बंगाल: खुद को 'जिंदा' साबित करने के लिए 2 साल से भटक रहा बुजुर्ग, नहीं मिल रहा न्याय
West Bengal: बंगाल में एक गरीब बुजुर्ग के साथ अन्याय का मामला सामने आया है जो कि वहां के अधिकारियों की लापरवाही को दर्शाता है। बुजुर्ग दो साल से खुद को जिंदा साबित करने के लिए इधर से उधर भटक रहा है।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बंगाल से एक हैरान और भावुक कर देने वाला मामला सामने आया है। ममता सरकार में अधिकारियों की ऐसी लापरवाही सुनकर आप भी सिर पकड़ लेंगे। दरअसल, यहां एक जिंदा शख्स खुद को जिंदा साबित करने के लिए दर दर भटक रहा है। वह अधिकारियों से समस्या सुलझाने की लगातार गुहार लगा रहा है लेकिन कोई समस्या सुनने वाला नहीं है। दो साल से न्याय नहीं मिल पा रहा है।
क्या है मामला?
इंडिया डुडे की रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के 79 वर्षीय विजय हाथी को बिना पेंशन के अपना बुढ़ापा काटना पड़ रहा है। वह अधिकारियों के दर पर लगातार चक्कर काट रहे हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो पा रही है। दरअसल, करीब दो साल पहले उन्हें कागज पर मृत घोषित कर दिया गया था जिससे उनकी पेंशन बंद कर दी गई थी। अब उनका परिवार मुश्किल से बुनियादी जरूरतें पूरी कर पाता है।
दो साल पहले घोषित किया था मृत
विजय हाथी ने कहा कि उन्हें साल पहले पब्लिक रिकॉर्ड पर मरा हुआ घोषित कर दिया गया उसके बाद उनकी पेंशन रुक गई। फिर उन्होंने प्रखंड विकास अधिकारी (BDO) से संपर्क किया और तब मुझे पता चला कि मुझे मृत घोषित कर दिया गया है, और मुझको पश्चिम बंगाल सरकार से मिलने वाले हजार रुपये आगे से नहीं मिलेंगे।
ग्राम पंचायत सदस्य की गलती ने बंद करवा दी पेंशन
ग्राम पंचायत सदस्य चितरंजन हलदर ने ही गलत एंट्री कर दी थी जिसके कारण हाथी की पेंशन समाप्त हो गई। 2020 में जब से उनकी पेंशन बंद हुई है, हाथी अपनी दुर्दशा को खत्म करने के लिए अधिकारियों के पास हर सरकारी दफ्तर में चक्कर काट रहे हैं। बहरहाल, पिछले दो वर्षों में उनके लिए कुछ भी नहीं बदला है।
दो वक्त की रोटी के लिए तरस रहे: पीड़ित
ढोलट के तेली गांव में विजय हाथी अपनी पत्नी और एक बीमार बेटे के साथ रहते हैं, उनका गुजारा बहुत ही मुश्किल से हो पा रहा है। अभी यह हालत हो गई है कि दो वक्त की रोटी नहीं पूरी हो पा रही है। उनका घर भी पूरी तरह से जर्जर हो चुका है और नीचे की तरफ लटक गया है। उनका एकलौता बीमार बेटा झोपड़ी के कोने पर तपती गर्मी के बीच गंदा कंबल से ढका रहता है। विजय हाथी के पास दवा खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं।












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