पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव के नतीजों पर लटकी तलवार, कोर्ट ने दिया बड़ा आदेश
पश्चिम बंगाल में पंचाय चुनाव के दौरान हुई हिंसा को लेकर प्रदेश के राज्यपाल आनंद बोस ने प्रदेश के चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वह लोगों की शिकायत को हाई कोर्ट के साथ पीस रूम में प्राप्त करे ताकि इसकी न्यायिक स्क्रूटनी हो सके।
राज्यपाल ने प्रदेश चुनाव आयोग को यह सुझाव भी दिया है कि वह नतीजों को फिलहाल सस्पेंशन में रख सकते हैं जबतक कि चुनाव में हिंसा की शिकायतों और अन्य तरह की गड़बड़ियों की जांच नहीं हो जाती है। राज्यपाल के इस सुझाव पर हाई कोर्ट ने चुनाव को नई एडवायजरी जारी की है।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने आदेश दिया है कि जैसा कि हमारे आदेशों की श्रंखला में देखा जा सकता है कि हम पूरी परिस्थिति पर नजर बनाए हैं, हम यह साफ कर देना चाहते हैं कि अभी तक जो भी हुआ है, वोटिंग से लेकर नतीजों तक यह सब कोर्ट में दायर याचिकाओं पर सुनवाई के अधीन है।
कोर्ट ने कहा कि हम चुने गए उम्मीदवारों को नोटिस जारी करते हैं कि उनका निर्वाचन अभी कोर्ट के अगले आदेश के अधीन है। चुनाव के नतीजे न्यायिक स्क्रूटनी के अधीन हैं। हाई कोर्ट ने प्रदेश चुनाव आयोग से कहा है कि सभी 7500 शिकायतें जो राजभवन के पीस रूम में प्राप्त हुई हैं उसे चुनाव आयोग को भेजा जाए।
जिस तरह से पंचायत चुनाव के दौरान बड़े स्तर पर हिंसा हुई है उसपर कोर्ट ने चुनाव आयोग को फटकार लगाते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया पर्याप्त नहीं नजर आ रही है।
कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस टीएस शिवगणनम और जस्टिस हिरण्मय भट्टाचार्य की खंडपीठ चुनाव के नतीजों को रद्द करने के साथ हिंसा और चुनाव में गड़बड़ियों को लेकर दायर की गई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। इस पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग को लेकर भी याचिका दायर की गई है। बता दें कि 8 जुलाई को मतदान के दौरान हुई हिंसा में कई लोगों की मौत हुई थी।
कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग का जवाब पर्याप्त नहीं है। यह स्पष्ट नहीं है कि आखिर आयोग पहले से सक्रिय क्यों नहीं है। नतीजों के बाद भी राज्य में हिंसा को चुनाव आयोग रोक नहीं पा रहा है। अगर राज्य सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा नहीं कर सकती है तो यह गंभीर विषय है।












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