजीलैंड -
Aaj Ka Match Kon Jeeta 8 March: आज का मैच कौन जीता- भारत vs न्यूजीलैंड फाइनल, टी20 विश्व कप -
Gold Rate Today: जंग में ठंडी पड़ी सोने की कीमत! ₹5060 सस्ता गोल्ड, आपके शहर में आज क्या है 22K-18K का भाव? -
Aaj Ke Final Match Ka Toss Kitne Baje Hoga: आज के फाइनल मैच का टॉस कितने बजे होगा- भारत vs न्यूजीलैंड -
Athira Struggle Story: याददाश्त गंवाई-व्हीलचेयर बनी साथी, फिर भी UPSC में गाढ़े झंडे! IAS बनने में कितनी दूरी?












Click it and Unblock the Notifications