Bengal Politics: करीब एक दशक बाद ममता के फुरफुरा शरीफ पहुंचने पर विपक्ष क्यों उठा रहा सवाल?
Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हुगली जिले के फुरफुरा शरीफ का दौरा किया है, जहां से उन्होंने 'सद्भावना, शांति और एकता' का संदेश दिया। लेकिन विपक्ष ने इस यात्रा को लेकर सवाल उठाए हैं और इसे आगामी विधानसभा चुनावों से जोड़ दिया है।
ममता बनर्जी लगभग दस साल बाद फुरफुरा शरीफ पहुंचीं, जहां उन्होंने स्थानीय धार्मिक नेताओं के साथ बैठक की और मुस्लिम समुदाय के इफ्तार कार्यक्रम में भी भाग लिया। फुरफुरा शरीफ बंगाल के मुस्लिम समुदाय में एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता है और यहां के 'पीर' धार्मिक और राजनीतिक दृष्टि से बहुत ही ज्यादा प्रभावशाली माने जाते रहे हैं।

Bengal Politics: विपक्ष ने क्यों उठाए सवाल?
ममता बनर्जी की इस यात्रा को लेकर विपक्षी दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री का यह दौरा पूरी तरह से राजनीतिक है और इसका मकसद आगामी विधानसभा चुनावों (2026)में मुस्लिम समुदाय का समर्थन मजबूत करना है। उन्होंने कहा, 'ममता बनर्जी पहले भी फुरफुरा शरीफ के धार्मिक नेताओं का समर्थन ले चुकी हैं, लेकिन उन्होंने अपने कई वादों को पूरा नहीं किया।'
बीजेपी नेता और विधानसभा में नेता विपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने भी इस दौरे को 'चुनावी अनुष्ठान' करार दिया। उन्होंने कहा, 'ममता बनर्जी चुनाव नजदीक आते ही फुरफुरा शरीफ जाती हैं।' वहीं, सीपीएम (CPM) नेता सुजान चक्रवर्ती ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री मुस्लिम समुदाय के भीतर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं।
Bengal News: ममता बनर्जी का जवाब
ममता बनर्जी ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह पहले भी कई बार फुरफुरा शरीफ जा चुकी हैं और इस दौरे को लेकर सवाल उठाना अनुचित है।
उन्होंने कहा, 'मैं काशी विश्वनाथ मंदिर, पुष्कर जाती हूं, दुर्गा पूजा और काली पूजा में भाग लेती हूं, क्रिसमस मनाती हूं, होली की बधाइयां देती हूं, लेकिन तब सवाल क्यों नहीं उठाए जाते?' उन्होंने इस दौरान फुरफुरा शरीफ के विकास के लिए एक पॉलिटेक्निक कॉलेज स्थापित करने की भी घोषणा की।
Bengal Political News: फुरफुरा शरीफ का राजनीतिक प्रभाव
फुरफुरा शरीफ के धार्मिक नेताओं का बंगाल के मुस्लिम समुदाय पर खासा प्रभाव है। यही वजह है कि ज्यादातर राजनीतिक दल इस समुदाय के समर्थन को अपने पक्ष में करने की कोशिश करते रहे हैं। हालांकि, इस बार का दौरा कुछ अलग इसलिए भी माना जा रहा है, क्योंकि फुरफुरा शरीफ के प्रमुख पीरजादा अब्बास सिद्दीकी और उनके भाई इस कार्यक्रम से नदारद रहे।
Bengal News: क्या है राजनीतिक समीकरण?
जानकारों का मानना है कि बंगाल में मुस्लिम वोट बैंक एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 2021 के विधानसभा चुनावों में अब्बास सिद्दीकी की पार्टी इंडियन सेक्युलर फ्रंट (IFS) ने लेफ्ट पार्टियों और कांग्रेस के साथ गठबंधन कर ममता बनर्जी के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की थी। इस बार के चुनावों में यह देखना दिलचस्प होगा कि फुरफुरा शरीफ के मुस्लिम नेताओं का रुख किस ओर रहता है। (इनपुट-पीटीआई)












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