बंगाल: भवानीपुर सीट से TMC विधायक ने दिया इस्तीफा, अब ममता बनर्जी लड़ेंगी उपचुनाव

कोलकाता, 21 मई: पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया, लेकिन ममता बनर्जी नंदीग्राम से चुनाव हार गईं। ऐसे में 6 महीने के अंदर उनको चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचना जरूरी है, वरना उनके हाथ से सीएम पद की कुर्सी चली जाएगी। इसी बीच शुक्रवार को बंगाल में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम हुआ, जहां भवानीपुर सीट से टीएमसी विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने इस्तीफा दे दिया। अब इस सीट से टीएमसी सुप्रीमो चुनाव लड़ेंगी, क्योंकि ये उनकी पारंपरिक सीट रही है।

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    Mamata Banerjee Bhawanipore से लड़ेंगीं उपचुनाव, Sovendeb chattopadhyay का इस्तीफा | वनइंडिया हिंदी
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    दरअसल बंगाल की कुछ सीटों पर अभी चुनाव बाकी हैं, लेकिन टीएमसी के बड़े नेता चाहते हैं कि ममता बनर्जी वहां से ना लड़कर भवानीपुर में वापसी करें। ऐसे में टीएमसी सुप्रीमो ने भी भवानीपुर से चुनाव लड़ने का मन बना लिया है। इसी के चलते विधायक शोभनदेव ने शुक्रवार को स्पीकार बिमान बनर्जी के पास पहुंचकर अपना इस्तीफा सौंपा। मामले में स्पीकर ने कहा कि मैंने विधायक से पूछा कि वो स्वेच्छा से इस्तीफा दे रहे या उन पर किसी तरह का दबाव है। जिस पर शोभनदेव ने स्वेच्छ से पद छोड़ने की बात कही। इस वजह से उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है।

    वहीं इस्तीफा देने के बाद मीडिया से बात करते हुए शोभनदेव ने कहा कि सीएम दो बार भवानीपुर से चुनाव जीत चुकी हैं। मैंने सभी पार्टी नेताओं से सुना कि वहां से चुनाव लड़ना चाहती हैं, ऐसे में मैंने खुद सीट छोड़ने का फैसला लिया। उन्होंने साफ किया कि उनके ऊपर किसी तरह का दबाव नहीं था। साथ ही किसी दूसरे नेता में सरकार चलाने की हिम्मत नहीं है, वो सीट ममता बनर्जी की थी, वो सिर्फ उसकी रक्षा कर रहे थे।

    शुभेंदु के चक्कर में गई सीट
    दरअसल चुनाव से पहले ममता बनर्जी के करीबी रहे शुभेंदु अधिकारी ने बगावत कर बीजेपी का दामन थाम लिया। साथ ही चैलेंज किया कि वो नंदीग्राम से ममता बनर्जी को बंपर वोटों से हराएंगे। ममता बनर्जी ने भी चैलेंज को स्वीकार करते हुए अपनी पारंपरिक सीट भवानीपुर को छोड़ दिया और नंदीग्राम चुनाव लड़ने पहुंच गई। यहां पर शुभेंदु का दांव सही बैठा और कड़े मुकाबले में ममता बनर्जी हार गईं।

    बिना विधायक बने कैसे बनीं सीएम?
    भारतीय संविधान के मुताबिक हार हुआ प्रत्याशी भी मुख्यमंत्री बन सकता है, लेकिन 6 महीने के अंदर उसको विधानसभा या फिर विधान परिषद का सदस्य बनना होगा, नहीं तो उसकी कुर्सी चली जाएगी। बंगाल में विधान परिषद नहीं है, ऐसे में ममता बनर्जी को चुनाव लड़कर विधानसभा पहुंचना पड़ेगा। इससे पहले उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ और महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे ने भी इसी तरह से सीएम की कुर्सी पाई थी।

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