योगी सरकार क्यों करा रही है मदरसों का सर्वे?
योगी आदित्यनाथ सरकार ने उत्तर प्रदेश में संचालित हो रहे मदरसों का सर्वे कराने का आदेश दिया है। एसडीएम, बीएसए तथा जिला अल्पसंख्यक अधिकारी सर्वे में कुल ग्यारह बिंदुओं पर जानकारी इकट्ठा कर 10 अक्टूबर को अपनी रिपोर्ट जिलों के डीएम को सौंपेंगे। डीएम को अपनी रिपोर्ट 25 अक्टूबर तक शासन को देनी है।

माना जा रहा है कि योगी सरकार की नजर अवैध मदरसों में संचालित होने वाली गतिविधयों पर है। कई मदरसों का अतीत दागदार रहा है तथा कई आतंकियों के पकड़े जाने के बाद उनका मदरसा कनेक्शन भी सामने आ चुका है, इसलिये अनुमान लगाया जा रहा है कि योगी सरकार मदरसों के सुदृढ़ीकरण के साथ अवैध तरीके से संचालित हो रहे मदरसों पर नकेल कसने की तैयारी में है। सरकार का मानना है कि देश की सुरक्षा के लिये भी मदरसों के संचालकों और उनके फंडिंग तंत्र पर निगाह रखना जरूरी है।
योगी सरकार के इस फैसले के बाद राजनीति भी शुरू हो गई है। एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने योगी सरकार के इस फैसले को मुसलमानों को परेशान करने वाला तथा मिनी एनआरसी बताया है। दूसरी तरफ जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने फैसले का विरोध करते हुए 6 सितंबर को गैर सरकारी इमदाद से चलने वाले मदरसा संचालकों की बैठक बुलाई है। यूपी के अल्पसंख्यक राज्य मंत्री दानिश अंसारी का कहना है कि मदरसों का सर्वे मार्डन एजुकेशन के लिये बेहद अहम कदम है। सर्वे से मदरसों का पूरा डाटा सरकार के पास होगा, जिससे भविष्य में बनायी जाने वाली योजनाओं को लागू करने में आसानी होगी। मदरसों में अच्छी शिक्षा एवं सुविधा के लिये मदरसा बोर्ड प्रदेश भर में लगातार काम कर रहा है।
बहरहाल, आरोप-प्रत्यारोप के इतर बीते सालों में उत्तर प्रदेश सरकार ने मदरसों की बेहतरी और आधुनिकीकरण के लिये कई फैसले लिये हैं। दीनी तालीम के साथ आधुनिक शिक्षा का समन्यवय बनाना हो या फिर मदरसों का कम्प्यूटरीकरण, प्रदेश सरकार इस पर लंबे समय से काम कर रही है।
मदरसों में शिक्षक भर्ती में टीईटी अनिवार्य करने की कवायद हो या महिला शिक्षकों की मैटरनिटी लीव, कई सुधारात्मक कदम उठाये गये हैं। पर यह भी सच है कि प्रदेश के कई मदरसे राज्य की सुरक्षा व्यवस्था के लिए परेशानी का सबब रहे हैं। बीते एक दशक में जिस तेजी से अवैध मदरसे खुल रहे हैं, वह सरकार के साथ सुरक्षा एजेंसियों के लिये भी चिंता का कारण हैं। गैर सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों की फंडिंग कहां से हो रही है, क्या पढ़ाया जा रहा है और कौन इसे संचालित कर रहा है, सरकार के पास इसकी कोई प्रमाणिक जानकारी नहीं है।
भारत-नेपाल सीमा से लगे सीमावर्ती जिलों और पश्चिमी यूपी में जिस तेजी से अवैध मदरसे खुले हैं वह लंबे समय से उत्तर प्रदेश सरकार की परेशानी का कारण रहे हैं। गोरखपुर के सांसद रहते योगी आदित्यनाथ भारत-नेपाल सीमावर्ती जिलों में खुलने वाले अवैध मदरसों को लेकर लंबे समय से सवाल उठाते आये हैं। बीते अगस्त माह में यूपी एटीएस ने स्वतंत्रता दिवस से पहले जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी हबीबुल इस्लाम उर्फ सैफुल्लाह को कानपुर से गिरफ्तार किया था। जांच में सैफुल्लाह का लिंक इटावा के मदरसा अरबिया कुरानियां से मिला, जहां से उसने मार्च 2020 तक हिफ्ज की पढ़ाई की थी।
सहारनपुर से आतंकी नदीम की गिरफ्तारी हुई थी, उसी की निशानदेही पर सैफुल्लाह पकड़ा गया। पुलिस जांच में सामने आया कि सैफुल्लाह आईएसआई के इशारे पर मदरसे में रहकर यूपी-उत्तराखंड का नया मॉड्यूल तैयार कर बड़ी घटना को अंजाम देने की साजिश रच रहा था।
सहारनपुर का दारुल उलूम देवबंद इस्लामिक दीनी तालीम के लिये दुनिया भर में विख्यात है। दारुल उलूम इस्लामिक शिक्षा का बड़ा केंद्र है। इसके अलावा भी कई मदरसे यहां दीनी तालीम देते हैं, लेकिन बीते एक दशक में देवबंद के मदरसे आतंकी तैयार करने वाले केंद्र के रूप में कुख्यात हो चुके हैं।
