अगर खून खराबा जारी रहा तो, बंगाल में पंचायत चुनाव रोक दिए जाने चाहिए: कलकत्ता हाई कोर्ट
कलकत्ता हाई कोर्ट ने बंगाल में पंचायत चुनाव में लड़ रहे उम्मीदवारों के नाम कैंडिडेट्स की लिस्ट से गायब करने के मामले में सुनवाई के दौरान बड़ा निर्देश दिया। न्यायमूर्ति ने राज्य चुनाव आयोग की व्यवस्थाओं पर भी कड़ी फटकार ल
बंगाल पंचायत चुनाव में हिंसा को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट ने बुधवार यानी आज बड़ा आदेश दिया है। कहा कि अगर खून खराबा जारी रहता है, तो बंगाल में पंचायत चुनाव रोक दिए जाने चाहिए। कोर्ट चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के नाम कैंडिडेट्स की लिस्ट से गायब करने के मामले में सुनवाई कर रहा था। न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा ने राज्य से व्यापक हिंसा की खबरों पर रोष व्यक्त किया।
न्यायमूर्ति सिन्हा ने कहा कि पंचायत चुनावों में इतनी हिंसा। अगर खून खराबा जारी रहता है, तो मतदान रोक दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को सवालों के घेरे में लिया।

कोर्ट ने पूछा कि एक पंचायत चुनाव में इतनी हिंसा। इतना विकार। इतनी सारी झड़पें। यह एक राज्य के लिए शर्म की बात है। इतनी अव्यवस्था क्यों है? राज्य चुनाव आयोग क्या कर रहा है? आपको बता दें कि बंगाल के उत्तर दिनाजपुर, मुर्शिदाबाद और दक्षिण 24 परगना के भांगर में भारी हिंसा देखने को मिली है। हिंसा में कम से कम 4 लोगों की मौत हो चुकी है।
बंगाल के भांगर में नामांकन के दौरान हिंसा
नामांकन के दूसरे दिन दक्षिण बंगाल के भांगर में इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई। बम फेंके जाने से लेकर गोलियां तक चलीं। नामांकन दाखिल करने के आखिरी दिन 15 जून को भांगर ब्लॉक-2 के विजयगंज बाजार में भारी हिंसा हुई, जहां वैन और कारों को आग लगा दी गई। झड़पों में दो लोगों, एक ISF और एक TMC कार्यकर्ता की मौत हो गई।
उत्तर दिनाजपुर के चोपड़ा में वाम-कांग्रेस की एक रैली में बदमाशों ने फायरिंग की, जिसमें तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। 15 जून को मुर्शिदाबाद में भी हिंसा की सूचना मिली थी, जब एक स्थानीय टीएमसी नेता की घर लौटते समय हमले के घंटों बाद मौत हो गई थी। टीएमसी नेता मोजम्मेल शेख पर नबाग्राम में उस समय हमला किया गया जब वह नामांकन पत्र दाखिल कर घर आ रहे थे।
ममता ने अपनी पार्टी को हिंसा से दूर बताया
हिंसा को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि बंगाल के भांगर में हिंसा इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) द्वारा मुसलमानों को भड़काने और क्षेत्र में वाहनों में तोड़फोड़ करने के 'प्रतिशोध' में थी। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी हिंसा की अन्य घटनाओं में शामिल नहीं थी।












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