'बीजेपी के साथ रहना नकारात्मक....': नेताजी के पोते चंद्र कुमार बोस ने यह कहकर छोड़ दी पार्टी
नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पोते चंद्र कुमार बोस ने मतभेदों का हवाला देकर बुधवार को बीजेपी से इस्तीफा दे दिया है। 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले उनका इस तरह से पार्टी छोड़ना पश्चिम बंगाल में बीजेपी के लिए बहुत बड़े झटके की तरह है।
अपने इस्तीफे में उन्होंने कहा है कि बोस बंधुओं (नेताजी सुभाष चंद्र बोस और उनके बड़े भाई शरत चंद्र बोस) के विचारों को आगे बढ़ाने में उन्हें बीजेपी में न तो प्रदेश से और न ही केंद्र से कोई समर्थन मिल पा रहा था।

मेरे दादा ने सभी धर्मों को भारतीय की तरह देखा- चंद्र कुमार बोस
अपने इस्तीफे के बाद न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए बयान में चंद्र कुमार बोस ने कहा है, '2016 में मैं भारतीय जनता पार्टी में योगदान किया था। मैं नरेंद्र मोदी के नेतृत्व से प्रेरित था। मेरा विचार मेरे दादा शरत चंद्र बोस और उनके छोटे भाई नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आदर्शों पर है.....उनका आदर्श ये था कि उन्होंने सभी धर्मों को भारतीय की तरह देखा...वे विभाजन और सांप्रदायिकता के खिलाफ लड़े.... '
'मैंने सोचा कि इस पार्टी के साथ रहना एक नकारात्मक कार्य है'
उन्होंने आगे कहा, 'बंगाल रणनीति को लेकर मैंने बीजेपी के प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व को कई सारे प्रस्ताव दिए....लेकिन, उन्होंने मेरे प्रस्तावों को कभी लागू नहीं किया, जबकि उन्होंने उसे उपयोगी माना था....जब मेरा कोई भी प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया गया, तब पार्टी के साथ रहने का कोई मतलब नहीं है.....मैं काम नहीं कर पा रहा....इसलिए मैंने सोचा कि इस पार्टी के साथ रहना एक नकारात्मक कार्य है.....मैंने जेपी नड्डा को यह स्पष्ट कर दिया है, पार्टी के लिए मेरी शुभकामनाएं। लेकिन, उन्हें सभी समुदायों को एकजुट करना चाहिए......'
मेरे लिए बीजेपी का सदस्य रहना असंभव हो गया है-चंद्र कुमार बोस
इससे पहले अपने इस्तीफे में बोस ने लिखा, 'बंगाल के लोगों तक पहुंचने के लिए मैंने बंगाल की रणनीति का सुझाव एक विस्तृत प्रस्ताव के तौर पर रखा था। मेरे प्रस्तावों को नजरअंदाज किया गया। इन दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों में मेरे लिए बीजेपी के सदस्य के रूप में बने रहना असंभव हो गया है।'
दादा की जयंती पर दिया इस्तीफा
उन्होंने पार्टी को भेजे त्याग पत्र में लिखा है, 'मैंने यह कदम उठाने के लिए बोस परिवार के लिए महत्वपूर्ण तारीख को चुना है, जो कि मेरे दादा शरत चंद्र बोस की 137 जयंती है, नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बड़े भाई, मेंटर और कमांडर-इन-आर्म्स।'
बीजेपी में आजाद हिंद मोर्चा बनना था- बोस
भाजपा में में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और विकास कार्यों को प्रेरणा बताते हुए उन्होंने यह शिकायत की है कि 'यह भी तय किया गया था कि बीजेपी के फ्रेमवर्क के अंदर आजाद हिंद मोर्चा भी बनेगा, जिसका प्राथमिक उद्देश्य सभी समुदायों को, चाहे उनका धर्म, जाति और पंथ कुछ भी हो, भारतीय के तौर पर एकजुट करने वाले नेताजी की विचारधारा को बढ़ावा देना था।'
अपने इस्तीफे के बाद उन्होंने इंडिया बनाम भारत की चर्चा को लेकर कहा है कि ये कोई मुद्दा नहीं है, क्योंकि संविधान में स्पष्ट तौर पर बताया गया है कि इंडिया भारत है।












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