एटीएस द्वारा पिछले सालों में पकड़े गये कई आतंकियों के देवबंद कनेक्शन मिल चुके हैं। फरवरी 2019 में पकड़े गये जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शाहनवाज तेली और आकिब अहमद मलिक की गिरफ्तारी के बाद यह खुलासा हुआ था कि यह देवबंद में तालीम लेने के बहाने पहुंचे थे और दहशतगर्द तैयार करने के काम में जुट गये। इन्हें पुलवामा हमले की जानकारी पहले से थी।
दिसंबर 2018 में एनआईए ने अमरोहा में इस्लामिक स्टेट के नये मॉडयूल हरकत उल-हर्ब-ए-इस्लाम का पर्दाफाश करते हुए 13 संदिग्ध आतंकियों को अरेस्ट किया, जिनमें से ज्यादातर ने देवबंद के मदरसों में रहकर दीनी तालीम हासिल की थी।
2017 में मुजफ्फनगर से आतंकी संगठन अंसारुल्ला बांग्ला टीम का सक्रिय सदस्य अब्दुला अल मामून हो या फिर बंगाल पुलिस द्वारा दिल्ली से पकड़ा गया रजाउल रहमान, या फिर एटीएस द्वारा लखनऊ से पकड़े गये इमरान, रजीमुद्दीन, मोहम्मद फिरदौस, सभी का कनेक्शन देवबंद से किसी ना किसी रूप में जुड़ा हुआ था।
दिसंबर 2020 में प्रतिबंधित संगठन सिमी के सदस्य अब्दुला दानिश को दिल्ली पुलिस एवं यूपी एटीएस की टीम ने अलीगढ़ से पकड़ा। उसके ऊपर 2008 में अहमदाबाद सीरियल बम ब्लॉस्ट की साजिश में शामिल होने का आरोप था। अब्दुला का आजमगढ़ में जामिया-तुल-फलाह मदरसा का लिंक सामने आया।
इसी साल मार्च में एटीएस ने देवबंद से 19 साल के इनामुल हक को अरेस्ट किया, जो एक मदरसे के हास्टल में रह रहा था। मूलरूप से झारखंड के रहने वाले इनामुल पर आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा में शामिल होने की योजना बनाने का आरोप था। कुछ साल पहले दिल्ली पुलिस द्वारा पकड़े गये इंडियन मुजाहिद्दीन के आतंकी एजाज शेख ने भी खुलासा किया था कि उसके तीन आतंकी साथी देवबंद में छात्र के रूप में रह रहे थे, जो अफगानिस्तान में एयर स्ट्राइक में मारे गये थे।
आईबी के इनपुट के अनुसार आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिद्दीन और इंडियन मुजाहिद्दीन की पश्चिमी यूपी तथा पूर्वांचल के कई जिलों में गहरी पैठ है। कई स्लीपिंग मॉडयूल मदरसों को अपना ठिकाना बनाकर तालीम की आड़ में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देते हैं। मदरसों को आतंक का गढ़ बनाने की शुरुआत प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया यानी सिमी ने की थी। अलीगढ़ से शुरू हुए इस संगठन ने इस्लामिक गतिविधियों की आड़ में मदरसों को टार्गेट किया और दीनी तालीम के नाम पर आतंक का पाठ पढ़ाना शुरू कर दिया।
मदरसों के आतंकी कनेक्शन को देखते हुए ही उत्तर प्रदेश सरकार राज्य के सभी मदरसों का आंकड़ा जमा कर रही है। सरकारी आंकड़ों के हिसाब से उत्तर प्रदेश में कुल 16,461 मदरसे हैं, जिनमें से 558 मदरसों को सरकारी सहायता मिलती है। हालांकि गैर सरकारी आंकड़ों के हिसाब से यूपी में 40 हजार से ज्यादा गैर मान्यता प्राप्त मदरसे संचालित हो रहे हैं। केवल देवबंद में 100 से ज्यादा मदरसे संचालित हो रहे हैं, जिनमें कई गैर मान्यता प्राप्त हैं।
गैर सरकारी आंकड़े के अनुसार जमीयत उलेमा-ए-हिंद ही देश भर में 20 हजार से ज्यादा मदरसे संचालित कर रहा है। सरकार के पास इसका कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है कि अवैध तरीके से चल रहे मदरसों की फंडिंग कौन कर रहा है? मदरसों में कौन सा पाठ्यक्रम संचालित किया जा रहा है? मदरसों में बच्चों के साथ होने वाले बुरे सुलूक की शिकायतें भी आती रही हैं। माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार मदरसों में सुधार के साथ आतंकी गतिविधियों में लिप्त मदरसों को चिन्हित करना चाहती है।
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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