बीजेपी-विरोधी महागठबंधन पर नीतीश से मुलाकात के बाद बोलीं ममता- 'no ego clash'
बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने एंटी बीजेपी फ्रंट के लिए ममता बनर्जी से मुलाकात की है। ममता ने भी इस पहल का समर्थन किया है और कहा है कि अहंकार का कोई टकराव नहीं है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बिहार के अपने समकक्ष नीतीश कुमार और उनके डिप्टी तेजस्वी यादव के साथ मुलाकात के बाद कहा है कि भाजपा-विरोधी महागठबंधन के मसले पर अहंकार का कोई टकराव नहीं है। उनके मुताबिक अगला आम चुनाव जनता बनाम बीजेपी होने जा रहा है।

बिहार में हो सर्वदलीय बैठक- ममता
ममता ने दावा किया कि वह पहले भी कह चुकी हैं कि बड़े चुनावी संघर्ष के लिए समान-विचारधारा वाले विपक्षी दलों के साथ आने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। वो बोलीं, 'मैंने नीतीश कुमार से सिर्फ एक अनुरोध किया है। जयप्रकाश (नारायण) जी का आंदोलन बिहार से शुरू हुआ था। अगर हम बिहार में एक सर्वदलीय बैठक करते हैं, तब हम फैसला कर सकते हैं कि हमें आगे किधर जाना है।'
बीजेपी को शून्य पर लाया जाना चाहिए-ममता
टीएमसी सुप्रीमो ने कहा कि 'लेकिन पहले हमें एक संदेश देना है कि हम एकजुट हैं। मैंने पहले भी कहा था कि मुझे कोई आपत्ति नहीं है। मैंने हमेशा कहा है कि बीजेपी को शून्य पर लाया जाना चाहिए। वह मीडिया और लगातार की फर्जी कहानियों की मदद से बड़े हीरो बन गए हैं। वह सिर्फ जुमलाबाजी और गुंडागर्दी में शामिल हैं।'

बहुत ही सकारात्मक चर्चा- नीतीश कुमार
एक सीट-एक उम्मीदवार वाले नीतीश कुमार की पार्टी के फॉर्मूले पर उन्होंने कहा, 'अगर विचार, विजन और मिशन स्पष्ट है, तो कोई भी मुद्दा नहीं होगा।' नीतीश कुमार ने इसे 'बहुत ही सकारात्मक चर्चा' बताते हुए कहा कि उन्होंने आने वाले चुनावों से पहले ही सभी तैयारियां करने पर चर्चा की।
विपक्ष दलों को एकजुट करने के मिशन पर हैं नीतीश
जेडीयू सुप्रीमो ने कहा, 'जो अभी सत्ता में है, उन्हें कुछ नहीं करना है। वह सिर्फ अपनी पब्लिसिटी कर रहे हैं। राष्ट्र के विकास के लिए कुछ नहीं किया जा रहा है।' नीतीश सोमवार सुबह उन विरोधी दलों को एकजुट करने के मिशन पर कोलकाता पहुंचे, जो स्थानीय वजहों से कांग्रेस से दूर दिखाई पड़ते हैं।

कांग्रेस के साथ गठबंधन के लिए कुछ दलों को मनाना है चुनौती
गौरतलब है कि तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर तैयार नहीं दिखती हैं। सपा नेता अखिलेश यादव तो यहां तक कह चुके हैं कि कांग्रेस वाले फ्रंट में शामिल होने में उन्हें कोई दिलचस्पी नहीं है। वैसे वह तेलंगाना के सीएम केसीआर के ऐसे ही प्रयासों का समर्थन भी दे चुके हैं।
राहुल की अयोग्यता ने विपक्षी दलों को जोड़ा
दूसरी तरफ ममता हैं, जिनकी कांग्रेस से तल्खी तब से और बढ़ी दिखाई पड़ती है, जबसे उसने विधानसभा उपचुनाव में टीएमसी से एक सीट छीन ली है। हालांकि, जबसे आपराधिक मानहानि के मामले में सजायाफ्ता होने पर राहुल गांधी की संसद सदस्यता चली गई, तब से तमाम विपक्षी दलों ने एक अप्रत्याशित एकजुटता दिखाने की कोशिश जरूर की है।
'नीतीश फॉर्मूला' से बनेगी बात?
बहरहाल, नीतीश कुमार एकबार फिर से उस अभियान पर निकले हुए हैं, जो उन्होंने भाजपा से गठबंधन तोड़ने के तत्काल बाद शुरू की थी। सूत्रों के मुताबिक नीतीश विपक्षी एकता के लिए जो फॉर्मूला दे रहे हैं, उसे उनकी पार्टी की ओर से 'नीतीश फॉर्मूला' के तौर पर प्रचारित किया जा रहा है।
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